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एक लड़का मुझे भरोसे में ले कर काफी समय से सैक्स कर रहा था. मैं उस के चंगुल में फंस चुकी हूं. क्या करूं.

सवाल

मैं 22 साल की युवती हूं. 2 महीने पहले तक मेरा एक लड़के से अफेयर था. वह भरोसे में ले कर काफी समय से मुझ से सैक्स कर रहा था, लेकिन उस से जब शादी की बात करती तो वह टाल जाता. अब मैं ने उस से नाता तोड़ लिया है तो कहता है कि मैं मर जाऊंगा और तुम्हें इस का जिम्मेदार बताऊंगा. तुम किसी और से शादी करोगी तो उसे भी इस रिश्ते के बारे में बता दूंगा. दरअसल, वह ऐसा शख्स था जो भोलीभाली युवतियों को अपने मोहपाश में फंसा कर ब्लैकमेल करता है, मैं उस के चंगुल में फंस चुकी हूं. यह सुझाएं कि इस दुविधा से कैसे निकलूं? मेरे पति को शादी के बाद कहीं मेरे सैक्स संबंध का पता तो नहीं चल जाएगा?

जवाब

आप बिलकुल न घबराएं. शादी के बाद आप के पति को आप के सैक्स संबंध के बारे में बिलकुल भी पता नहीं चलेगा जब तक कि आप खुद न बताएं. रही उस ब्लैकमेलर की बात तो जान लें कि निस्वार्थ प्रेम की आड़ में भोलीभाली युवतियों को अपने जाल में फंसा कर ऐसे युवक सिर्फ अपना फायदा देखते हैं जबकि युवतियां अपना सर्वस्व लुटा बैठती हैं.

आप बोल्ड हैं जो आप ने ऐसा कदम उठाया. आगे भी जागरूक रहें. अगर वह ब्लैकमेल करे तो अपने पति व घर वालों को कौन्फिडैंस में ले कर अपनी प्रेम व ब्रेकअप की बात बताएं. फिर पुलिस में भी कंप्लैंट कर सकती हैं. बस, घबराइए नहीं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

 

रामानंद सागर की पोती का ये हॉट अवतार उड़ा देगा आपके होश

90 के दशक में टीवी सीरियल रामायण बनाने वाले रामानंद सागर तो आप सबको याद ही होंगे. जी हां ये वही रामानंद सागर हैं जिनके धार्मिक सीरियल्स जैसे श्री कृष्ण, विक्रम बेताल और लव-कुश घर-घर में प्रसिद्ध हुए थे. जब भी इनके नाम का जिकर होता है तो अक्सर दिमाक में संस्कार और मर्यादा पुरूषोत्म वाली छवि नज़र आती है. क्योंकि हमारा बचपन इन्ही के शो देख-देख कर बीता है, लेकिन अपने सीरियल से संस्कारों और मर्यादा की छाप छोड़ने वाले रामानंद सागर की पोती आजकल सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड पिक्चर्स से उन्ही के संस्कारों की कोई और ही कहानी बता रही है.

जी हां, ये हैं रामानंद सागर की 19 साल की पोती साक्षी चोपड़ा, जो सोशल साइट्स पर काफी एक्टिव रहती हैं. हाल ही में साक्षी ने इंस्टाग्राम पर अपनी कई सारी बिकनी पिक्चर्स पोस्ट की हैं. इन फोटोज में साक्षी बेहद हॉट और ग्लैमरस दिख रही हैं. साक्षी की इन ग्लैमरस फोटोज के सामने आते ही काफी चर्चाएं हो रही हैं.

आपको बता दें कि साक्षी वीडियो ब्लॉगर भी हैं और आए दिन वो अपनी सेक्सी वीडियोज यूट्यूब पर अपलोड भी करती रहती हैं जिन्हे लोग काफी पसंद करते हैं.
वैसे आपको बता दें कि रामानंनद सागर कि पोती साक्षी इससे पहले चर्चाओं में तब आई थी जब उनका पूजा बेदी की बेटी आलिया इब्राहिम से एक पार्टी के दौरान पब में झगड़ा हुआ था. इसके बाद पूजा बेदी ने पुलिस में एफआईआर भी की थी. दूसरी ओर साक्षी की मां मीनाक्षी सागर ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी. हालांकि बाद में इस मामले में पूजा बेदी को गिरफ्तार कर लिया गया था.

खैर मामला चाहे जो भी हो पर रामानंद सागर की पोती का ये अवतार वाकई में हैरान कर देने वाला है. आप भी देखिए रामानंद सागर की पोती का ये हॉट अवतार.

50 साल के करियर में किसी से नहीं हारा यह पहलवान

वह एक दिन में हजार दण्डबैठक लगाते थें. उनकी डायट में छह देशी चिकन, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी और बादाम का टॉनिक होता था. हम बात कर रहे हैं गुलाम मोहम्मद उर्फ ‘द ग्रेट गामा’ के बारे में. इनके जैसा पहलवान भारत को दुबारा नहीं मिल सका है.

10 साल की उम्र में महारथियों को चटाई धूल

पंजाब के अमृतसर में 1878 में जन्में गुलाम ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन वह करीम बक्श जैसे महान पहलवान को भी पटखनी दे देंगे और दुनिया के महारथी बन जाएंगे. पहलवान पिता मोहम्मद अजीज बक्श की मौत के बाद दतिया के महाराज ने गामा को पेशेवर पहलवान बनाने के लिए अपने पास रख लिया. पहलवानी के गुर सीखते हुए गामा ने महज 10 साल की उम्र में ही कई महारथियों को धूल चटा दी.

इस मैच से हुए मशहूर

गामा युवावस्था में थे और उनके सामने आने वाला हर पहलवान धूल चाट लौटता था. 1895 में उनका सामना देश के सबसे बड़े पहलवान रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ. गामा ने रहीम से बराबर की कुश्ती लड़ी और आखिरकार मैच ड्रॉ हुआ. इस लड़ाई के बाद गामा पूरे देश में मशहूर हो गए.

पहलवान, जिन्हें नहीं मिली हार

साल-दर-साल गामा की ख्याति बढ़ती रही और वह देश के अजेय पहलवान बन गए. गामा ने 1898 से लेकर 1907 के बीच दतिया के गुलाम मोहिउद्दीन, भोपाल के प्रताब सिंह, इंदौर के अली बाबा सेन और मुल्तान के हसन बक्श जैसे नामी पहलवानों को लगातार हराया. 1910 में एक बार फिर गामा का सामना रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ. एक बार फिर मैच ड्रॉ रहा. अब गामा देश के अकेले ऐसे पहलवान बन चुके थे, जिसे कोई हरा नहीं पाया था.

विदेशी पहलवानों के भी धूल चटाई

भारत में अजेय होने के बाद गामा ब्रिटेन गए. वहां उन्होंने विदेशी पहलवानों को धूल चटाने का मन बनाया लेकिन लंबाई कम होने की वजह से उन्हें वेस्टर्न फाइटिंग में शामिल नहीं किया गया. इसके बाद, गामा ने वहां के सभी पहलवानों को खुली चुनौती दी लेकिन लोगों ने इसे मार्केटिंग की चाल समझकर तवज्जो नहीं दी. आखिरकार, गामा ने वहां के सबसे बड़े पहलवानों स्टैनिसलॉस जबिश्को और फ्रैंक गॉच को चुनौती दे डाली.

पहले हेवी वेट चैंपियन

चैंपियन स्टैनिसलॉस जबिश्को ने चुनौती स्वीकार कर ली और 10 सितंबर 1910 को फाइट हुई. गामा ने जबिश्को को पहले ही मिनट में जमीन पर पटक दिया. 2 घंटे 35 मिनट तक मैच चला, लेकिन उसे ड्रॉ करार दे दिया गया. मैच दुबारा 19 सितंबर को हुआ और जबिश्को मैच में आने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाए. इस तरह, गामा वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पहलवान बन गए. यह खिताब रुस्तम-ए-जमां के बराबर था.

1927 में आखिरी फाइट

1911 में गामा का सामना फिर रहीम बक्श से हुआ. इस बार रहीम को गामा ने चित कर दिया. इसके बाद, 1927 में गामा ने आखिरी फाइट लड़ी. उन्होंने स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन को हराकर खामोशी से इस खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. दिलचस्प बात यह रही कि 50 साल के करियर में गामा को कोई हरा ही नहीं सका.

नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स म्यूजियम में मिली जगह

1947 में बंटवारे के बाद गामा पाकिस्तान में बस गए और वहीं लंबी बीमारी झेलते हुए 1963 में उनकी मौत हो गई. जिस भार से गामा पहलवान वर्जिश किया करते थे, उस 95 किलो के भार को पटियाला के नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स म्यूजियम में आज भी सुरक्षित रखा गया है.

