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क्या IPL को बंद कर देना चाहिए?

बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने सभी राज्य संघों को भावनात्मक पत्र लिखकर कहा कि आईपीएल के खिलाफ हाल में की गई टिप्पणियों को देखते हुए सभी सदस्यों को मिलकर यह फैसला करना होगा कि क्या इस खेल टूर्नामेंट को रोक देना चाहिए.

ठाकुर ने लिखा है कि वह ‘आईपीएल को लेकर की गई तल्ख टिप्पणियों से आहत हैं.' उन्होंने अपने पत्र में आईपीएल से बीसीसीआई को हुए वित्तीय फायदे का भी जिक्र किया है. ठाकुर ने लिखा, 'पिछले नौ वर्षों में राज्य संघों को आईपीएल से हुए लाभ के कारण 2406 करोड़ रुपये मिले. बीसीसीआई ने आईपीएल के लाभांश से पूर्व क्रिकेटरों में एकमुश्त लाभ के आधार पर 110 करोड़ रुपये वितरित किए.'

ठाकुर ने इसके साथ ही केपीएमजी के अध्ययन का जिक्र किया जिसके अनुसार 'आईपीएल 2015 का भारतीय अर्थव्यवस्था पर 2650 करोड़ रुपये का आर्थिक प्रभाव रहा और इसके साथ ही इसने सीधे और परोक्ष रुप से कई लोगों को रोजगार मुहैया कराया. भारतीय जीडीपी में इसका योगदान 1150 करोड़ रुपये रहा.'

बीसीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि आईपीएल ने नौ वर्षों में विभिन्न करों के रुप में 2244 करोड़ रुपये का भुगतान किया.

हेल्‍थ पर बुरा असर डालता है बैट्री रेडिएशन

आजकल सभी लोग स्‍मार्टफोन का इस्‍तेमाल करते हैं जो कि स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर छोड़ता है. दिनों-दिन वातावरण में मोबाइल बैट्री रेडिएशन बढ़ता जा रहा है. अगर आप कई घंटों तक फोन पर लगे रहते हैं और उसे हमेशा साथ में रखते हैं तो आपकी हेल्‍थ पर बुरा असर पड़ता है. साथ ही पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी बदहाल हो जाता है.

क्‍या आप जानना चाहेंगे कि शरीर पर मोबाइल बैट्री रेडिएशन का प्रभाव कैसे पड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.

बायोलॉजिकल डिस्‍ऑर्डर

जब भी आप फोन को उठाकर उससे कॉल करते हैं या मैसेज करते हैं. यहां तक कि म्‍यूजिक भी सुनते हैं तो उससे रेडियो फ्रिक्‍वेंसी निकलती हैं जोकि बायोलॉजिकल डिस्‍ऑर्डर के लिए जिम्‍मेदार होती हैं. इससे मेटाबोल्जिम और खान-पान पर बुरा असर पड़ता है. साथ ही कई शोध में पता चला है कि इसे कई खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं.

सामान्‍य लक्षण

मोबाइल के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से थकान, कमजोरी और चक्‍कर आ सकते हैं या अगर आपको आते हैं तो इसके पीछे आपके द्वारा घंटों तक इस्‍तेमाल किया जाने वाला मेाबाइल ही प्रमुख वजह है.

कॉल को कम करें

अपने फोन का इस्‍तेमाल कम से कम करें. अगर आपको इमरजेंसी है तभी कॉल करें. घंटों तक बात करना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है.

डायरेक्‍ट कॉन्‍टेक्‍ट न रखें

अपने मोबाइल को डायरेक्‍ट बॉडी से टच न करवाएं. हमेशा पर्स या किसी बैग की जेब में रखें. पॉकेट में या गले में फोन को लटकाने से और भी बुरा असर शरीर पर पड़ता है.

चलती गाड़ी में इस्‍तेमाल न करें फोन

फोन को कभी भी चलती हुई गाड़ी में इस्‍तेमाल न करें. इससे दुर्घटना होने की संभावना रहती है.

