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मंहगे बार और होटल्स के मालिक हैं बॉलीवुड के ये सितारे

बॉलीवुड सितारों के बारे में जितनी बात की जाए उतना कम होगा. हाल ही में बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख ने एक इंटरव्यू के दौरान खुद का रेस्त्रां खोलने की इच्छा जाहिर की थी. शाहरुख का कहना है कि वे जुहू में रेस्त्रां खोलकर लोगों को इटेलियन खाना और खिलाना पसंद करेंगे. इसके साथ ही शाहरुख ने ये भी कहा कि अगर वे अपना रेस्त्रां खोलते हैं तो उसका नाम वो रेड चिलीज रेस्त्रां रखेंगे. क्या आप जानते हैं कि उनकी प्रोडक्शन कंपनी का नाम भी रेड चिलीज ही है.

अब शाहरुख ने तो केवल इच्छा जाहिर की थी और इस बात को काफी समय भी हो गया, लेकिन बॉलीवुड में ऐसे और भी कई सितारे हैं जो होटल और रेस्त्रां के मालिक हैं.

आज हम आपको ऐसे ही कुछ सितारों के बारे में बताने वाले हैं, जो कई मंहगें होटल्स और रेस्त्रां के मालिक हैं.

शिल्पा शेट्टी

बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी मुंबई के बांद्रा स्थित क्लब 'रॉयल्टी नाईट बार' की मालकिन हैं. इसके अलावा हाल ही में उन्होंने मुंबई में स्पा भी शुरू किया है. 

सुष्मिता सेन

नवी मुंबई में 'बंगाली मासीज किचन' नामक आउटलेट चलाती हैं. इसके अलावा दुबई में सुष्मिता का ज्वेलरी स्टोर भी है जिसे उनकी माँ संभालती हैं.

अर्जुन रामपाल

अर्जुन 'लैप बार' नामक एक लाउंज के मालिक हैं, जो नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित है. इसके अलावा अर्जुन एक इवेंट मैनेजमेंट फर्म 'चेंजिंग गणेशा' भी चलाते हैं.

बॉबी देओल

बॉलीवुड सेलेब्स की इस लिस्ट में बॉबी देओल भी पीछे नही हैं. बॉबी ने फरवरी 2006 में रेस्टॉरेंट 'समप्लेस एल्स' शुरू किया था.

आशा भोंसले

मशहूर गायिका आशा भोंसले ने साल 2002 में दुबई में 'आशाज़' नामक एक रेस्टॉरेंट शुरू किया था.

मिथुन चक्रवर्ती

अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती 'मोनार्क ग्रुप ऑफ होटल्स' के मालिक हैं. ऊंटी, मसूरी सहित देश के कई हिस्सों में उनकी इस चेन के होटल्स बने हुए हैं.

डिनो

पर्दे से लगभग गायब हो चुके अभिनेता डिनो मुंबई सहित देश के अलग-अलग शहरों में 'क्रीप स्टेशन' नाम से रेस्टॉरेंट कम बार चलाते हैं.

पेरीजाद

बॉलीवुड में कुछ खास फिल्मों में भले ही नजर नहीं आई हो, लेकिन पेरीजाद पॉली हिल मुंबई में मल्टीकुशीन रेस्टॉरेंट 'गोंडाला' चलाती हैं.

हमारे बॉलीवुड स्टार्स बहुत स्मार्ट हैं, वे बॉलीवुड फिल्मों में काम करके दर्शकों का दिल तो जीत ही रहे हैं. साथ ही अपने बिजनेस के साथ ख़ुद को फाइनेंशियली स्ट्रांग भी कर रहे हैं.

कार लोन लेते वक्त इन बातों का रखें ध्यान

अपना घर और अपनी गाड़ी हर किसी का सपना होता है. जब कोई इंसान पैसे कमाने लगता है तब उसे अपने घर के ख्वाब आने लगते हैं. अगर आप भी नई कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो आपके पास भी कई ऑप्शन होंगे. अगर आपकी आए उतनी नहीं है, और आप कार लोन के लिए एप्लाई करने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपके लिए कुछ बातों का जानना बहुत जरूरी है.

कार लोन के लिए एप्लाई करने से पहले-

लोन अमाउंट

कार खरीदने वाले अधिकतर लोगों यह कंफ्यूजन रहता है कि उन्हें कितनी रकम लोन के तौर पर बैंक से लेनी चाहिए. बैंक कार लोन देने से पहले आवेदनकर्ता के आय का विश्लेषण करते हैं. अगर आपकी कार लोन की ईएमआई आपके मासिक आय का 20 फीसदी के आसपास है तो ऐसे में बैंक आपको लोन दे देते हैं. अगर किसी की मासिक सैलेरी 50,000 रुपए है तो कार लोन की ईएमआई 10,000 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए.