अब आएगा 100 रुपए का नया नोट

अर्थव्यवस्था से काले धन को बाहर करने के लिए सरकार ने 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का ऐलान किया था. सरकार के इस फैसले पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही.8 नवंबर के बाद से ही नोटों से जुड़ी कोई न कोई खबर आ ही रही है. नोटबंदी के बाद आम आदमी को बहुत सी परेशानियां उठानी पड़ी, कुछ लोगों ने तो नोट बदलने के चक्कर में अपनी जान तक गंवा दी. पर धीरे धीरे स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है. 500 और 2000 के नए नोटों के बाद अब आरबीआई जल्द ही 100 रुपए के नए नोट लाने वाला है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्दी ही 100 रुपए के नए नोट चलन में लाएगा. यह महात्मा गांधी श्रृंखला-2005 की डिजाइन के जैसे ही होंगे. आरबीआई ने एक अधिसूचना जारी करते हुए बताया, ‘रिजर्व बैंक जल्दी ही महात्मा गांधी श्रृंखला-2005 में 100 रुपए के नये नोट जारी करेगा. इसमें इंसेट लेटर ‘आर’ दोनों नंबर पैनलों में होगी. इस पर रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.’

नए नोट की खूबियां

नोट के पिछले हिस्से में छपाई वर्ष 2017 प्रकाशित होगा.

– नंबर पैनल में अंक का आकार बढ़ते हुए क्रम में होगा.

– नोट के सीधे भाग में ब्लीड लाइन और बड़े पहचान चिन्ह होंगे.

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से इससे पहले 50 रुपए के भी ऐसे नोट जारी करने का ऐलान कर चुका है.

दबाव में हैं अली अब्बास जफर

2012 की चर्चित फिल्म ‘‘एक था टाइगर’’ की सिक्वअल फिल्म ‘‘टाइगर जिंदा है’’ के निर्देशक अली अब्बास जफर अपने ट्वीटर एकाउंट पर जो कुछ पोस्ट कर रहे हैं, उस पर यदि गौर फरमाया जाए, तो यह बात साफ तौर पर उभर कर आती है कि फिल्म ‘‘टाइगर जिंदा है’’ के निर्देशन को लेकर अली अब्बास कितना अधिक दबाव व तनाव से गुजर रहे हैं. ऐसा होना स्वाभाविक भी है.

सलमान खान व कटरीना कैफ अभिनीति फिल्म “एक था टाइगर” एक सफल फिल्म थी, जिसके निर्देशक कबीर खान थे, जबकि अब इसी फिल्म के सिक्वअल ‘‘टाइगर जिंदा है’’ का निर्देशन कबीर खान की बजाय अली अब्बास जफर कर रहे हैं. इसी के चलते उन पर दबाव ज्यादा है. तभी तो अली अब्बास जफर इस फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले मध्य यूरोप व उत्तरी अमेरिका घूम के वहां शूटिंग की लोकेशन का जायजा लेकर वापस लौटे है. अब उनके ट्वीटर एकाउंट से साबित होता है कि जिस काम को सहायक निर्देशकों  को करना चाहिए, वह काम भी खुद अली अब्बास जफर अंजाम दे रहे हैं. जिससे शूटिंग के समय समस्या न आए. इन दिनों वह इस फिल्म की शूटिंग के दौरान जिन हथियारों को सलमान खान चलाने वाले हैं, उन हथियारों की सफाई करने का काम खुद अली अब्बास जफर कर रहे हैं और उसकी फोटो भी ट्विटर पर उन्होंने पोस्ट की है. एक निर्देशक का इस तरह हर बारीक से बारीक चीज पर ध्यान देना एक अच्छा संकेत है, मगर इन चीजों को ट्विटर पर फोटो के साथ ट्वीट कर अली अब्बास जफर अपनी इस मेहनत, इस तैयारी से किसे प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं, यह तो वही जाने.

बहुत जल्द बड़े पर्दे पर वापसी करेंगी प्रीति जिंटा

खबर है कि अभिनेत्री प्रीति जिंटा शादी के बाद एक बार फिर इंडस्ट्री में आने वाली हैं. लैक्मे फैशन वीक के समर रिसोर्ट 2017 के इंडियन टेक्सटाइल डे पर वह असम की डिज़ाइनर संयुक्ता दत्ता की खास डिजाईन की हुई, ब्लैक एंड रेड के कॉम्बिनेशन पर सिल्क की ‘मेखला चादोर’ में शो स्टॉपर के रूप में दिखीं.

इस अवसर पर प्रीति कहती हैं कि मैंने पहली बार किसी डिज़ाइनर के कपड़े पहनकर रैम्प वाक किया है. यह असम की ट्रेडिशनल साड़ी है, जिसे पहनना बहुत ही आसान होता है. दो भागों में बटी हुई ये साड़ी बहुत ही खुबसूरत है. हाथो से बुनी हुई ये ‘मेखला चादोर’ बहुत ही खास होती है.

मैं हमेशा जब भी साड़ी पहनती हूं देखती हूं कि साड़ी ठीक से बंधी हुई हो, क्योंकि मैंने फिल्मों में भी बहुत कम साड़ी पहने हैं. मैं अपने वार्डरोब में इस तरह के कलेक्शन अवश्य रखना चाहूंगी. अपने फैशन के बारे में प्रीति आगे कहती हैं कि मुझे साड़ी के साथ गहने पहनना भी खूब पसंद है. हमेशा से मुझे आरामदायक कपड़े पसंद है और अधिकतर मैं जींस टी शर्ट पहनती हूं.

फिल्मों में आने के बारे में प्रीति कहती हैं कि ‘भैयाजी सुपरहिट’ फिल्म तैयार है. मैं इसमें एक बार फिर से बबली रोल, जो कि मैं नहीं करना चाहती थी और कर रही हूं. ये मजेदार फिल्म है. मुझे इसकी शूटिंग में भी खूब मज़ा आया. शादी की वजह से मुझे इस फिल्म को करने में थोड़ी देर हुई पर मुझे खुशी है कि मेरे इस साल की शुरुआत अच्छी तरह हुई है और इस साल मेरी फिल्म भी रिलीज होगी.

हर दल में दलबदल का दलदल

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक दलबदल हुआ है. हर दल में दलबदल हो रहा है. बाहरी भीतरी का घमासान सबसे उपर है. कई प्रत्याशी खुद जीतने के लिये कम दूसरे को हराने के लिये ज्यादा ताल ठोंक रहे हैं. दलबदल के दलदल से एक बात साफ नजर आ रही है कि अब किसी भी दल की कोई विचारधारा नहीं रह गई है. सारा गणित सत्ता को हासिल करने के लिये तैयार किया जा रहा है. सत्ता को हासिल करने के लिये अभी तक जाति, धर्म, परिवार और बाहूबल के आधार पर टिकट दिया जाता था, अब बाहरी दल के नेता से भी कोई एतराज नहीं रह गया है. ऐसे नेताओं के साथ पार्टी के कार्यकर्ताओं का तालमेल मुश्किल हो गया है. जो कार्यकर्ता सालोंसाल से चुनाव लड़ने के लिये अपना क्षेत्र बनाने में लगे थे, उनकी जगह किसी दूसरे को टिकट देकर पार्टियों ने मेहनत करने वालों को निराश किया है.

भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की हालत सबसे खराब है. सबसे अधिक दलबदल का दलदल भाजपा में हुआ है. राजधानी लखनऊ की विधानसभा की 9 सीटे हैं. इनमें से केवल 3 पर भाजपा नेताओं को टिकट मिली है. बाकी 6 पर भाजपा के बाहरी नेताओं को टिकट दिया गया है. ऐसी हालत सभी सीटों पर है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन की हालत भी अजब हो रही है. कई सीटे ऐसी हैं जहां पर सपा और कांग्रेस दोनो के प्रत्याशियों के साथ सपा के नाराज नेता भी लोकदल जैसे छोटे दलों से मैदान में हैं. राजनीति के जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में दलबदल हुआ है. अब तो यह पहचान मुश्किल हो गई है कि कौन नेता किस दल से लड़ रहा है.