बंद गाड़ी में इस्‍तेमाल न करें फोन

फोन को बंद गाड़ी में इस्‍तेमाल न करें. इससे सभी रेडिएशन आपके शरीर पर ही बुरा प्रभाव छोड़ेंगे

पास रखकर न सोएं मोबाइल

मोबाइल को कभी भी अपने पास रखकर न सोएं. इससे बुरी किरणों का प्रभाव दिमाग पर पड़ता है.

अपने वाइ-फाइ की स्पीड ऐसे बढ़ाएं तीन गुना

अगर आपके घर में इंटरनेट के फास्ट कनेक्शन होने के बाद भी पीसी या फिर लैपटॉप में धीमी स्पीड मिलती है तो इसके कई कारण हो सकते हैं. जिनमे से एक है डिवाइस को कम वाइ-फाइ सिग्नल मिलना. ये जरुरी नहीं है आपके घर के हर कोने में वाइ-फाइ सिग्नल मिल पाए. कभी-कभी राउटर की पोजिशन ठीक न होने के चलते इंटरनेट स्पीड धीमी आ सकती है. तो चलिए आपको बताते हैं एक ऐसा तरीका जिसके जरिए अगर आप चाहे तो घर पर ही अच्छा वाइ-फाइ रिफ्लेक्टर बना सकते हैं, जो वाइ-फाइ सिग्नल को 3 गुना तक बढ़ा सकता है. आइए जानते हैं वाइ-फाइ रिफ्लेक्टर बनाने का तरीका.

1. सबसे पहले एक खाली बियर कैन लें जो कहीं से फटा न हो.

2. फिर उस बियर कैन को एक तरफ से पूरी तरह काट दें और दूसरी तरफ का थोड़ा हिस्साा बचा कर रखें.

3. अब थोड़ा हिस्सा छोड़ दें ध्यान रहे दोनों तरफ से थोड़ा सा हिस्सा छोड़ दें.

4. कैन काटने के बाद उसे खोल दें.

5. फिर इसके एक हिस्से में टेप या फिर कोई भी चिपकाने वाली चीज लगा दें जो राउटर को कैन से चिपका दे.

6. अब कैन को छेद की तरफ से राउटर के एंटीना के अंदर डालें.

7. बस अब आपका वाइ-फाइ रिफ्लेक्टर तैयार है. कैन के खुले हुए हिस्से को उसी तरफ रखें जहां पर आपको सिग्नल चाहिए.

अब आप चाहे तो अपने पीसी या फिर किसी दूसरी डिवाइस से वाइ-फाइ सिग्नल चेक कर सकते हैं.

स्पेक्ट्रम नीलामी: नहीं लगी महंगे बैंड्स की बोली

टेलीकॉम स्पेक्ट्रम नीलामी खत्म हो गई. इसके साथ ही गुजरे पांच दिनों से चल रही स्पेक्ट्रम की नीलामी में 65,789 करोड़ रुपये की बोलियां हासिल हुई हैं. यह बिक्री के लिए रखे गए कुल स्पेक्ट्रम का महज 40 फीसदी ही बैठता है.

महंगे 700 मेगाहर्ट्ज और 900 मेगाहर्ट्ज बैंड्स के लिए इन पांच दिनों की नीलामी में कोई बोली नहीं लगाई गई. 700 मेगाहर्ट्ज बैंड से ही अकेले सरकारी खजाने में 4 लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद लगाई गई थी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया, '965 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए 31 राउंड्स की नीलामी के आखिर में करीब 65,789 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई हैं, जबकि नीलामी में कुल 2,354.55 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम रखा गया था.'

वैल्यू टर्म में करीब 60 फीसदी मोबाइल एयरवेव्ज बिना बिके रह गईं. इसे देश के सबसे बड़े स्पेक्ट्रम नीलामी के तौर पर देखा जा रहा था. 1 अक्टूबर से शुरू हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में 5.63 लाख करोड़ रुपये के मूल्य का स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए रखा गया था.

इससे पहले, दिन की शुरुआत में 26वें राउंड के अंत में टोटल बिड्स पिछले दिन के बंद के मुकाबले गिरकर 63,325 करोड़ रुपये पर आ गईं. हालांकि, बाद के राउंड्स में गतिविधि बढ़ी. अंतिम दिन हर राउंड 45 मिनट का था, जबकि इससे पिछले दिन हर राउंड की अवधि 60 मिनट की थी.

