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टौप 9 समर फेस पैक

गरमी के मौसम में त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है. तेज धूप के संपर्क में आने से स्किन डैमेज, सन टैन, डार्क स्पौट्स और पिगमैंटेशन होने के साथसाथ प्री मैच्योर एजिंग साइन्स जैसे रिंकल्स, फाइन लाइंस चेहरे पर उभर आने का डर भी बढ़ जाता है. ऐसे में बहुत जरूरी है कि त्वचा को हाइड्रेट करें ताकि उस में नमी की कमी न हो और वह अंदर से स्वस्थ व बाहर से खूबसूरत नजर आए. समर सीजन में स्किन को हैल्दी डोज देने के लिए ये फेस पैक जरूर ट्राई करें:

खीरा फेस पैक

अगर फेस पैक के साथ ही स्क्रबिंग से चेहरे की डैड स्किन को भी हटाना चाहती हैं, तो चेहरे पर खीरे का फेस पैक लगाएं. खीरे के कुछ टुकड़ों को मिक्सर में दरदरा पीस लें. फिर उस में थोड़ी सी शक्कर मिला कर कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें. अब पूरे चेहरे पर लगाएं और सूख जाने पर रगड़ते हुए छुड़ाएं. इस से डैड स्किन की परत हट जाएगी.

दही फेस पैक

तपती धूप में त्वचा को ठंडक का एहसास दिलाने के लिए चेहरे पर दही का फेस पैक लगाएं. इस के लिए 1 बड़े चम्मच दही में 1 छोटा चम्मच चंदन पाउडर मिलाएं और तैयार फेस पैक को चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं. 10 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें. इस से आप काफी फ्रैश फील करेंगी.

चंदन फेस पैक

चंदन की ठंडक गरमी में आप की त्वचा को काफी राहत दिला सकती है. इस के लिए आप को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. बस एक बाउल में 1 बड़ा चम्मच चंदन पाउडर थोड़ा सा गुलाबजल मिला कर लेप बना लें. तैयार लेप चेहरे और गले पर लगाएं. सूख जाने पर ठंडे पानी से धो लें.

पुदीना फेस पैक

जिस तरह छाछ, शरबत और जूस में मिले पुदीने से पेट की गरमी छूमंतर हो जाती है ठीक उसी तरह पुदीना फेस पैक धूप से तपती त्वचा को भी राहत दिलाता है. इस के लिए 1 बड़ा चम्मच पुदीनापत्ती को पीस कर उस में 2 छोटे चम्मच गुलाबजल मिलाएं और फिर चेहरे पर लगाएं. सूख जाने पर ठंडे पानी से धो लें. गोरे निखार के लिए इस में चुटकी भर हलदी पाउडर भी मिला सकती हैं.

मैंगो फेस पैक

आम को छील कर उस के पल्प का मिक्सर पेस्ट बना लें. अब इस में 1 छोटा चम्मच चंदन पाउडर, 1 छोटा चम्मच दही, 1/2 छोटा चम्मच शहद और चुटकी भर हलदी मिला कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएं. यह सूख जाए तो चेहरा ठंडे पानी से धो लें.

वाटरमैलन फेस पैक

गरमी के मौसम में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए जिस तरह वाटरमैलन यानी तरबूज खाना फायदेमंद है, उसी तरह त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए वाटरमैलन फेस पैक भी काफी असरदार है. फेस पैक बनाने के लिए वाटरमैलन के जूस में थोड़ा सा दही डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. तैयार लेप को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें.

टोमैटो फेस पैक

अगर ज्यादा देर धूप में रहने से स्किन टैन हो गई है, तो टोमैटो फेस पैक लगाएं. इस के लिए 1 बड़े टमाटर के पल्प में 2 छोटे चम्मच शहद मिलाएं और फिर प्रभावित त्वचा पर लगाएं. 10-15 मिनट बाद जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से धो लें. इस से सन टैन से राहत मिलेगी और शहद की वजह से त्वचा में चमक भी आएगी.