राजनीतिक समीक्षक शिवसरन सिंह गहरवार कहते हैं ‘हर दल का मकसद ज्यादा से ज्यादा सीटों को जीतने का है. इसके लिये उसने दलीय सीमाओं से दूर हटकर टिकट बांटे हैं. समाजवादी पार्टी में जिन मंत्रियों और विधायको के टिकट कटे, वह दूसरे दलों से चुनाव लड़ गये. हर दल में दलबदल कर चुनाव लड़ने वाले नेता हैं. इससे एक बात साफ हो गई कि राजनीतिक दल केवल जीत हासिल कर कुर्सी पाना चाहते हैं. विचाराधारा और एजेंडा मायने नहीं रखता. लोकतंत्र के लिये यह बहुत खतरनाक है. इससे नये कार्यकर्ताओं को निराशा हुई. दलों में दलदल का प्रभाव चुनाव में भीतरघात और कम मतदान के रूप में सामने आ सकता है. कार्यकर्ता ही चुनाव में वोटर को पोलिंग तक ले जाने का काम करता है. अगर कार्यकर्ता निराश हैं तो प्रभाव मतदान पर पड़ेगा. बाहरी दलों के नेताओं के साथ उनके समर्थक भी आते हैं. यह लोग आपसी तालमेल बैठाने में असफल होते हैं. जिस नेता से क्षेत्र के लोग निराश होते हैं और वही नेता दूसरे दल से टिकट लेकर आता है तो वोटर नेता और टिकट देने वाली पार्टी दोनो से नाराज हो जाता है.’

जागरुकता ही है कैंसर का इलाज

विश्वभर में कैंसर की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. हर साल इस बीमारी के चपेट में लाखों लोग आ रहे हैं. इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने के लिये विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा हर वर्ष 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया. जिसमें लोगों को कैंसर के मुख्य कारण और बचाव के विषय में जागरुक किया जा रहा है.

कैंसर की जानकारी के अभाव में लोगों को आमतौर पर सही समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाता है, जिसकी वजह से डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स भी उनकी मदद नहीं कर पाते हैं. विश्व कैंसर दिवस का मकसद कैंसर के नफा नुकसान को बताना नहीं है, बल्कि इसके प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना है, ताकि कोई दूसरा व्यक्ति इससे प्रभावित ना हो.

डॉक्टर्स की माने तो कैंसर होने के कई मुख्य कारण हैं जिनमें उम्र का बढ़ना,  किसी भी प्रकार का इरिटेशन, तम्बाकू का सेवन, विकिरणों का प्रभाव, आनुवांशिकता, शराब का सेवन, इन्फेक्शन, मोटापा जैसी वजहें शामिल है, जिसे लोग नज़र अंदाज कर देते हैं.

लोगों के बीच कैंसर मृत्यु का पर्यायवाची शब्द बन गया है. वैदिकग्राम के डॉ. पियूष जुनेजा का कहना है कि, “कैंसर एक बड़ी बीमारी है परन्तु अगर कैंसर के लक्षणों को समय रहते पकड़ लिया जाये तो इलाज में काफ़ी मदद मिलती है. आयुर्वेद में गिलोइ तथा गौमूत्र को कैंसर के इलाज में प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा ताम्बे के बर्तन में रखा रात का पानी सुबह खाली पेट में सेवन करने से कैंसर के इलाज़ में काफ़ी मदद मिलती है. हर्बल तरीकों का भी प्रयोग कर हम कैंसर से बच सकते हैं, जिसमें ग्रीन टी के रोजाना सेवन से लीवर, मुंह, स्किन, गले, पेट, सर्वाइकल तथा ब्रेस्ट कैंसर को रोका जा सकता है.”

स्वामी विवेकानन्द आयुर्वेदिक पंचकर्मा हॉस्पिटल के डॉ सत्या एन. दोरनाल ने बताया कि, “हमारे शरीर में रोजाना कई सौ सेल्स खराब होते हैं और नए सेल्स बनते हैं, पर कैंसर का रोग होने पर सफ़ेद एवं लाल रक्त कोशिकाओं का संतुलन बिगड़ने लगता है और सेल्स की बढ़ोतरी नियन्त्रण से बाहर हो जाती है. कैंसर के सेल्स शरीर में मौजूद अच्छे सेल्स के काम में रुकावट डालते हैं और हमारा शरीर इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है .”

इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो शरीर के अलग अलग अंग के कैंसरों को हम उनके लक्षणों से पहचान सकते हैं.

माउथ कैंसर को ओरल कैंसर भी कहा जाता है. माउथ कैंसर में सबसे पहले मुंह में छाले होने शुरू हो जाते हैं और साथ ही मुंह के अन्दर सुजन की समस्या होने लगती है जो की आम छाला या सुजन की तरह जल्दी ठीक नहीं होता. मुंह के भीतरी हिस्से में जहाँ तहां छोटे-छोटे गांठ बनने लगते हैं और थूक घोटने में या फिर खाना-पानी निगलते समय गले में तकलीफ होने लगती है.

फेफड़े में कैंसर आमतौर पर उनमें पाया जाता है जो लोग ज्यादा धुम्रपान करते है या फिर ज्यादा से ज्यादा धूल व प्रदूषण से प्रभावित होते हैं. मरीज के फेफड़ों में जब ट्यूमर फैलने लगता है तो मरीज को ह्रदय में अक्सर दर्द की शिकायत रहती है. मरीज़ को सांस लेने में तकलीफ, घुटन महसूस होना और साथ ही खांसते समय मुंह से खून निकले तो यह लंग्स कैंसर का लक्षण होता है.

स्तन कैंसर आमतौर पर महिलाओं में पाया जाता है जो की सही समय पर ना पता चले तो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है. स्तन में दर्द व सूजन, स्तन में गांठ का हो जाना, स्तन में किसी भी तरह का परिवर्तन होना या फिर स्तन के अगले भाग से खून आना स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है.

स्किन कैंसर किसी को भी हो सकता है. ज्यादातर ये बीमारी उन लोगों को होने की संभावना होती है जो लोग धूप में ज्यादा रहते हैं. यह तीन तरह के होते है पहला बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और तीसरा मेलानोमा जिसमें स्किनपर छोटे-छोटे गांठ पर जाते है, साथ ही लाल रंग के धब्बे दिखाई देते है. स्किन का रंग बदलना, बहुत खुजली होना, स्किन पर अनावश्यक मस्से का निकलना आदि स्किन कैंसर के लक्षण होते है.

ब्लड कैंसर तीन प्रकार के होते हैं . पहला लयूकेमिया, दूसरा लिंफोमा, और तीसरा मायलोमा. इस बीमारी में अक्सर लोग एनीमिया से प्रभावित होते है और कमजोरी तथा थकान महसूस होती है. सांस लेने में तकलीफ होना और किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन होने पर जल्दी ठीक ना होना आदि ब्लड कैंसर के लक्षण होते है.

ब्रेन कैंसर के मरीज को दिमाग में ट्यूमर हो जाता हो जो की धीरे धीरे बढ़ते जाता है. परिवार में एक भी सदस्य को अगर ब्रेनट्यूमर है तो वो किसी और को भी हो सकता है. इसमें हमेशा सर में दर्द व उल्टी होने की शिकायत रहती है. बार बार चक्कर आना, धुंधला दिखना दिमाग में गांठ होना साथ ही यादास्त कमजोर होना आदि इसके लक्षण माने जाते है.

गर्भाशय कैंसर के वजह से भारत में कई महिलाओं को हर वर्ष अपनी जान गवानी पड़ती है. इस बीमारी के होने की कई वजह होती है जैसे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में किसी भी तरह का घाव हो जाने से और वो जल्दी ठीक ना हो रहा हो. ज्यादातर ये समस्या 40 से 45 उम्र के बाद ही होने की संभावना रहती है. पैरों व कमर में अक्सर दर्द रहना इसके लक्षण माने जाते हैं.

अगर हमें कैंसर से जीतना है तो हमें उसके विषय में जागरुक होना होगा ताकि न सिर्फ हम समय रहते इसके लक्षणों को समझ कर इलाज़ करवा सके बल्कि कैंसर मुक्त विश्व बनाने की ओर बढ़े.

दूदानी का काला कारनामा

2016 के अप्रैल माह में जब महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने सोलापुर में एक फार्मा कंपनी ‘एवान लाइफ साइंसेज लिमिटेड’ पर छापा मार कर तकरीबन 2 हजार करोड़ की नशीली ड्रग एफिड्रिन की 20 करोड़ की खेप बरामद की थी तो आरोपियों में गुजरे जमाने की अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के तथाकथित पति अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर विक्की गोस्वामी का नाम सामने आया था.

इस मामले में जांच के बाद जून 2016 में इस रैकेट के सरगना मनोज जैन समेत 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. तब पुलिस ने कल्पना तक नहीं की थी कि इस रैकेट के तार राजस्थान के शहर उदयपुर से भी जुड़े हो सकते हैं. ज्ञातव्य हो कि एफिड्रिन का इस्तेमाल एक्सटेसी जैसी उच्चकोटि की नशीली टैबलेट बनाने में किया जाता है. कनाडा और अमेरिका के छात्रों और खिलाडि़यों के बीच इस की मांग ज्यादा है.

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के खुफिया निदेशालय डीआरडीआई ने जब मध्य अक्तूबर में उदयपुर जिले के कलड़वास औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री के गोदाम पर छापा मार कर लगभग 7 हजार करोड़ रुपए मूल्य की तकरीबन 24 टन नशीली ड्रग्स मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन की गोलियां बरामद कीं तो राज्य की वसुंधरा सरकार के होश फाख्ता हो गए. इसे अब तक की दुनिया की सब से बड़ी बरामदगी बताया गया है.