बिडिंग एक्टिविटी केवल कुछ सर्किल्स में चली, जिसमें बड़े पैमाने पर 1800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए दिलचस्पी देखी गई. इन स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ऑपरेटर्स 4जी सर्विसेज के लिए कर सकते हैं.

इंडस्ट्री ने 2100 मेगाहर्ट्ज (3जी/4जी) बैंड, 2500 मेगाहर्ट्ज (4जी) बैंड और 800 मेगाहर्ट्ज (2जी/4जी) बैंड्स में भी दिलचस्पी दिखाई. कर्ज से दबी हुई टेलीकॉम इंडस्ट्री नीलामी को लेकर काफी सतर्कता भरा रुख बनाए रही और कम कीमत वाले स्पेक्ट्रम की खरीदारी पर ही जोर दिया ताकि उन्हें मोबाइल सर्विस क्वॉलिटी को सुधारने में मदद मिल सके साथ ही दुनिया के सबसे दूसरे बड़े टेलीकॉम मार्केट में वे नेक्स्ट जनरेशन सर्विसेज को पेश कर सकें.

रेटिंग एजेंसी इकरा के मुताबिक, टेलीकॉम इंडस्ट्री पर कंसॉलिडेटेड कर्ज का स्तर दिसंबर 2015 में करीब 3,80,000 करोड़ रुपये रहा, जो कि मार्च 2014 में 2,90,000 करोड़ रुपये पर था.

सपा में दिखावे का ‘फैमली ड्रामा’

समाजवादी पार्टी का ‘फैमली ड्रामा’ महज दिखावा भर है. इसके जरीये सपा अखिलेश यादव की मासूम छवि को बचाते हुये वोट के लिये दूसरे समझौते कर रही है. फेमली ड्रामा देखकर जनता और पार्टी कार्यकर्ता दोनों को खामोश किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी में 2 तरह के लोग हैं. एक वह लोग हैं जो अपने परिवार और करीबियों के लिये सपा को सबसे बेहतर पार्टी मानते हैं. दूसरी ओर वह लोग जो अखिलेश को बेहतर मुख्यमंत्री मानते हैं. समाजवादी पार्टी का थिंकटैंक मानता है कि अखिलेश की तारीफ करने वाले वोट देंगे या नहीं, इसमें शक है. ऐसे में पार्टी को अपने बेस वोटर को भी साथ रखना है जो दंबग किस्म का है.

चुनाव में दंबग और साफ छवि दोनो का लाभ पार्टी को मिल सके, इसके लिये ‘फैमली ड्रामा’ चल रहा है. जिसके जरीये कभी अखिलेश यादव को सामने किया जाता है तो कभी शिवपाल यादव को. सपा को ‘फैमली ड्रामा’ से सुर्खियों में बने रहने का मौका भी मिल रहा है. पौलटिक्स में पर्सनाल्टी मैनेजमेंट की जानकारी रखने वाले जानकार कहते हैं ‘सपा में फैमली ड्रामा शुरू होने के बाद प्रिंट और टीवी मीडिया से लेकर गांव, शहर तक सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी की हुई. जो लोग अखिलेश सरकार के प्रचार में छपे विज्ञापनों को नहीं देखते थे, वह अखिलेश के प्रति सहानुभूति रखने लगे.’

सपा आज के समय में देश की सबसे बड़ी परिवारवादी पार्टी है. एक परिवार के इतने सदस्य संसद और विधानसभा में किसी और पार्टी के नहीं हैं. ऐसे में हर किसी की दिलचस्पी सपा के फैमली ड्रामा को जानने में रहती थी. सोशल मीडिया के युग में सपा में झगड़े के बाद एक एक घटना वायरल होती रही. यह सिलसिला अभी जारी है. सपा सरकार या संगठन के हर फैसले को परिवार के विवाद से जोड़ दिया जाता है. जबकि सपा में बड़े स्तर के नेता मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और अखिलेश यादव खुद यह कह चुके हैं कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है.