कद्दू फेस पैक

कद्दू को कद्दूकस कर के इस में थोड़ा सा दही मिलाएं और पूरे चेहरे पर लगाएं. जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से धो लें. सन टैन को दूर करने के साथसाथ यह फेस पैक फाइन लाइंस, रिंकल्स को भी कम करता है. इस से ब्लैकआउट्स भी कमहोते हैं और त्वचा मुलायम होती है.

नीबू फेस पैक

1 बड़े चम्मच नीबू के रस में थोड़ा सा शहद मिला कर कौटन बौल की सहायता से चेहरे और गले पर लगाएं. 20 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा व गला धो लें. इस से त्वचा में कसाव महसूस होगा और चेहरा ग्लो करेगा. सन टैन से नजात के लिए उस पर नीबू का छिलका भी रगड़ सकती हैं.

कहीं धूप न चुरा ले बालों का रूप

इन दिनों कलर्ड बाल बहुत ज्यादा ट्रैंड में हैं. कुछ महिलाएं अपने बालों को पूरी तरह कलर करना पसंद करती हैं, तो वहीं कुछ ऐसी भी हैं, जो सिर्फ बोल्ड कलर्स से हाईलाइट करना पसंद करती हैं.

कलर्ड हेयर हमारे लुक को पूरी तरह चेंज कर देते हैं और खुशी की बात यह है कि आजकल महिलाएं इस बारे में काफी जागरूक भी हो गई हैं कि उन का हेयर प्रोडक्ट अमोनिया फ्री हो ताकि उन के बालों को नुकसान न हो. लेकिन क्या आप जानती हैं कि बस इतना ही काफी नहीं है, क्योंकि धूप आप के कलर्ड बालों पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है. आइए, जानते हैं विस्तार से:

खतरनाक है धूप का असर

जब हम धूप में निकलते हैं तो सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावौयलेट किरणों का न सिर्फ हमारी त्वचा पर कुप्रभाव पड़ता है, वरन वे बालों की खूबसूरती पर भी ग्रहण लगा देती हैं. इतना ही नहीं, अगर बालों को कलर करा रखा हो, तब तो ये बालों के लिए और अधिक हानिकारक साबित होती हैं.

वैसे तो सूर्य की अल्ट्रावौयलेट किरणों के हानिकारक प्रभाव से हम सभी वाकिफ हैं, लेकिन बालों पर रंग अच्छा आए, इस के लिए उन पर कलर करने से पहले ब्लीच का प्रयोग जरूर किया जाता है, जिस के कारण जब भी बाल अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आते हैं तो वे बहुत ही जल्दी रूखे व बेजान हो जाते हैं और उन की खूबसूरती खो जाती है.

कैसे करें बचाव

हौट औयल ट्रीटमैंट: समयसमय पर कलर्ड बालों पर हौट औयल ट्रीटमैंट करती रहें, क्योंकि कलर्ड बालों को नौर्मल बालों की तुलना में अधिक मौइश्चराइजर की जरूरत पड़ती है. यह धूप में बालों को डैमेज होने से रोकता है.

अलकोहल फ्री प्रोडक्ट: आजकल बहुत सारे ऐसे प्रोडक्ट मार्केट में आ गए हैं, जो कलर्ड बालों को धूप के हानिकारक प्रभाव से बचाते हैं. आप अपने बालों के टाइप के अनुसार उन का चुनाव कर सकती हैं. लेकिन उन्हें खरीदते समय इस बात का खास खयाल रखें कि वे अमोनिया और अलकोहल फ्री हों वरना बालों को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.

स्कार्फ का प्रयोग: धूप में निकलने से पहले अपने बालों को हैट या स्कार्फ से कवर कर लें. इस से आप के बाल धूप के संपर्क में आने से बचेंगे और उन के क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी कम हो जाएगी.