राज्य सरकार में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया इसी शहर के रहने वाले हैं. अपने शहर में इतने बड़े रैकेट के खुलासे से वह स्तब्ध हैं.

घटना से जुड़े 2 बड़े खुलासों ने मुंबई अंडरवर्ल्ड को भी हैरानी में डाल दिया है. पहला यह कि समाजसेवी का मुखौटा ओढ़ कर सुभाष दूदानी और उस के भतीजे रवि दूदानी ने न केवल नशे का इतना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया बल्कि अंडरवर्ल्ड डौन दाऊद इब्राहीम सरपरस्ती भी हासिल कर ली. और दूसरा यह कि इस रैकेट के दूसरे सिरे की डोर 90 के दशक की खूबसूरत, बोल्ड और सैक्स सिंबल कही जाने वाली अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के कथित प्रेमी विक्की गोस्वामी ने थाम रखी थी. डीआरडीआई के दावे को सही मानें तो ममता कुलकर्णी इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट में भी शामिल है.

ममता कुलकर्णी और विक्की गोस्वामी के साथ सुभाष दूदानी की कारोबारी डोर जुड़ने की कहानी को समझने के लिए हमें नब्बे के दशक की शुरुआत में जाना होगा. उन दिनों विक्की गोस्वामी जब शराब तस्करी के धंधे में उलझा हुआ था, तभी उस की मुलाकात विपिन पांचाल नाम के शख्स से हुई. उस ने विक्की को ड्रग कारोबार की अहमियत समझाते हुए उस का परिचय मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन से करवाया. इस के बाद वह विपिन पांचाल के साथ मिल कर ड्रग्स का धंधा करने लगा.

1993 में जब पांचाल पकड़ा गया तो कारोबार की पूरी बागडोर विक्की के हाथों में आ गई. विक्की ने मुंबई में पैर जमा कर इस कारोबार को पंख लगा दिए. ड्रग्स के कारोबार के चलते उस ने पहले तो अंडरवर्ल्ड में अपनी पैठ बनाई, फिर अपने बूते पर डौन दाऊद इब्राहीम तथा छोटा राजन से करीबी रिश्ते कायम कर लिए.

हाईप्रोफाइल पार्टियों की जान समझी जाने वाली मेंड्रेक्स की सप्लाई के दम पर उस ने कई फिल्मी हस्तियों से अपने नजदीकी ताल्लुकात बना लिए. इसी दौरान विक्की की जानपहचान ममता कुलकर्णी से हुई. दोनों के बीच कुछ ऐसी पटरी बैठी कि जल्दी ही दोनों रिलेशनशिप में साथसाथ रहने लगे.

यहां द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देना जरूरी होगा, जिस में कहा गया था कि नब्बे के दशक की शुरुआत के साथ ही हाईप्रोफाइल तबके में ड्रग पार्टियां सब से चर्चित सेनेरियो बन चुकी थीं.

दिलचस्प बात यह है कि यह वह दौर था, जब ममता और विक्की गोस्वामी मुंबई की हाईप्रोफाइल पार्टियों में दूदानी द्वारा निर्मित ड्रग्स टैबलेट सप्लाई करते थे. कहा जाता है कि इस खेल को निर्विघ्न बनाए रखने में गुजरात के 4 वरिष्ठ अधिकारियों की भी पूरी शह थी.

सुभाष दूदानी ड्रग कारोबार में कैसे आया, इस की शुरुआत भी नब्बे के दशक में हुई थी. दूदानी ने अपनी कारोबारी शुरुआत फिल्म ‘विकल्प’ के निर्माण से की, लेकिन फिल्म फ्लौप हो गई. अलबत्ता फिल्म निर्माण से उस के परिचय के दायरे में नामचीन फिल्मी हस्तियां जरूर आ गईं. उन में ममता कुलकर्णी भी शामिल थी.

कहते हैं, ममता कुलकर्णी ने ही उस की मुलाकात विक्की गोस्वामी से कराई. तब तक विक्की गोस्वामी जांबिया शिफ्ट हो चुका था और कुछ रसूखदार लोगों की मदद से मेंड्रेक्स बनाने की फैक्ट्री लगाने की फिराक में था. लेकिन बात नहीं बनी.

इस बीच वह पुलिस की निगाहों में चढ़ चुका था. इसी वजह से उस ने फैक्ट्री लगाने का इरादा छोड़ दिया और साथ ही जांबिया भी. जांबिया से भाग कर उस ने दुबई में पनाह ले ली. इस बीच वह सिर्फ इतना ही कर सका कि उस ने मेंड्रेक्स बनाने की पूरी योजना सुभाष दूदानी के हवाले कर दी.

कहा तो यहां तक जाता है कि दूदानी को मेंड्रेक्स की सप्लाई चेन उपलब्ध कराना भी विक्की गोस्वामी का ही काम था. फिलहाल भले ही ममता कुलकर्णी और विक्की गोस्वामी का ठिकाना केन्या में बताया जाता है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर दूदानी के कारोबार में लगातार बरकत हुई है तो उस की वजह विक्की और ममता कुलकर्णी के साथ उस का गठजोड़ है.

जिस समय दूदानी डीआरडीआई की गिरफ्त में आया, उस दौरान वह सप्लाई को सुलभ बनाने के लिए एक नया प्रयोग कर रहा था. उस ने सोचा था कि ड्रग्स को अगर केक की शक्ल में बना कर भेजा जाए तो संदेह की गुंजाइश कम हो सकती है. लेकिन वह अपनी योजना पर अमल कर पाता, इस से पहले ही वह डीआरडीआई की गिरफ्त में आ गया. सूत्रों के मुताबिक, जब्त किया गया 24 टन माल केक के रूप में बाहर भेजने की तैयारी थी. इसे मोजांबिक और मालवाई भेजा जाना था.

ड्रग तस्करी के कारोबार के लिए दूदानी के 3 ठिकाने थे मुंबई, दुबई और उदयपुर. उदयपुर उस का स्थाई निवास होने के कारण मेंड्रेक्स के निर्माण और तस्करी के लिहाज से सर्वाधिक सुरक्षित था. सुभाष दूदानी को मेंड्रेक्स बनाने का मशविरा दुबई के तस्कर लियोन ने भी दिया था. लियोन ने इस काम में तकनीकी मदद के लिए उसे सीरिया निवासी एक डाक्टर से भी मिलवाया था. वह डाक्टर सुभाष दूदानी के मकसद में काफी मददगार साबित हुआ. लियोन ने दूदानी को मेंड्रेक्स बनाने का रासायनिक फार्मूला तो दिया ही, साथ ही 10 करोड़ की मशीनें लगाने के लिए फाइनेंसर से भी मिलवा दिया.

लियोन का मशविरा दूदानी को इसलिए भी पसंद आया था, क्योंकि उस के कहे मुताबिक मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन ड्रग्स खाड़ी देशों और यूके में सब से ज्यादा प्रचलित ड्रग हैं. लियोन का कहना था कि भले ही इस का उत्पादन खर्चीला है, लेकिन इस में मुनाफा भारीभरकम मिलता है.

पुलिस के निशाने पर आने के बाद अभिनेत्री ममता कुलकर्णी अपनी सफाई में बहुत कुछ कह चुकी है, मसलन मुझे आश्चर्य है कि मेरा नाम ड्रग तस्करी से जोड़ा जा रहा है, लेकिन दूदानी के साथ उजागर हुए नए रिश्तों ने एक बार फिर ममता और विक्की को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब जबकि सुभाष दूदानी अपने भतीजे रवि दूदानी के साथ गिरफ्त में आ गया है तो पुलिस को ममता और विक्की की भी बेसब्री से तलाश है.

जानकार सूत्रों की मानें तो सुभाष दूदानी की गिरफ्तारी के बाद इस बात का भी खुलासा हुआ है कि राजस्थान के पुष्कर में अकसर होने वाली रेव पार्टियों में मेंड्रेक्स की सप्लाई भी दूदानी द्वारा ही की जा रही थी. इस में कोई शक नहीं कि पुलिस ने रेव पार्टियों में नशेबाज पर्यटकों की धरपकड़ तो की, लेकिन नशे की सप्लाई के स्रोत को खंगालने में पूरी कोताही बरती.

दूदानी से पूछताछ में नशीली दवाओं के कारोबार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितनी लंबीचौड़ी चेन का खुलासा हुआ है, वह स्तब्ध करने वाला है. दिलचस्प बात यह है कि इन का नेटवर्क यूके, यूएस और दक्षिणी अफ्रीका समेत कई देशों में फैला हुआ है. यानी उदयपुर जैसे शांत शहर से नशे की इतनी बड़ी खेप भारत के विभिन्न इलाकों के अलावा नाइजीरिया और मंगोलिया आदि देशों तक जा रही थी.