सिर्फ इंट्रेस्ट ही काफी नहीं

अगर आप सिर्फ बैंक के ब्याज दरों को देखकर कार लोन लेते हैं तो यह गलत है. मान लें कि आप चार लाख रुपए का कार लोन लेना चाहते हैं. कोई बैंक कार की कीमत का 80 फीसदी लोन पांच साल के लिए 10.5 फीसदी की ब्याज दर पर देता है. वहीं,  दूसरा बैंक 10.25 फीसदी की ब्याज दर पर लोन देता है. इन दोनों ब्याज दरों में सिर्फ 48 रुपए का ही फर्क है. थोड़े से कम ब्याज के चक्कर में एकदम से लोन लेने का फैसला न करें. ब्याज दरों के अलावा दूसरी बातों का भी ध्यान रखें और फिर लोन लेने का फैसला लें.

प्रोसेसिंग चार्ज

बैंक के नियमों के अनुसार कार लोन प्रोसेसिंग फीस तय रहती है. आमतौर पर 2.5 लाख तक के लोन पर बैंक 2500 रुपए तक प्रोसेसिंग चार्ज लेते हैं और इसके साथ ही डाक्‍यूमेंटेशन के 350 रुपए देने पड़ते हैं. वहीं, 4 से 5 लाख के लोन पर बैंक 4000 रुपए प्रोसेसिंग फीस और डाक्‍यूमेंटेशन के लिए 350 रुपए ही लेते हैं. लोन लेने से पहले बैंकों के ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस को भी कंपेयर करना जरूरी है.

प्रीपेमेंट चार्ज का रखें ध्यान

सस्ती ब्याज दरें देखकर लोन के लिए एप्लाई न करें. कार लोन चुकाने के लिए आपको 5-7 साल का वक्त मिलता है. अगर आपकी सैलेरी बढ़ती है और आप लोन को जल्द से जल्द चुकाना चाहते हैं, तो कई बैंकों की पॉलिसी के अनुसार आपसे प्रीपेमेंट चार्ज भी वसूला जाता है. कुछ बैंक प्रीपेमेंट पैनल्‍टी चार्ज नहीं लेते. अगर आपको लगता है कि आपकी आय बढ़ने वाली है तो प्रीपेमेंट वाले बैंकों से कर्ज न लें. बैंक की शर्तों को ध्यान से पढ़े.

अपना क्रेडिट स्कोर पता करें

कार लोन के लिए एप्लाई करने से पहले अपने क्रेडिट स्कोर के बारे में पता करना जरूरी है. बैंक आपको क्रेडिट स्कोर के हिसाब से ही लोन देगा. लो क्रेडिट स्कोर पर आपका लोन ऐप्लीकेशन रिजेक्ट हो सकता है और हाई क्रेडिट स्कोर पर आपको तुरंत लोन मिल सकता है.

आय के हिसाब से हो व्यय

जितनी आपकी आय है उसी हिसाब से व्यय भी करें. पहले यह तय करें कि क्या आप ईएमआई पेमेंट करने के काबिल हैं या नहीं. अगर आप एक बार भी ईएमआई चुकाने में चुकते हैं तो इसका प्रभाव आपके सिबिल स्कोर पर ही पड़ता है. आपकी अभी की मासिक आय के हिसाब से ही लोन रिपेमेंट की अवधि चुनें. भविष्य में सैलेरी बढ़ने की आशा में कोई भी कदम न उठायें.

क्रिकेट छोड़ना चाहता था यह खिलाड़ी लेकिन..

टीम इंडिया के 2016-17 के शानदार प्रदर्शन में तेज गेंदबाज उमेश यादव का अहम रोल है. हालांकि कुछ समय पहले उमेश क्रिकेट छोड़ घर बैठने के बारे में सोचने लगे थे. टीम इंडिया में उमेश कभी अंदर तो कभी बाहर होते रहते थे. उनके ऐसे हालात को देखकर उनकी पत्नी तान्या ने उन पर प्रैक्टिस जारी रखने का दवाब बनाना शुरू कर दिया.

उमेश पहले टीम में रेग्युलर नहीं थें. वह हमेशा ही टीम से अंदर-बाहर होते रहते थें कभी विकेट लेते थे तो कभी नहीं. लेकिन जब 2013 में उनकी शादी हुई, तब उनके अंदर उन्हें उनके परफॉर्मेंस को लेकर समझ बढ़ गई.