सही प्रोडक्ट का चुनाव: हमेशा बालों पर ऐसे प्रोडक्ट्स का प्रयोग करें जिन्हें खासतौर पर कलर्ड बालों के लिए बनाया गया हो, क्योंकि इन प्रोडक्ट्स का निर्माण इस तरह से किया जाता है कि वे आप के कलर्ड बालों को न सिर्फ धूप के प्रभाव से बचाते हैं, बल्कि और भी कई प्रकार की समस्याओं से दूर रखते हैं.

खुले न हों बाल: जब भी धूप में जाएं तो बालों को खुले रखने के बजाय पोनीटेल या बन बना लें. इस से बालों के डैमेज होने की संभावना कम हो जाती है, क्योंकि सारे बाल एकसाथ धूप के संपर्क में नहीं आते.

स्विमिंग के दौरान रखें ध्यान: जब भी स्विमिंग के लिए जाएं तो हमेशा किसी अच्छे हेयर प्रोटैक्शन सीरम का प्रयोग जरूर करें, क्योंकि जब भी सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावौयलेट किरणें पानी पर पड़ती हैं तो उन का हानिकारक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है.

स्टाइलिंग न पड़ जाए महंगी: कभी हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट का प्रयोग कर के धूप में न जाएं, क्योंकि यह बालों को बुरी तरह डैमेज कर देता है.

– डा. विवेक मेहता, पुलत्स्या कैडल स्किन केयर सैंटर के डर्मैटोलौजिस्ट

लवोलोजी यानि प्यार और रोमांस की क्लास

एक और जहां  दुनिया को  कामसूत्र  देने वाले भारत देश में वर्तमान में प्यार करने वालों पर पाबंदी लगाने के प्रयास शुरू हो गए हैं वहीं न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में प्यार की क्लास लगाई जा रही है और यह क्लास एक अंडरग्रेजुएट कोर्स के अंतर्गत होती है. डॉक्टर मेगन पाई प्यार की इस क्लास का संचालन करती हैं. डॉक्टर मेगन ने ही प्यार के इस इस कोर्स को तैयार किया है. आपको जानकार हैरानी होगी कि जबसे कोर्स की शुरुआत हुई है तब से ही कोर्स बेहद ही लोकप्रिय रहा है और  सिर्फ पिछले दो सालों में ही कोर्स में छात्रों की संख्या तीन गुनी हो गई है.

प्यार की इस क्लास का नाम "लव एक्चुअली" दिया गया है  जिसमें पहला सेमेस्टर मुख्य रूप से लोगों के प्यार के साथ कैसे अनुभव रहे हैं इसके आधार पर होता है. कोर्स दो डायरेक्शन में आगे बढ़ता है एक हॉरिजॉन्टल और दूसरा वर्टीकल. हॉरिजॉन्टल ट्रेजेक्ट्री में जहां कोर्स आपकी पूरी लाइफ के दौरान होने वाले अलग-अलग तरह के प्यार के रिश्तों पर बात करता है वहीं वर्टीकल ट्रेजेक्ट्री स्टूडेंट से शुरू हो कर फैमिली लव के बारे में बात करता है. कोर्स न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के चाइल्ड ऐंड ऐडॉलोसंट मेंटल हेल्थ स्टडी डिपार्टमेंट के तहत चलाया जाता है. इस डिपार्टमेंट के तहत इस तरह के और भी कई कोर्स चलाए जाते हैं जिनमें हैप्पीनेस और स्लीप से जुड़े कोर्स भी चलाए जाते हैं. 

प्यार के अलग-अलग प्रकारों के बारे में  मेगन का कहना है कि  इस कोर्स के अंतर्गत हम माता-पिता और नवजात के प्यार, दोस्ती, खुद से प्यार, अपने पैशन के प्रति प्यार, मेंटर और स्टूडेंट के बीच प्यार के बारे में बात करते हैं. प्यार की इस क्लास का एक बड़ा हिस्सा स्टूडेंट्स को विस्तार से बताता  है कि आखिर लव यानी प्यार का आइडिया क्या है और इस कॉन्सेप्ट के अंदर क्या छिपा है. यहां रोमांटिक लव को भी समय दिया जाता है.