नशे के जहरीले कारोबार की बखिया उधेड़ने में जुटी डीआरडीआई की टीम ने सुभाष दूदानी से संपर्क रखने वाले मुंबई निवासी परमेश्वर व्यास और अतुल म्हात्रे को भी दबोच लिया है. जानकार सूत्रों के मुताबिक परमेश्वर व्यास पिछले 20 सालों से सुभाष दूदानी का मित्र होने के अलावा उस का वित्तीय और रासायनिक सलाहकार बना हुआ था. म्हात्रे से की गई पूछताछ में उस ने स्वीकार किया है कि वो कैमिकल इंजीनियर होने के नाते ड्रग्स के निर्माण के लिए तकनीकी सलाह देता था.

इस खुलासे के रहस्यों का पिटारा तो बहुत बड़ा है, लेकिन फिलहाल डीआरडीआई ने उदयपुर के इर्दगिर्द वह ‘स्वर्ण गलियारा’ खोज लिया है, जिसे सुभाष दूदानी ने अभिनेत्री ममता कुलकर्णी और उस के कथित पति विक्की गोस्वामी की मदद से मेंड्रेक्स सरीखी नशीली ड्रग की तस्करी का ट्रांजिट पौइंट बना दिया था. सुभाष दूदानी द्वारा केक और टैबलेट्स की शक्ल में तैयार की गई ड्रग्स को निर्विघ्न रूप से विदेशों में अपने कारोबारी संपर्कों तक भेजा जाना था.

इस के खुलासे से जो बातें पता चली हैं, उस से जाहिर होता है कि उस का इरादा खुफिया एजेंसियों की चौकसी को अंडरएस्टीमेट कर के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने का था. इसी मुगालते में दूदानी द्वारा ड्रग्स की तस्करी को पुलिस की निगाहों से बचाने के लिए मौकड्रिल की जा रही थी.

पूछताछ में दूदानी ने बताया कि ड्रग्स बनाने की मशीनरी को समुद्री रास्ते से आयात किए जाने के दौरान ही उसे यह उपाय सूझा था. यानी एक तरफ ड्रग्स तैयार की जा रही थी तो दूसरी तरफ समुद्री रास्ते से सीमेंट और लाइम स्टोन पाउडर केक की शक्ल में बाहर भेजा जा रहा था.

यह मौकड्रिल खुफिया एजेंसियों के अफसरों को भ्रम में डालने के लिए थी ताकि जब भी वह ड्रग्स को केक की शक्ल में भेजे तो यह भ्रम ड्रग्स कारोबार को परदेदारी का अचूक हथियार बना रहे. इस योजना के तहत ही सुभाष दूदानी अडानी पोर्ट से 2 बार दिखावटी केक भेजने के बाद एक बार 5 मीट्रिक टन नशीली गोलियां भेजने में सफल भी रहा था. इस निर्विघ्न मौकड्रिल ने उस के हौसले बुलंद कर दिए थे.

इसी के चलते इस बार वह 24 टन की तैयारशुदा नशीली खेप भेजने की तैयारी में था. पूछताछ में सुभाष दूदानी ने बताया कि यह आखिरी खेप थी. इस के बाद उदयपुर की फैक्ट्री को बंद कर दिया जाता. उधर राजस्व अधिकारियों का कहना है कि ड्रग्स की यह बड़ी खेप अगर विदेशों में पहुंच जाती तो सुभाष दूदानी को लागत का चार गुना मुनाफा मिल जाता. इस के बाद संभवत: उसे कुछ करने की जरूरत नहीं रह जाती.

डीआरआई टीम ने जब फैक्ट्री पर छापा मारा, तब तक सारी मशीनें उखाड़ी जा चुकी थीं. कलपुर्जे अलगअलग कर के कबाड़ के भाव बेचे जा चुके थे. इस तोड़फोड़ का किसी को पता तक नहीं चला था. जेसीबी मशीन चला कर मशीनरी की बुनियाद तक को बराबर कर दिया गया था. सब कुछ नेस्तनाबूद करने का काम सिर्फ घोईदा फैक्ट्री में ही हो पाया था. गुडली और कलड़वास का माल भेजने के बाद वहां भी फैक्ट्रियों का भी नामोनिशान मिटा दिया जाता था, लेकिन उस से पहले ही दूदानी के काले कारनामों का परदाफाश हो गया.

दिलचस्प बात यह है कि इन फैक्ट्रियों की बुनियाद सन औप्टिकल और सीडी बनाने के नाम पर डाली गई थी. लेकिन सौ करोड़ की लागत की फैक्ट्रियों में कुछ दिन ही उत्पादन हो पाया. धंधे में आई मंदी के कारण इस काम को बंद करना पड़ा.

इस काम के लिए सुभाष दूदानी इंडियन ओवरसीज बैंक से 21 करोड़ का कर्ज ले चुका था, लेकिन भुगतान का सिलसिला कुछ समय तक ही चला. बाद में नुकसान बता कर दूदानी ने रकम चुकाने से इनकार कर दिया था. नतीजतन बैंक फैक्ट्री को सीज कर के नीलामी की तैयारी कर रहा था. लेकिन बैंक अधिकारी उस समय हैरान रह गए जब उन्हें सीज फैक्ट्री में काला कारोबार चलने की खबर मिली.

बहरहाल, सुभाष दूदानी शिकंजे में आया भी तो इसी वजह से. सीबीआई इंडियन ओवरसीज बैंक के कर्ज अदायगी के मामले में पहले ही सुभाष दूदानी के मुंबई स्थित ठिकाने पर छापा मार चुकी थी. उस ने यह काररवाई बैंक की शिकायत पर की थी.

शिकायत में कहा गया था कि दूदानी ने कर्ज में ली गई रकम निश्चित उद्देश्य पर खर्च करने के बजाय इधरउधर कर दी है. जिन कार्यों में रकम का निवेश बताया गया है, उस के कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. बैंक अधिकारियों ने माल निर्यात के बिलों और बिल्टियों को भी संदिग्ध बताया था. यह भी एक वजह रही कि सीबीआई के संदेह के घेरे में आ जाने के कारण सुभाष दूदानी बचा हुआ तैयारशुदा माल निर्यात करने में विफल रहा.

सुभाष दूदानी को विदेशों में ड्रग्स भेजने के तरीके और ठौरठिकानों का मशविरा भी दुबई का तस्कर लियोन देता था. पकड़ा गया माल मोजांबिक और मालवाई भिजवाना था. सूत्रों की मानें तो वर्ष 2004-05 के दरमियान दूदानी ने दुनिया में प्लेनेट औप्टिकल डिस्क बनाने का प्लांट लगाया था. इस प्लांट से उस ने काफी पैसा कमाया. नतीजतन उत्कर्ष के उस दौर में उसे प्रमुख उद्योगपति का सम्मान भी मिला. किंतु वर्ष 2010 में उस का धंधा चौपट हो गया.

तबाही के इस दौर में ही उस की मुलाकात लियोन से हुई थी. दूदानी को नशे के काले कारोबार में धकेलने का काम भी उसी ने किया. लियोन का उसे दिया गया व्यावसायिक मंत्र था ‘कौडि़यों के खर्च में करोड़ों का मुनाफा कमाओ’. उसी ने दूदानी का ज्ञानार्जन किया कि मेथाक्यूलिन से ड्रग्स कैसे बनाई जाती है.

 

नशीले कारोबार के लिए नेपाल और सिक्किम से मजदूर बुलाने की राय भी उसे लियोन ने ही दी. यहां तक कि उदयपुर में फैक्ट्री लगाने की सलाह भी उस ने यह कह कर दी थी कि यह शांत और सुरक्षित जगह है. साथ ही तुम्हारी जन्मभूमि भी. लोगों में तुम्हारा सम्मान है, कोई तुम पर शक नहीं करेगा.

ड्रग्स तस्करी की दुनिया के सब से बड़े मामले को ले कर कानूनी पेच में फंसे सुभाष दूदानी का हौसला चौंकता है. अदालत में पेश किए जाने के बाद कोर्ट के बाहर उस ने अपनी पत्नी से कहा कि मैं ही जल्दी बाहर आऊंगा. कोई कुछ भी साबित नहीं कर पाएगा. उस का यह भी कहना था कि मुझे किसी वकील की जरूरत नहीं है. अपना केस मैं खुद हैंडल करूंगा.

यह बात दो तरह से चौंकाती है. पहली यह कि अपराध की गंभीरता को ले कर उस में जो बेफिक्रापन नजर आता था, वह. और दूसरा यह कि जिस स्त्री से उस का तलाक हो चुका था, वह अदालत में क्यों मौजूद थी? मौजूद थी भी तो सुभाष दूदानी का उसे तसल्लीबख्श बात कहने का क्या मतलब?