यह कहना गलत नहीं होगा कि उमेश अपने परफॉर्मेंस का श्रेय अपनी पत्नी को देते हैं. शादी के बाद जब तान्या ने शुरू के दो-तीन साल तक उनके परफॉर्मेंस को देखा, तो उन्हें टोकना शुरू कर दिया. वह उन्हें हमेशा से ही अच्छा खेलने के लिए प्रोत्साहित करती थीं उनका हौसला बढ़ाती थीं.

हम आपको बताते चलें कि एक समय ऐसा भी आया था, जब तेज गेंदबाज उमेश यादव को लगने लगा था कि अब ट्रेनिंग छोड़कर वह घर बैठ जाएं. उस समय तान्या ने उनका साथ निभाया और प्रैक्टिस पर जाने की जिद की और समझाया कि कोई छुट्‌टी नहीं लेनी है. प्रैक्टिस पर जाना है, तो जाना है.

तान्या उन्हें अकसर ही कहा करती थीं यही तुम्हारी जॉब है. यही जुनून है. इसे हासिल करो. तब उमेश ने फैसला किया कि सबकी नजरों में तो ठीक है लेकिन पहले पत्नी की नजरों में वह ऐसे बनें कि उन्हें लगे कि उनमें काबिलियत है. इसके बाद उमेश ने मेहनत शुरू की और आज खुद को सबके सामने साबित किया.

उमेश ने इस सीजन में 11 मैचों में 3.03 की इकॉनमी से 25 विकेट झटके हैं. अपनी लगातार अच्छी होती परफॉर्मेंस का श्रेय वे वाइफ तान्या वाधवा को देते हैं. उनके अनुसार शादी के बाद वे बहुत मेच्योर हुए हैं.

इंग्लिश सिखाएगा आपका स्मार्टफोन

ऐसे कई ऐप्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से आप अपने स्मार्टफोन के जरिए आसानी से इंग्लिश सीख सकते हैं. ऐसे ही कुछ कारगर ऐप्स के बारे में बता रहे हैं

1. Duolingo : डुओलिंगो को अगर भाषाएं सिखाने का उस्ताद कहा जाता है. यह ऐप हाल ही में भारत देश में उपलब्ध हुआ है और हिंदी से अंग्रेजी बहुत ही आसानी से सिखाता है.

क्या है खास…

– इस ऐप में लॉगइन करना काफी आसान है. इसे आप उसी सामान्य तरीके, गूगल प्लस, फेसबुक के जरिए या ईमेल के साथ पासवर्ड, डालकर लॉगइन कर सकते हैं.

– इस ऐप का यूजर इंटरफेस अर्थात आपको इंग्लिश सिखाने का तरीका बहुत आसान है. इस ऐप में एक स्टेप से दूसरे तक पहुंचना भी काफी आसान है.

– इस ऐप में ऑडियो और विजुअल दोंनो का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है.

– साथ ही यह गेमिंग के जरिए, मजेदार तरीके से अंग्रेजी सिखाने का एक बेहतर तरीका है.

– इस ऐप में किसी भी तरह के ऐड नहीं हैं इसलिए इसका फ्लो काफी अच्छा है. इशमें किसी भी तरह की रुकावट नहीं होती.

– इसमें आपकी समझ के हिसाब से पॉइंट मिलेंगे जिससे छोटे स्तर से फिर अडवांस लेवल पर पहुंचते हैं.

– इस ऐप में अंग्रेजी का अंदाज फिलहाल अमेरिकन स्टाइल का है, इसलिए समझने में कुछ दिक्कत हो सकती है.

एस ऐप के लिए आपके फोन का प्लैटफॉर्म, ऐंड्रॉयड या आईओएस होना चाहिए. इसकी कोई कीमत नहीं होती. यह आपके फोन पर एकदम फ्री डाउनलोड हो जाएगा.

2. Hello English : इस हिंदुस्तानी ऐप ने लैंग्वेज सिखाने के देसी तरीकों को बहुत मजबूती से पकड़ा है. इस ऐप को एक इंडियन स्टार्टअप कंपनी ने बनाया है जिसे गूगल फंड करती है.

क्या है खास

– इसे भी लॉगइन करना काफी आसान है.

– इस ऐप की मदद से आप काफी नीचे के लेवल से अंग्रेजी सीख सकते हैं. इंग्लिश सीखने की शुरुआत करने वालों के लिए यह एक काफी अच्छा ऐप है.