प्यार और रोमांस की एक ऐसी ही अन्य क्लास  चीन की तियानजिन यूनिवर्सिटी में भी लगती है और जहां बाकायदा थ्योरी के साथ रोमांस की प्रैक्टिकल टेक्नीक्स भी बताई जाती हैं. थ्योरी इन लव एंड डेटिंग नाम से चलने वाले इस कोर्स का मकसद स्टूडेंट्स को रिलेशनशिप में स्ट्रांग करना है. इस यूनिवर्सिटी में विषय कोई और नहीं सिर्फ और सिर्फ प्यार और रोमांस का होता है. यहां लड़कों को पर्सनैलिटी अपग्रेड, लड़कियों से बात करने का तरीका, रोमांस करने और क्लास में  स्टूडेंट्स को अपोजिट रोमांस को अपनी तरफ आकर्षित करने और अपोजिट सेक्स के साथ कम्युनिकेशन बिल्ड करने  के तरीके भी  बताए जाते है.

प्यार और रोमांस की इस क्लास में ये भी सिखाया जाता है कि प्रपोजल ठुकराए जाने पर भी किस तरह का व्यवहार किया जाए. साथ ही रोमांटिक रिलेशनशिप से जुड़ी कुछ लीगल प्रॉब्लम के बारे में जानकारी दी जाती है. प्यार और रोमांस के इस कोर्स में इंसान को दूसरों से प्यार करने से पहले खुद से प्यार करना  भी सिखाया जाता है. हिंसा और नफ़रत के इस दौर में प्यार पर आधारित इस क्लास की दरअसल पूरे विश्व को ज़रूरत है .

गुरमेहर बनाम एबीवीपी

दिल्ली के रामजस कालेज में एक सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों को आमंत्रित करने पर भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हंगामा खड़ा कर दिया है. सेमिनार के दिन विद्यार्थी परिषद ने जम कर आमंत्रित करने वाले छात्रों और उन के समर्थक अध्यापकों की धुनाई की. ये वे छात्र हैं जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कन्हैया कुमार के साथ थे और दलितों और पिछड़ों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. परिषद इन आवाजों में से कश्मीर में सेना की ज्यादतियों पर ज्यादा आपत्ति कर रही है, क्योंकि विद्यार्थी परिषद का मानना है कि कट्टर हिंदू धर्म को बचाने के लिए कुछ भी करना जायज है.

जब रामजस कालेज में सेमिनार के लिए आमंत्रित करने वालों के समर्थन में कारगिल में शहीद कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर खुल कर सामने आई तो एबीवीपी ने जम कर उसे मांबहन की गालियां देनी शुरू कर दीं और वे भूल गए कि वे ही औरतों को देवी मानने की झूठी मान्यताएं फैलाते रहते हैं. उन्होंने गुरमेहर कौर को देख लेने की धमकी दे डाली. इस सब पर कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए. हमारे युवाओं को हिंदू संस्कृति में केवल मातापिता, गुरुओं, पंडों और पुजारियों के बीच बिना तर्कवितर्क मानने की शिक्षा दी जाती है. दुनिया का कोई भी धर्म असल में किसी तरह के सवालों की इजाजत नहीं देता तो यह हिंदू धर्म कैसे अलग हो सकता है? विद्यार्थी परिषद के छात्रों के लिए दंगा फैलाने का यह सुनहरा अवसर था, अब वे सरकार के खिलाफ तो बोल नहीं सकते, क्योंकि सरकार उन की अपनी है. वे ईरान व पाकिस्तान में धर्म के विरुद्ध किसी के कुछ बोलने पर हल्ला मचाने वालों का पूरा अनुसरण करते हुए हर पोल खोलने की बात को दबा देना चाहते हैं.

युवाओं से उम्मीद की जाती है कि वे खुद नया सोचें, दूसरों को भी नया सोचने के लिए कहें पर राजनीतिक व धार्मिक जहर इस तरह गहरी पैठ बना चुका है कि युवा खेमों में बंट गए हैं. कुछ को भगवा दिखता है तो कुछ को लाल. कुरेद कर नया ढूंढ़ने वाला खेमा गायब हो गया है. रामजस कालेज में हुआ हंगामा और उस पर मोदी सरकार की शाबाशी साबित करती है कि हर दिमाग पर धार्मिक परत चढ़नी जरूरी होने लगी है.