प्रचार के युग में एंटी पब्लिसिटी का अपना महत्व है. सपा इसका मजा ले रही है. एक सोची समझी योजना के तहत बड़े नेता अपने बयानों से इसको हवा देने का काम भी करते हैं. सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिह यादव ने जब संगठन में फेरबदल किया तो उसे सपा में विवाद की तरह से पेश किया गया. खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि वह कुछ अदृश्य ताकतों से लड़ रहे हैं. यह अदृश्य ताकतें कौन सी हैं, यह पता नही चल सका. सपा में आने वाले दिनों में कई विधायकों के टिकट कटने हैं. कुछ विधायक प्रत्याशी बदले जाने हैं.

ऐसे में इस लड़ाई का लाभ लेकर टिकट पाने और टिकट कटने वाले दोनों तरह के नेताओं को संतुष्ट रखना है. ऐसे में फैमली ड्रामा काम आयेगा. अखिलेश यादव के पक्ष में प्रदेश में एक सहानुभूति की लहर बनाई जा रही है. हर घर परिवार में चाचा भतीजा के बीच अलग अलग तरह के विवाद हैं. ऐसे में वह सपा परिवार के झगड़े को अपने घर जैसा सोच कर उसके पक्ष में खड़ा हो रहा है. इस विवाद से सपा अपने दोनो हाथों में लड्डू रख रही है.

1 पैसे में मिलेगा 10 लाख का रेल यात्री बीमा

त्योहारी सीजन में अब भारतीय रेल (आईआरसीटीसी) ने भी यात्रियों को बंपर दिवाली तोहफा दिया है. रेल यात्री अब 7 अक्टूबर से सिर्फ 1 पैसे में यात्रा बीमा हासिल कर पाएंगे. वैकल्पिक यात्रा बीमा योजना के तहत अब मात्र 1 पैसे की मामूली दर पर ही यात्रा बीमा की सेवा का फायदा उठा पाएंगे.

आपको बता दें कि इससे पहले इस बीमा के लिए यात्रियों से 92 पैसे लिए जा रहे थे. गौरतलब है कि IRCTC के पोर्टल से बुक किए जाने वाले ट्रेन टिकट पर 10 लाख रुपए का यात्रा बीमा दिया जाता है.

1 सितंबर से शुरु हुई यह योजना

भारतीय रेलवे की यह सेवा 1 सितंबर से शुरु हुई थी. इस योजना का फायदा उठाने वाले यात्री की संख्या बढती जा रही है. यह देख उत्साहित होकर आईआरसीटीसी ने प्रीमियम अमाउंट को 92 पैसे से घटाकर 1 पैसा कर दिया है.

कब तक मिलेगा इस सेवा का फायदा

आईआरसीटीसी की इस शानदार स्कीम का फायदा रेल यात्री 31 अक्टूबर 2016 तक बुक किए गए सभी टिकटों पर उठा सकते हैं. आईआरसीटीसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डॉयरेक्टर ए के मोनाचा ने बताया, “हमने वैकल्पिक यात्रा बीमा योजना के प्रीमियम अमाउंट को तत्काल प्रभाव से कम करने का फैसला किया है. यह एक स्पेशल प्रमोशनल कदम है जिसका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में रेल यात्री इस सुविधा का फायदा उठा सकें.”

उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह 8 बजे तक करीब 1,20,87,625 रेल यात्री इस खास सुविधा का चयन कर चुके हैं.

अनुष्का के लिए बेहद मुश्किल थी ‘चन्ना मेरेया’ की शूटिंग

करण जौहर की आने वाली फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' का गाना 'चन्ना मेरेया' सुपर हिट रहा है. इस गाने में रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा की एक्टिंग दिल को छू लेने वाले वाली है, लेकिन अनुष्का के लिए इसकी शूटिंग करना बेहद मुश्किल था.

उन्होंने बताया कि वो इस गाने में एक खूबसूरत दुल्हन की तरह महसूस नहीं कर पा रही थीं और इसकी वजह थी भारी लहंगा, जिसका वजन 17 किलो था, गहने वगैरह सभी को मिलाकर कुल वजन तकरीबन 20 किलो हो गया था. जिसकी वजह से अनुष्का के लिए शूटिंग करना बेहद मुश्किल था.