 

बावजूद इस के मुंबई से उस की पैरवी करने आए एनडीपीएस मामलों के विशेषज्ञ वकील चंद्रभूषण मिश्रा का कथन भी कुछ ऐसा ही है. उन्होंने कहा, ‘अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों से कुछ भी साबित नहीं हो पाएगा. दूदानी को छलपूर्वक फंसाया गया है.’

बहरहाल, सूत्रों के मुताबिक अंडरवर्ल्ड की इन सरगोशियों को भी खारिज नहीं किया जा सकता कि जिस के पीछे डौन दाऊद इब्राहीम हो, उसे कौन फंसा सकता है.

तलाकशुदा जिंदगी

विज्ञान से स्नातक डिग्रीधारी सुभाष दूदानी की काबिलियत समझें तो उस ने एक किताब भी लिखी है. जानकार सूत्रों का कहना है कि उस की शादी ज्यादा दिन नहीं चली. हालांकि उस की पत्नी एक बैंक अधिकारी है और उस की 2 बच्चे भी हैं. लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया. दरकता दांपत्य जीवन ही उसे गलत धंधों की राह पर ले गया. बाद में उस ने उदयपुर में ही टाटा कंपनी में कार्यरत अपने भतीजे रवि दूदानी को भी अपने धंधे में उतार दिया.

सुभाष का सामाजिक रुतबा भी कम नहीं था. अनेक धार्मिक संस्थानों का ट्रस्टी होने के अलावा उस ने अपने समुदाय के लिए भी अच्छीखासी आर्थिक मदद की थी. इस मामले का खुलासा होने से कुछ दिन पहले उस ने एक शिव मंदिर के निर्माण के लिए 8 लाख रुपए की राशि दान की थी.

रवि दूदानी कलड़वास के औद्योगिक क्षेत्र में बनी फैक्ट्री का काम संभालता था. रात को जब वह फैक्ट्री की तरफ जाता था तो सिक्किमी और नेपाली मजदूर भी उस के साथ होते थे.

डीआरडीआई टीम के अधिकारियों ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया है कि आखिर पुलिस ने इस भेद को क्यों नहीं टटोला कि उदयपुर की फैक्ट्री में स्थानीय श्रमिकों के बजाए बाहरी मजदूर क्यों थे.

डीआरडीआई टीम के अधिकारियों ने इस गोरखधंधे में स्थानीय रसूखदारों का हाथ होने की पूरी आशंका जताई है. उन का कहना था कि इस काम में 10 करोड़ जैसा भारीभरकम निवेश किया गया था. दुबई से करोड़ों की मशीनें आई थीं. स्थानीय मैकेनिक बायलर सरीखे उपकरण भी तैयार कर रहे थे. यहां तक कि दुबई से एंथ्रालिक सरीखा संदिग्ध एसिड भी आ चुका था. इस के बावजूद किसी को जरा भी संदेह क्यों नहीं हुआ.

एंथ्रालिक एसिड मंगवाने के लिए सुभाष दूदानी ने गुजरात के नडियाड में माल रखने के लिए एक शेड किराए पर लिया था, जहां से उसे टाइल एडिसिव की आड़ में नशीली दवाओं का जखीरा निर्यात करना था. जानकार सूत्रों के मुताबिक दूदानी कुल 8 हिस्सों में तैयारशुदा माल को बाहर भेजना चाहता था. इस लिहाज से प्रति खेप ढाई टन माल बाहर भेजा जाना था. इस के लिए नए जहाज का बंदोबस्त भी कर लिया गया था. माल किसे भेजना है, इस के लिए रेडिमिक्स एडीसन टेक्नोलौजी नाम की फरजी फर्म भी बना ली गई थी. 

उधड़ रही हैं परतें

नशीली गोलियों के इस नेटवर्क से अंतरराष्ट्रीय तस्करों के साथ मुंबई के नामचीन व्यापारी भी जुड़े रहे हैं. उदयपुर में बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद से जांच में जुटी डीआरडीआई ने सुभाष दूदानी से संपर्क रखने वाले परमेश्वर व्यास और अतुल म्हात्रे को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है. परमेश्वर व्यास दूदानी का वित्तीय सलाहकार भी था और उसे कच्चा माल भी सप्लाई करता था. फिलहाल डीआरडीआई टीम म्हात्रे की पूरी जन्मकुंडली खंगाल रही है कि इस काम में उस ने किसकिस से मदद ली.

इस मामले में ताजा गिरफ्तारी मलकानी की है. जयपुर स्थित प्रतापनगर से गिरफ्तार किए गए मलकानी की सुभाष दूदानी के कारोबार में 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी. कारोबार के मुख्य शेयरधारक के रूप में दुबई निवासी धनकानी के नाम का भी खुलासा हुआ है.

मलकानी सुभाष दूदानी का दोस्त भी है. मलकानी दूदानी के बंद हुए सीडी प्रोजेक्ट से भी जुड़ा रहा था.

इस काले कारोबार का खुलासा होने के बाद से सब से ज्यादा सवाल इस बात को ले कर उठ रहे हैं कि यह गोरखधंधा उदयपुर में पिछले 7 सालों से चल रहा था, लेकिन इंडस्ट्री के लिए जिम्मेदार रीको, जिला उद्योग केंद्र, सेल्स टैक्स, ड्रग कंट्रोलर, फैक्ट्री ऐंड बायलर तथा प्रदूषण नियंत्रण महकमे को भनक क्यों नहीं लगी?

हालांकि रीको के प्रभारी अफसर एम.के. शर्मा यह कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं कि किसी उद्योग पर नजर रखना या काररवाई करने का अधिकार हमें नहीं है. ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि जब इस फैक्ट्री ने कोई लाइसेंस ही नहीं लिया तो जांच किस बात की करते.

अलबत्ता भारी मात्रा में मेंड्रेक्स और मेथाक्यूलिन का जखीरा हाथ लगने के बाद विश्व पटल पर बदनाम हुए उदयपुर के औषधि नियंत्रण विभाग की हकीकत समझें तो विभागीय नुमाइंदे ऐसे पदार्थ की प्रकृति और बिक्री से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं. इस पूरे मामले में गुजरात के 4 शीर्ष अधिकारियों के नामों का भी खुलासा हुआ है.

ड्रग्स बनाने का काम काफी जटिल और उबाऊ था. लेकिन सूत्र कहते हैं कि सुभाष दूदानी ने इस में भी कसर नहीं छोड़ी. मेथाक्यूलिन से मेंड्रेक्स बनाने के लिए उसे धोने और सुखाने तक का काम उस ने खुद किया.

इस के लिए उस ने फ्लूइड बेड ड्रायर काम में लिया. दूदानी इस सूखे मेथाक्यूलिन पाउडर को स्टार्च और मैग्नीशियम स्टीरेट व डाईकैल्शियम फास्फेट मिला कर मशीनों से प्रैस कर के इसे गोलियों की शक्ल देता था. फिर उन पर मुसकराहट का चिह्न भी लगाता था.               

दिलजली प्रेमिका

दुलहन के लिबास में बैठी अंजना के लिए वे पल बेहद खूबसूरत थे. जिंदगी के खूबसूरत पलों में वैसे भी चेहरे की चमक और खुशियां बढ़ जाती हैं. जबकि अंजना तो खूब सजीधजी थी, इसलिए जो भी उसे देखता, देखता ही रह जाता. ऊपर से उस ने जो पारंपरिक कुमाऊंनी चुनरी ओढ़ रखी थी, वह उस की सुंदरता में चार चांद लगा रही थी. थोड़ी ही देर में उस के सपनों का राजकुमार दूल्हा आने वाला था और वह जयमाला पहना कर उसे अपना जीवनसाथी चुनने वाली थी.

अंजना मूलरूप से अल्मोड़ा जनपद के रहने वाले सूबेदार शंकर सिंह बोहरा की बेटी थी. बोहरा उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के छावनी इलाके में रह रहे थे. चंद महीने पहले ही उन्होंने बीटेक की पढ़ाई कर चुकी अंजना का रिश्ता चनेहटी निवासी सेना से सेवानिवृत्त मदन सिंह के बेटे राहुल से तय किया था. राहुल कुमाऊं रेजीमेंट में सिपाही था.

25 नवंबर, 2016 की रात छावनी इलाके में ही बरेली कैंट बोर्ड द्वारा संचालित युगवीणा समारोह स्थल पर अंजना और राहुल का विवाह होने वाला था. बोहरा परिवार अपने रिश्तेदारों के साथ बारात के स्वागत की तैयारियों में लगा था. बारात आ चुकी थी.