लाली की शादी में लड्डू दीवाना : पैसे की बर्बादी

शादी और करियर में से किसे कितना महत्व दिया जाए, इस दुविधा में फंसी युवा पीढ़ी की कहानी को बेतरतीब तरीके से पेश की जाने वाली फिल्म है-‘‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’’. फिल्म में नायक अपने करियर की आड़ में अपनी गर्भवती प्रेमिका से दूर हो जाता है और उसकी शादी किसी अन्य से होती है.

फिल्म की कहानी के केंद्र में एक सायकल की दुकान के मालिक (दर्शन जरीवाला) के बेटे लड्डू (विवान शाह) हैं. उसकी तमन्ना सायकल की दुकान में बैठने की बजाय रातों रात बहुत बड़ा उद्योगपति बनने की है. इसी के चलते वह दूसरे शहर में एक रेस्टारेंट में नौकरी करने लगता है, जहां उसकी मुलकात लाली (अक्षरा हासन) से होती है. जो कि अपने पिता (सौरभ शुक्ला) का घर छोड़कर इसी शहर में नौकरी कर रही है. लड्डू खुद को करोड़पति पिता की संतान बताकर लाली को अपने प्यार में फांसता है. दोनों के बीच प्यार पनपता है और एक साथ रहने लगते हैं. पर लड्डू के दिमाग में तो पैसा हावी है. परिणामतः लड्डू की नौकरी चली जाती है और फिर लाली भी उसका घर छोड़कर चली जाती है.

इसके बाद कहानी में बड़ा मोड़ आता है. रामनगर के युवराज (गुरमीत चौधरी) की दादी को ज्योतिषी बताता है कि यदि युवराज की शादी किसी गर्भवती लड़की से कर दी जाए, तो इनके जीवन में सब कुछ ठीक हो जाएगा. युवराज व लाली की शादी तय हो जाती है. फिर कहानी में कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं और एक दिन लाली एक बच्चे की मां बन जाती है.

फिल्म की कहानी बेवजह खींची गई है. लाली व लड्डू का रोमांस प्रभाव नहीं पैदा करता. युवराज की कहानी से बची खुची कसर पूरी होती है और कहानी अर्थहीन हो जाती है. फिल्म का गीत संगीत असरहीन है. पूरी फिल्म देखकर लगता है कि फिल्म की पटकथा किसी नौसीखिए ने रची है. लेखक व निर्देशक जो मुद्दा लेकर चले थे, उसके साथ भी वह न्याय नहीं कर पाए. कैमरामैन ने अच्छा काम किया है. लोकेशन अच्छी है. मगर इससे फिल्म बेहतर नहीं होती.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो इस फिल्म में विवान शाह और अक्षरा हासन की जोड़ी नहीं जमती है. दोनों युवा होते हुए भी रोमांटिक किरदारों में अजीब से लगते हैं. गुरमीत चौधरी ठीक ठाक हैं.

टी पी अग्रवाल और राहुल अग्रवाल निर्मित तथा मनीष हरीशंकर निर्मित फिल्म ‘‘लाली की शादी में लड्ड दीवाना’’ के संगीतकार विपिन पटवा, रेवंत सिद्धार्थ तथा कलाकार हैं- अक्षरा हासन, विवान शाह, संजय मिश्रा, सौरभ शुक्ला, दर्शन जरीवाला, रवि किशन व अन्य.