रणबीर के साथ साथ अनुष्का भी गाने में इमोशनल दिखी हैं. इस गाने को अरिजीत सिंह ने गाया है और इसके बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं. फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' 28 अक्टूबर को रिलीज होगी.

देखें वीडियो, अनुष्का बता रही हैं कितनी मुश्किल थी गाने की शूटिंग..

 

नरगिस के ऑडिशन का 12 साल पुराना VIDEO वायरल

बॉलीवुड एक्ट्रेस नरगिस फाखरी का इन दिनों 12 साल पुराना एक वीडियो चर्चा में है. इसमें नरगिस अमेरिका के एक हिट रिएलिटी शो 'अमेरिकाज नेक्स्ट टॉप मॉडल' (America’s Next Top Model) के लिए ऑडिशन देती दिख रही हैं. नरगिस ने ये ऑडिशन 2004 में दिया था. इसमें नरगिस नर्वस दिख रही हैं. बातचीत में लड़खड़ा भी रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने जज को कॉन्फीडेंस से जवाब दिया.

वीडियों में शो की क्रिएटर टायरा बैंक्स ने नरगिस से पूछा 'क्या चीज है जो आपको मॉडलिंग के प्रति प्रेरित करती है? इस पर नरगिस ने कहा, 'यह भी एक काम ही है. और कुछ नहीं.' नरगिस ने कहा 'मैं वाकई नहीं जानती कि इस बारे में मुझे और क्या कहना चाहिए.' वो इस शो में तीसरे राउंड में हारकर बाहर हो गईं थी. नरगिस ने साल 2011 में इम्तियाज अली की फिल्म 'रॉकस्टार' से बॉलीवुड में कदम रखा और उसके बाद से चर्चा में आईं.

नरगिस को इससे पहले रितेश देशमुख अभिनीत फिल्म ‘बैंजो’ में देखा गया था. वह वरुण धवन और जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म ‘ढिशूम’ में भी नजर आई थीं.

देखें वीडियो

इंडिया में 3500 पेट्रोल पंप खोलेगी BP Plc

ब्रिटिश एनर्जी कंपनी बीपी पीएलसी को भारत में 3,500 पेट्रोल पंप खोलने के लिए सरकार से लाइसेंस मिला है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है.

देश में फ्यूल रिटेलिंग बिजनस में प्रवेश करने वाली यह शेल के बाद दूसरी कंपनी है. भारत में फ्यूल रिटेलिंग पर सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों का दबदबा है और देश में लगभग 56,000 पेट्रोल पंपों में से करीब 95 पर्सेंट इन्हीं कंपनियों के हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार ऑइल तेजी से बढ़ रहे फ्यूल मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करने वाली अन्य प्राइवेट कंपनियां हैं.

इस वर्ष अप्रैल से अगस्त के बीच पेट्रोल और डीजल की सेल्स क्रमश: 14 और 6 पर्सेंट बढ़ी है. देश की इकनॉमिक ग्रोथ 7 पर्सेंट से अधिक होने की वजह से व्हीकल्स और फैक्टरियों से फ्यूल की डिमांड में इजाफा हुआ है.

बीपी ने ईमेल के जरिए दिए गए जवाब में बताया, 'कंपनी भारत में फ्यूल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए एक अच्छा भविष्य देखती है. हम इस मार्केट में शामिल होने और इसके डिवेलपमेंट में योगदान देने में दिलचस्पी रखते हैं. हमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की मार्केटिंग के लिए अप्रूवल मिला है और हमने पेट्रोल और डीजल की मार्केटिंग की अनुमति के लिए आवेदन दिया है.'

देश में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ सहित फ्यूल के ट्रांसपोर्टेशन के मार्केटिंग राइट देश में एक्सप्लोरेशन, प्रॉडक्शन, रिफाइनिंग, पापइलाइंस या टर्मिनल्स में 2,000 करोड़ रुपये का इन्वेस्ट करने वाली या प्रपोजल देने वाली कंपनी को दिए जाते हैं.