मंडप परिसर के ही एक कमरे में कुरसी पर बैठी अंजना अपनी सतरंगी कल्पनाओं से भविष्य का खूबसूरत महल तैयार कर रही थी. खुशियों की महक हर तरफ फैली थी. कोई नहीं जानता था कि वहां क्या होने वाला है? किस की जिंदगी में दुख कब चुपके से दस्तक दे जाए, इस बात को कौन जानता है?

मंडप में मेहमानों की आवाजाही जारी थी. लगभग 10 बजे के करीब मेहमानों की भीड़ के बीच से होते हुए 2 लड़कियां दुलहन बनी अंजना के कमरे में आ पहुंची. अंजना उस समय कमरे में अकेली थी, क्योंकि सभी लोग बारात के स्वागत में लगे थे. अंजना पर नजर पड़ते ही दोनों लड़कियां मुसकराईं. उन लड़कियों की उम्र 20-22 साल रही होगी और उन्होंने आकर्षक सलवार सूट पहन रखे थे.

अंजना की नजर उन से मिली तो वह असमंजस में पड़ गईं, क्योंकि उस ने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था. उसे लगा कि ये दोनों उस की दूर की रिश्तेदार होंगी या फिर दूल्हा पक्ष की होंगी और उस से मिलने आई होंगी. दोनों लड़कियां अंजना को देख कर मुसकराईं तो अंजना ने भी मुसकरा दिया. उन में से एक ने पूछा, ‘‘हैलो अंजना, कैसी हो?’’

‘‘अच्छी हूं, आप बताइए?’’

‘‘आज तो तुम बहुत खुश होगी और दुलहन बन कर तुम्हें बहुत अच्छा लग रहा होगा?’’

‘‘क्यों नहीं.’’ अंजना ने मुसकरा कर कहा.

लेकिन अगले ही पल उस लड़की का लहजा एकदम से बदल गया. वह गुस्से में उसे घूरते हुए बोली, ‘‘तुम्हें कितना भी अच्छा लग रहा हो, लेकिन यह सब मुझे बिलकुल नहीं अच्छा लग रहा.’’

पलभर में बदले उस के हावभाव और बातों से अंजना को झटका सा लगा. वह कुछ समझ पाती, उस से पहले ही दोनों लड़कियों ने एकदूसरे की तरफ देख कर इशारा किया तो उन में से एक ने झपट कर अंजना के हाथ पकड़ लिए तो उस की साथी लड़की ने एक बोतल निकाली और उस का ढक्कन खोल कर उस में भरा तरल अंजना पर उछाल दिया.

बचाव के लिए अंजना ने अपना चेहरा घुमा लिया. अपना काम कर के दोनों लड़कियां तेजी से कमरे के बाहर निकल गईं. जबकि तरल पड़ते ही अंजना जलन से चीखने लगी.

उस की चुनरी भी जल गई थी, क्योंकि उस पर उछाला गया तरल तेजाब था. जलन से अंजना बिलबिला उठी. वह दरवाजे की तरफ भागी, लेकिन लड़कियों ने बाहर जाते वक्त दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था.

अंजना ने खुद को संभाल कर पिता के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन शोरशराबे में पिता को घंटी सुनाई नहीं दी. संयोग से उस की चीखें मेहमानों ने सुन ली थीं, इसलिए उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया. थोड़ी देर में सभी वहां पहुंच गए. अंजना की हालत देख कर सभी के पैरों तले से जमीन खिसक गई.

खुशी के मौके पर अगर इस तरह का दुख आ जाए तो तकलीफ कई गुना बढ़ जाती है. बोहरा परिवार भी परेशान हो उठा. आननफानन में दर्द से बेहाल अंजना को गाड़ी में डाल कर अस्पताल पहुंचाया गया. डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे एसआरएमएस मैडिकल कालेज के लिए रैफर कर दिया.

विवाह समारोह में शामिल होने आए रिश्तेदारों और परिचित भी परेशान हो उठे थे. लोग तरहतरह की चर्चाएं कर रहे थे. अचानक घटी इस घटना से हर कोई परेशान था. तेजाब डालने वाली लड़कियों की तलाश की गई, लेकिन वे अपना काम कर के जा चुकी थीं.

घटना की सूचना पुलिस को दी गई. दुलहन पर तेजाब फेंकना पुलिस के लिए भी चौंकाने वाली बात थी. स्थानीय थाना कैंट के थानाप्रभारी ब्रजेश सिंह मौके पर पहुंचे. मामला गंभीर था, इसलिए उन्होंने घटना की सूचना अधिकारियों को भी दे दी थी. उन की सूचना पर एसएसपी जोगेंद्र कुमार, एसपी (सिटी) समीर सौरभ और सीओ (सिटी) सिद्धार्थ वर्मा भी आ गए थे.

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. दुलहन के जो कपड़े पड़े थे, वे आधे जले हुए थे. वहीं प्लास्टिक की एक बोतल पड़ी थी. उसी में तेजाब लाया गया था. तेजाब के छींटे इधरउधर बिखरे पड़े थे.

तेजाब के नमूने और अन्य सामान को बतौर सबूत पुलिस ने कब्जे में ले लिया था. फोरैंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी बुला कर सबूत जुटाए गए. पुलिस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर दुलहन से किसी की क्या रंजिश हो सकती थी. पुलिस अधिकारी घटनास्थल की जांच कर रहे थे, तभी उन की नजर वहां पड़े कागज के एक टुकड़े पर पड़ी.

कागज के उस टुकड़े को उठा कर देखा तो उस पर चंद लाइनें लिखी थीं, जिसे पढ़ कर पुलिस चौंकी. उसे तेजाब फेंकने वाली लड़कियों ने छोड़ा था. उस पर लिखा था, ‘प्यार मुझ से और शादी किसी और से. सब कुछ भूल गई. तू मेरी नहीं तो किसी दूसरे की भी नहीं हो सकती.’

पहली नजर में मामला प्रेमप्रसंग का नजर आ रहा था. पुलिस को लगा कि अंजना के किसी दिलजले प्रेमी ने इस वारदात को अंजाम दिया है. अब सवाल यह था कि अगर साजिश प्रेमी की थी तो उस ने लड़कियों का इस्तेमाल क्यों किया और वे इस के लिए तैयार क्यों हुईं?

पुलिस ने अंजना के पिता और अन्य लोगों से भी पूछताछ की. लेकिन कोई भी लड़कियों के बारे में कुछ नहीं बता सका. पिता ने किसी भी प्रकार की रंजिश होने से इनकार किया था. उन्होंने बेटी के किसी से प्रेमसंबंध की बात से भी इनकार किया था.

पुलिस अस्पताल पहुंची. अंजना के चेहरे, आंख और शरीर के दाहिने कंधे पर तेजाब के छींटे पड़े थे, जहां छाले उभर आए थे. लेकिन उस की हालत खतरे से बाहर थी. पुलिस ने उसे सांत्वना दे कर पूछा, ‘‘क्या तुम उन लड़कियों को जानती हो?’’

‘‘नहीं सर, मैं ने उन्हें पहली बार देखा था.’’ अंजना ने बताया.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है, कभी तुम्हें किसी ने धमकी तो नहीं दी थी?’’ पुलिस ने पूछा.

‘‘नहीं सर, मैं खुद नहीं जानती कि मेरे साथ उन्होंने ऐसा क्यों किया?’’

अंजना से पूछताछ के बाद भी पुलिस को जांच की कोई दिशा नहीं मिल सकी थी. लेकिन इतना जरूर समझ में आ गया कि हमले का मकसद विवाह को किसी भी तरह रुकवाना था. पुलिस ने सीसीटीवी रिकौर्डिंग से लड़कियों तक पहुंचने की सोची, लेकिन यह जान कर हैरानी हुई कि वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे.

पुलिस ने अंजना के पिता की तहरीर पर अज्ञात लड़कियों के खिलाफ अपराध संख्या 529/2016 पर धारा 326ए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था. बोहरा परिवार को चिंता इस बात की थी कि कहीं बेटी का रिश्ता न टूट जाए. लेकिन राहुल ने कह दिया था कि वह हर सूरत में अंजना को अपनाने को तैयार है.

दूसरी ओर अंजना को लगा कि उस के सपने चकनाचूर हो गए हैं. ऐसी घटनाएं वैसे भी इंसान को तोड़ कर रख देती हैं, लेकिन उस ने हालात का डट कर मुकाबला करने का फैसला किया. उस ने डाक्टरों से अपने मन की बात बताई, विवाह में हुए खर्च का वास्ता दिया तो डाक्टरों ने मरहमपट्टी कर के दवा दे कर उसे शादी की इजाजत दे दी.

रात करीब ढाई बजे अंजना को मंडप में लाया गया. किसी तरह दर्द को बरदाश्त कर अंजना ने विवाह की रस्मों को पूरा किया और सुबह फिर से अस्पताल जा पहुंची. दोपहर बाद वह ससुराल के लिए विदा हो गई. पुलिस ने दूल्हे राहुल से भी पूछताछ की थी, लेकिन उस ने भी किसी से अपनी रंजिश होने से इनकार किया था.