आखिर अक्षय को मिला बेस्ट एक्टर का अवार्ड

अभिनेता अक्षय कुमार जो किसी अवार्ड सेरेमनी में कभी नहीं जाते, क्योंकि उन्हें कभी कोई अवार्ड नहीं मिलता. लेकिन इस बार जब उन्हें फिल्म ‘रुस्तम’ के लिए नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया. तो वे बहुत खुश हुए और मीडिया से अपनी खुशी को शेयर किया. उनका कहना है कि “मैं नेशनल अवार्ड की सभी ज्यूरी को धन्यवाद् देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे इस अवार्ड के काबिल समझा. ‘रुस्तम’ फिल्म में रुस्तम की भूमिका निभाना मेरे लिए गर्व की बात थी, क्योंकि मैंने नेवी की यूनिफार्म पहनी है. भले ही मैंने इसे अभिनय के लिहाज से पहना था, पर उसकी फीलिंग्स मेरे अंदर थी. इस अवार्ड ने मुझे हमेशा के लिए स्पेशल बना दिया है. मैं इस अवार्ड को अपने माता-पिता को ‘डेडीकेट’ करना चाहता हूं जिन्होंने मुझे इस काबिल बनाया और मेरी पत्नी ट्विंकल खन्ना जो हमेशा मेरा मजाक उड़ाती थी कि अच्छा हुआ कि तुमने किसी भी अवार्ड सेरेमनी में जाना छोड़ दिया, क्योंकि तुम्हें कभी कोई अवार्ड नहीं मिलता, उसे भी समर्पित करना चाहता हूं. देर से ही सही पर मुझे एक सम्मानित अवार्ड मिला”.

लड़कों के छक्के छुड़ा देती है यह महिला क्रिकेटर

कश्मीर की इकरा रसूल क्रिकेट जगत की नई सनसनी हैं. बारामुला स्थित डांगीवाचा में रहने वाली 17 साल की ये लड़की लड़कों की टीम में खेलती है. वह उनके साथ ही प्रैक्टिस करती है और ब्वॉयज टीम में खेलकर मेडल्स जीतती है.

इस दौरान वह अपने शानदार खेल से लड़कों के छक्के छुड़ा देती है. इकरा ऑलराउंडर खिलाड़ी है. सीधे हाथ से बल्लेबाजी तो करती है ही साथ में तेज गेंदबाजी भी करती है. इसके चलते उसे ‘सुपर गर्ल’ भी कहा जाने लगा है.

इकरा को कश्मीर के माहौल के कारण हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलना पड़ता है. इकरा के पिता भी बेटी का उत्साह बढ़ाने में कोई कमी नहीं करते. इकरा भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली की जबरदस्त फैन हैं. वह कोहली को अब तक 4 बार खत लिख चुकी है लेकिन बदकिस्मती से वह विराट तक नहीं पहुंचे. इकरा का ख्वाब है कि वह एक दिन भारत की ओर से खेलकर देश का नाम रौशन कर विराट कोहली से मुलाकात करे.

दोस्तों का कहना है कि जब वह इकरा के साथ खेलते हैं तो उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है. उनमें से कोई भी इकरा को हरा नहीं पाता. इकरा के कोच का कहना है कि अगर उन्हें अच्छा सपोर्ट मिला तो इकरा काफी आगे तक जाएंगी.

इकरा का मानें तो उनका लक्ष्य भारतीय क्रिकेट टीम में जगह पाना है.

क्या आप देख चुके हैं ‘भाभीपीडिया’ का ट्रेलर, नहीं तो देखें

वैसे तो आपने कई कई फिल्में देखी होंगी, लेकिन इस बार थोड़ी अलग फिल्म आने वाली है, जिसका नाम है 'भाभीपीडिया'. इस फिल्म में दिखने वाले स्टार हैं नितिन शर्मा और ऋषिता भट्ट, जो लीड रोल प्ले कर रहे हैं. इस फिल्म का पोस्टर आया तभी से दर्शक इसे देखने के लिए बेसब्र हैं. इसका कांसेप्ट ये है कि इसका हीरो जिसे 'भाभीपीडिया' हो जाता है, यानि इसे जहां भी भाभियां नजर आती हैं वो उनके पीछे पड़ जाता है. बता दे कि ये फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी है जिसे देखने के बाद आपको भी बहुत मजा आने वाला है.