बीपी ने कुछ समय पहले एटीएफ की मार्केटिंग के लिए लाइसेंस मांगा था जो इसे कुछ महीने पहले मिला है. बीपी इंडिया के हेड शशि मुकुंदन ने कहा, 'यह एक बड़ा मार्केट है, जो बढ़ रहा है. एविएशन बिजनस में वृद्धि हो रही है. हम एविएशन बिजनस में ग्लोबल लेवल पर एक बड़ी कंपनी हैं. इस वजह से हमें यहां बिजनस करना चाहिए.'

उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले कंपनी ने पेट्रोल और डीजल बेचने के लिए फिलिंग स्टेशंस खोलने के लिए अलग से एक आवेदन किया था.

बीपी के पास दुनियाभर में अपने मालिकाना हक वाले, फ्रेंचाइजी और डीलर की ओर से चलाए जाने वाले लगभग 17,000 फिलिंग स्टेशन हैं. इनमें से 15,000 अमेरिका और यूरोप में हैं.

यह ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में कमर्शल कस्टमर्स को भी सप्लाई करने वाली एक बड़ी कंपनी है. इसके पास दुनियाभर में 13 ऑइल रिफाइनरीज हैं. मुकुंदन ने यह जानकारी नहीं दी कि कंपनी अपने रिटेल बिजनस के लिए फ्यूल की सोर्सिंग कैसे करने की योजना बना रही है.

पाकिस्तान, तानाशाह और लोकतंत्र

पाकिस्तान के पहले तानाशाह अयूब खां की एक बात काफी चर्चित हुई थी कि गरम आबोहवा के कारण हमारा देश लोकतंत्र के मुफीद नहीं है. अब हालिया इतिहास के तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने फरमाया है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र बिल्कुल बेअसर रहा है और उसकी नाकामियों को दुरुस्त करने के लिए फौज को तमाम जरूरी कदम उठाने चाहिए.

मुशर्रफ का बयान उतना बेतुका नहीं है, जितना कि अयूब का जुमला हंसने लायक, मगर अहम बात यह है कि इन दोनों तानाशाहों के बयान एक ही सोच से प्रेरित हैं. दरअसल, लोकतंत्र में तानाशाहों के लिए कोई जगह नहीं होती, यही वजह है कि इन तानाशाहों ने सबसे पहले लोकतंत्र का गला घोटा. लेकिन उन्हें लोकतंत्र की जुबानी हिमायत के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि जनता उनकी इस बदगुमानी से इत्तफाक नहीं रखती.

जनरल अयूब की ‘बेसिक डेमोक्रेसीज स्कीम’ हो या जिया उल हक के बगैर पार्टियों वाले चुनाव या फिर मुशर्रफ का लगातार यह कहते रहना कि सही मायने में वही पाकिस्तान में लोकतंत्र ला रहे हैं, ये उनकी मजबूरियों की देन थे. कहने की जरूरत नहीं कि मुशर्रफ की निगाह में असली लोकतंत्र वही था, जो उन्हें हुकूमत में बनाए रखता. लेकिन जब देश के लोगों को वाकई तय करने का मौका मिला और उन्होंने उनका बोरिया-बिस्तर बंधवा दिया, तब उनके लिए लोकतंत्र (चाहे वह असली हो या कुछ और) की कोई उपयोगिता नहीं रही. उनका हालिया बयान यही दिखाता है.

तानाशाह लोकतंत्र के प्रति अपने तिरस्कार को छिपाने की अक्सर कोशिश करते हैं, मगर वे इसमें कामयाब नहीं हो पाते, क्योंकि लोग उनके ख्यालों से सहमत नहीं होते. आखिरकार छात्रों, कामगारों और किसानों की साझा मुहिम ने ही अयूब को तख्त से बेदखल किया, जबकि जिया को अहिंसक जन-आंदोलन से जूझना पड़ा था, इसी तरह साल 2007 में जब मुशर्रफ ने दोबारा तख्तापलट की कोशिश की, तो उनको भी सिविल सोसायटी की नाराजगी का सामना करना पड़ा था. दरअसल, ये तानाशाह इसलिए लोकतंत्र का मजाक उड़ाते हैं, क्योंकि कुछ सत्ता-लोलुप राजनेताओं की उनसे मिलीभगत रही है.

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