इस के बावजूद कोई तो था, जिसे इस शादी से सख्त ऐतराज था. एसिड अटैक सुनियोजित तरीके से किया गया था और एसिड अटैक करने वालों के तार किसी न किसी रूप में दुलहन या दूल्हे से जुड़े थे.

एसपी (सिटी) समीर सौरभ के निर्देशन में घटना के खुलासे के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस में थानाप्रभारी के अलावा सर्विलांस टीम के प्रभारी गितेश कपिल, महिला थानाप्रभारी सिमरजीत कौर, एसएसआई अमर सिंह, रिसाला चौकीइंचार्ज अरविंद चौहान, हैडकांस्टेबल राजबाला यादव, कांस्टेबल गिरजेश पोसवाल, भागेश्वर, अनुज कुमार और अरशद अहमद को शामिल किया गया.

अगले दिन पुलिस ने समारोह की वीडियो रिकौर्डिंग हासिल कर के जांच शुरू की. उस में 2 लड़कियां नजर आईं, लेकिन जब भी कैमरा उन की ओर होता, वे अपना चेहरा नीचे कर लेती थीं या दुपट्टे से छिपा लेती थीं. इस से साफ हो गया था कि लड़कियां वही थीं, लेकिन उन की पहचान नहीं हो सकी थी. इस तरह उन तक पहुंचना पुलिस के लिए संभव नहीं था.

पुलिस ने अंजना और राहुल के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स निकलवाई. अंजना के नंबर की काल डिटेल्स से तो कुछ ऐसा नहीं मिला कि जांच आगे बढ़ती. लेकिन राहुल की काल डिटेल्स में एक नंबर ऐसा मिला, जिस पर उस की खूब बातें हुई थीं. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर साल्वेशन आर्मी गर्ल्स हौस्टल में रहने वाली अनामिका टमटा का निकला.

पुलिस के शक के सुई उसी पर जा कर ठहर गई. पुलिस ने उस नंबर की घटना वाली रात की लोकेशन हासिल की तो उस की लोकेशन विवाह मंडप के नजदीकी टावर की पाई गई. इस के बाद उस की लोकेशन दिल्ली और फिर कैंट एरिया की पाई गई.

पुलिस ने मोबाइल कंपनी में जमा आईडी से फोटो हासिल कर के अंजना को दिखाया तो उस ने बताया कि उस पर तेजाब डालने वाली यही लड़की थी.

आखिर 29 नवंबर, 2016 को पुलिस अनामिका तक पहुंच गई. पता चला कि उसी ने इस वारदात को अपनी सगी बहन शिवांगी के साथ मिल कर अंजाम दिया था. पुलिस ने दोनों बहनों को हिरासत में ले लिया.

थाने ला कर पूछताछ की गई तो पता चला कि अनामिका राहुल से प्यार करती थी और उस से शादी करना चाहती थी. इसीलिए वह हर हाल में इस शादी को रुकवाना चाहती थी, जिस के लिए उस ने दुलहन पर तेजाब डालने की खतरनाक योजना बनाई थी. पुलिस पूछताछ में एक दिलजली प्रेमिका की जो कहानी निकल कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

मूलरूप से उत्तराखंड के रहने वाले वीरेंद्र टमटा की बेटी थी अनामिका. वह बरेली में रह कर पढ़ाई कर रही थी, जबकि उस की छोटी बहन शिवांगी एक अस्पताल में नर्स का प्रशिक्षण हासिल कर रही थी. दोनों बहनें गर्ल्स हौस्टल में रहती थीं. पुलिस को बताए अनुसार, अनामिका और राहुल एकदूसरे को 4 सालों से जानते थे. उन के बीच पहले दोस्ती हुई, उस के बाद उन में प्यार हो गया. उन का प्यार समय के साथ गहराता गया और उन्होंने साथसाथ जीनेमरने की कसमें खा लीं.

आगे चल कर अनामिका तो अपने वादे पर कायम रही, लेकिन समय के साथ राहुल का विचार बदल गया. उस की शादी अंजना से तय हो गई. जब इस की जानकारी अनामिका को हुई तो राहुल की इस बेवफाई पर वह काफी नाराज हुई. उस ने न सिर्फ राहुल को खूब खरीखोटी सुनाई, बल्कि उसे खूब समझाया भी.

लेकिन राहुल अपने इरादे पर कायम रहा. उस ने साफ कह दिया कि वह विवाह अंजना से ही करेगा. अनामिका राहुल से दिल से प्यार करती थी. उस ने भले ही उस से बेवफाई की थी, लेकिन वह उसे खोना नहीं चाहती थी. राहुल को जीवनसाथी बनाने की उस की दिली ख्वाहिश थी.

यह बात अलग थी कि राहुल ने उस से दूरी बना ली थी. लेकिन अनामिका ने तय कर लिया था कि वह हर हाल में राहुल को जीवनसाथी बना कर रहेगी. चाहे इस के लिए उसे कुछ भी करना पड़े. वह राहुल को उस की बेवफाई का सबक सिखाना चाहती थी, लेकिन उस के प्यार ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.

उसे पता था कि राहुल जल्द ही विवाह कर लेगा. लेकिन विवाह की तारीख उसे पता नहीं थी. वह शातिरदिमाग लड़की थी, उस ने सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए राहुल के भाई कंचन को अपना दोस्त बनाया और उसी से राहुल के विवाह की तारीख पता कर ली.

जैसेजैसे विवाह की तारीख नजदीक आ रही थी, अनामिका के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं. उसे राहुल से ज्यादा नफरत अंजना से थी. उस की रातों की नींद उड़ी हुई थी. उस ने सोचा कि उसे कुछ ऐसा करना चाहिए कि राहुल अंजना से दूर हो जाए और रिश्ता टूट जाए. वह मैसेज कर के राहुल को मनाने की कोशिश भी करती रही.

जब उसे लगा कि यह विवाह हो कर ही रहेगा तो उस ने अंजना पर तेजाब डालने की खतरनाक योजना बना डाली. अनामिका ने सोचा था कि तेजाब से अंजना का चेहरा बिगड़ जाएगा तो राहुल खुद ही उस से विवाह करने से मना कर देगा. इल्जाम उस पर न आए और राहुल अंजना को चरित्रहीन समझे, इस की भी उस ने योजना कागज पर चंद लाइनें लिख कर तैयार कर ली थी.

उस ने सोचा था कि घटना के बाद उस कागज को वह वहीं छोड़ देगी, ताकि पुलिस भटक जाए. उसे लगे कि घटना को अंजना के किसी प्रेमी ने अंजाम दिया है. नफरत की आग में सुलगती अनामिका ने अपनी योजना में शिवांगी को भी शामिल कर लिया था. योजना के तहत अनामिका ने टौयलेट साफ करने वाले एक बोतल तेजाब का इंतजाम किया और विवाह वाली रात दोनों बहनें अच्छे कपड़े पहन कर समारोह स्थल पर पहुंच गईं.

कैमरे से मुंह छिपाते हुए दोनों बहनें दुलहन के कमरे तक पहुंचीं तो उस समय वहां कई महिलाएं॒मौजूद थीं. वे मौके का इंतजार करने लगीं. जब बारात आने को हुई तो सभी बारात के स्वागत के लिए बाहर चले गए और अंजना कमरे में अकेली रह गई. मौका मिलते ही दोनों ने घटना को अंजाम दे दिया और भाग निकलीं. अगले दिन दोनों बहनें दिल्ली के पीतमपुरा में एक रिश्तेदारी में चली गईं और 2 दिनों बाद वापस आईं.

अनामिका को उम्मीद थी कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी और राहुल हमेशा के लिए उस का हो जाएगा. लेकिन पुलिस की चौखट पर पहुंचते ही अनामिका के सारे सपने टूट गए. प्यारमोहब्बत में ऐसी स्थितियां आती रहती हैं. अनामिका ने राहुल को अपनी जिंदगी मान लिया था और जबरन उसे हासिल करने की जिद कर बैठी, जिस की वजह से आज उस के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं.

अगर उस ने विवेक से काम लिया होता और उस की बहन शिवांगी ने भी गलत काम में साथ देने के बजाए उसे समझाया होता तो शायद आज यह नौबत न आती.

पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों आरोपी बहनों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट मयूर जैन की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अंजना का इलाज चल रहा है. समय के साथ उस के जख्म भर जाएंगे, लेकिन एक बात उसे सताती रहेगी कि आखिर उसे किस गुनाह की सजा मिली. राहुल का कहना था कि अनामिका से सिर्फ उस की दोस्ती थी, प्यार जैसा उस में कुछ भी नहीं था.  

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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