 “भाभीपीडिया” देखने के बाद एक बात तो आप की साफ़ हो जायगी की रियल और रील लाइफ में कितना अंतर है. भाभीपीडिया मूवी का ये ट्रेलर जितना दमदार है, उससे कहीं गुना ज्यादा फिल्म भी दमदार होगी.

जीवनसाथी के साथ करें फाइनेंशियल प्‍लैनिंग

आप भी इस बात से सहमत होंगे कि विवाह के बाद चाहे महिला हो या पुरुष दोनों के जीवन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं तो आपके बचत और निवेश की शैली में भी शादी के बाद परिवर्तन होना स्‍वाभाविक है. इसके लिए आप खुद को थोड़ा व्यवस्थित करते हुए वास्तविक फाइनेंशियल प्‍लानिंग तैयार करने की शुरुआत करें.

पति-पत्‍नी दोनों मिलकर बनाएं निवेश की योजना

– जहां पहले आपकी बचत का लक्ष्य केवल बचत और निवेश करना था, वहीं ये समय अब परिवार के भविष्य को देखते हुए वित्तीय योजना बनाने का होगा.

– पति-पत्नी दोनों को मिलकर निवेश की योजना बनानी चाहिए. योजना ऐसी होनी चहिए जिससे दोनों ही लोगों को फायदा भी हो और हर तरह से राहत भी मिले.

शादी के बाद करें फाइनेंशियल प्‍लानिंग के इन पहलुओं पर गौर

– सर्वप्रथम आपको यह देखने की जरूरत है कि आपका पर्याप्त इंश्‍योरेंस है या नहीं, खास तौर पर तब जब आपकी पत्नी (या पति) आप पर आर्थिक रूप से निर्भर हों. इससे आपके साथ किसी           प्रकार का हादसा हो जाने की दृष्टी में आपके पति या पत्नी को आर्थिक कष्ट न झेलना पड़े.

– साथ ही घर के मासिक खर्च के अलावा अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में भी कियी को कोई बाधा न आए.

– जिम्‍मेदारी बढ़ने के साथ, यानि कि आपके मां या पिता बनने के बाद आपको अपनी इंश्‍योरेंस संबंधी जरूरतों की समीक्षा जरूर करनी चाहिए.

पहले निर्धारित करें लक्ष्‍य फिर करें निवेश

– मान लीजिए कि खास समय सीमा में आपने अपने लिए तीन लक्ष्य निर्धारित किए हैं. आप कुछ महीनों के अंदर अपना घर खरीदना चाहते हैं जिसके लिए डाउन पेमेंट की व्यवस्था करनी है, तो ल   यही आपकी तात्कालिक जरूरत है जिसकी पूर्ति आप अपने सेविंग अकाउंट में जमा की गई राशि से कर सकते हैं.

– आपकी इच्छा है कि आप जीवन-साथी के संग छुट्टियां मनाने जाएं, तो इसके लिए की जाने वाली बचत को शॉर्ट-टर्म यानि कि सम समय वाली डेट फंड्स में लगाइए.

– अगर आप दो-तीन वर्षों में छुट्टियां मनाने जाना चाहते हैं तो बैंकों के फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट या म्‍यूचुअल फंड्स के इनकम फंड्स में पैसे डाल सकते हैं.

अपने रिटायरमेंट को अनदेखा न करें

– अगर आपकी उम्र 20 से 30 साल है तो रिटायरमेंट के लिए फंड जुटाने का सबसे बढ़िया विकल्प है कि आप इक्विटी में निवेश करें. यह भी ध्यान रखें कि डेट और इक्विटी बैलेंस्‍ड हों.

– अगर आपका लक्ष्य 7 वर्ष या उससे अधिक समय का है तो इक्विटी में निवेश करना ज्यादा तर्कसंगत है.

– विवाह के बाद जिम्मेदारियां तो बढ़ती ही हैं साथ ही भविष्य के बारे में भी सोचना होता है. सेविंग्स अचानक भी शुरू की जा सकती हैं, बस इसके लिए थोड़ी दृढ़प्रतिज्ञा का होना जरूरी है.

जानिए फिक्स्ड डिपॉजिट के फायदे और नुकसान

सेबी के एक सर्वे के जरिए यह बात सामने आई है कि देश के 95 फीसदी लोग आज भी अपना पैसा निवेश करने के लिए बैंक जमाओं (फिक्स्ड डिपॉजिट) को शौप देते हैं, जबकि 10 फीसद से भी कम लोग अपना पैसा म्युचुअल फंड और स्टॉक में निवेश करना पसंद करते हैं. देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया यह सर्वे बताता है कि भारतीयों के लिए जीवन बीमा दूसरा सबसे पसंदीदा निवेश विकल्प है. इसके अलावा भारतीयों के शीर्ष पांच निवेश विकल्पों में कीमती धातु (सोना-चांदी), पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम और रियल एस्टेट आता है.

हम आपको आज फिक्स्ड डिपॉजिट के फायदे और नुकसान के बारे में बताएंगे.

बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करना आम निवेशकों के बीच एक पसंदीदा निवेश विकल्प है. इसका सीधा कारण एक तो बैंक एफडी के जरिए किए जाने वाले निवेश का जोखिम रहित होना है और दूसरा निश्चित अवधि के एक निश्चित और आकर्षक ब्याज दर पर रिटर्न मिलना है. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि इन खूबियों के बाद भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाने के कुछ नुकसान भी हैं.

फिक्स्ड डिपॉजिट के फायदे

1. जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या पोस्ट ऑफिस में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाता है तो यह निवेश पूरी तरह से जोखिम रहित होता है.

2. यह निवेश किसी भी तरह से लिंक नहीं होता. फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि पूरी होने के बाद निवेशक को पूरी राशि ब्याज के साथ वापस मिल जाती है.

3. फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दर सीनियर सिटीजन के लिए कुछ अधिक होती है.

4. बैंक भी समय-समय पर इसकी समीक्षा करके बाजार के अनुरूप

फिक्स्ड डिपॉजिट की दर को तय करते हैं.

5. तमाम बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट की दर में मामूली अंतर होता है.

6. कई बार बैंक ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से  ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर ऊंची दर की पेशकश करते हैं.

फिक्स्ड डिपॉजिट के नुकसान

1. बैंक एफडी पर मिलने वाला ब्याज प्राय: महंगाई की दर के बराबर ही होता है और कई बार इस दर से कम भी रह जाता है.

2. 2012-2014 के दौरान भारत की औसत महंगाई दर 9.76 फीसदी रही है.

3. एक्सपर्ट निवेश विकल्प पर रिटर्न जोड़ते समय उपभोक्ता महंगाई की औसत दर 8 फीसदी के बराबर मानते हैं.

4. ऐसे में बैंक एफडी पर अगर निवेशक को 8–8.5 फीसदी के आसपास का ही ब्याज मिलता है तो निवेशक बमुश्किल महंगाई दर को पछाड़ पाता है. ऐसे में निवेशक को निवेश पर मिलने वाला रिटर्न शून्य हो जाता है.

5. बैंक एफडी पर मिलने वाला रिटर्न टैक्सेबल होता है. आमतौर पर लंबे समय के लिए किया जाने वाला निवेश करमुक्त होता है.

6. बैंक एफडी पर मिलने वाला ब्याज मौजूदा स्लैब में ही करयोग्य होता है. ऐसे में मिलने वाला शुद्ध रिटर्न और घट जाता है.

7. महंगाई की दर से कम रिटर्न और मिलने वाले रिटर्न पर भी टैक्स लगने की वजह से शुद्ध कमाई का घट जाना ये दो ऐसे कारण हैं जो बैंक एफडी जैसे जोखिम रहित निवेश को बेहतर नहीं बनाते.

8. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपने कम उम्र में निवेश शुरू किया है तो लंबी अवधि के लिए इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश करना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है.

9. अगर उम्र या किसी अन्य कारण आपके जोखिम लेने की क्षमता नहीं है तभी आपको एफडी जैसे विकल्पों को चुनना चाहिए.

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