– इसमें मॉड्यूल समझाने की लैंग्वेज काफी आसान होती है और भारतीय लहजे की अंग्रेजी काफी सहूलियत भरी मिल जाती है.

– इस ऐफ का लेआउट और स्टाइल काफी साफ-सुथरा और समझने मे काफी आसान होता है.

– इस ऐप में कई इंटरैक्टिव सेशन्स होते हैं और यहां कई टीचर्स ऑनलाइन हेल्प करने के लिए हमेशा मौजूद होते हैं.

– हिंदी के साथ कई भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी सीखी जा सकती है, जैसे कि पंजाबी,बंगाली, उड़िया और तमिल आदि.

– यह ऑफलाइन ऐप इस्तेमाल करने का बेहतरीन ऑप्शन प्रदान करती है. जहां इंटरनेट उपलब्ध नहीं है, वहां के लिए ऑफलाइन मोड में इसे डाउनलोड करके चला सकते हैं.

– यह एक बेसिक लेवल का ऐप है. कई बार यहां गहराई में सीखने में दिक्कत पेश आ सकती है.

इसके लिए भी आपके स्मार्टफोन का प्लैटफॉर्म ऐंड्रॉयड, आईओएस और विंडोज हो सकता हैं. यह एक बिल्कुल फ्री ऐप है.

3. Memrise : इस ऐप की खासियत है कि इसमें लैग्वेज सिखाने का हल्का-फुल्का तरीका इस्लेमाल किया जाता है, कहीं हॉलीवुड फिल्म के सीन्स के जरिए लैंग्वेज सिखाई जाती है तो कहीं कार्टून कैरक्टर्स के जरिए.

क्या है खास…

– इस ऐप में लैंग्वेज सीखने के लिए अच्छा मोटिवेशन मिलता है साथ ही यह काफी मजेदार है.

– इसके जरिए वक्त का काफी अच्छा इस्तेमाल हो जाता है. राह चलते भी लैंग्वेज को मजेदार तरीके से सीखा जा सकता है.

– इस ऐप में जिन तस्वीरों के जरिए अंग्रेजी सिखाई जाती है, वे बहुत मजेदार होती हैं.

– यह ऐप इस बात को काफी जल्दी समझ जाता है कि आप किस स्टेज पर पहुंच चुके हैं और उस हिसाब से लेवल काफी समझदारी से बढ़ाता रहता है.

– हां यहां कई बार हिंदी कल्चर के हिसाब से फोटो और स्टेटमेंट का कॉम्बिनेशन समझ पाना मुश्किल होता है, पर ये इतना भी मुश्किल नहीं है.

यह ऐप ऐंड्रॉयड, आईओएस प्लैटफॉर्म पर चलता है. दूसरे ऐप्स की तरह ये भी बिल्कुल फ्री है.

4. Hello Pal : दोस्तों से बातें करते हुए अंग्रेजी सीखने का मजा ही कुछ और है. ऐसे ही मजेदार तरीके से अंग्रेजी सिखाता है यह ऐप. इसमें लॉगइन करने के बाद बताना चलता है कि आप कौन सी लैंग्वेज जानते हैं और कौन सी लैंग्वेज सीखना चाहते हैं.

क्या है खास…

– इसमें लॉगइन काफी आसान हैं इसे फेसबुक या गूगल प्लस के जरिए सीधे किया जा सकता है. अगर गूगल या फेसबुक अकाउंट नहीं है तो सीधे भी लॉगइन पासवर्ड बना सकते हैं. इसके लिए कोई भी ईमेल अड्रेस होना जरूरी होता है.

– इसमें आपको लोगों से बातें करते हुए अंग्रेजी बोलने का तरीका सिखाया जाता है.

– इसका यूजर इंटरफेस काफी अच्छा है.

– इस ऐप पर मौजूद लोग आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाली अंग्रेजी काफी जल्दी सिखा देते हैं.

– इनसे बात करने की हिचक भी काफी कम होती है.

– चूंकि सारी बातें चैट पर होती हैं इसलिए मोबाइल पर अंग्रेजी में चैट करने की भी अच्छी प्रैक्टिस हो जाती है.

– हां जिन लोगों को मोबाइल पर टाइपिंग झंझट लगता है, उनके लिए काफी मुश्किल भरा है.

इस ऐप के लिए भी प्लैटफॉर्म, ऐंड्रॉयड और आईओएस होने चाहिए और इसे बिल्कुल फ्री डाउनलोड किया जा सकता है.

इन खास ऐप्स के अलावा भी ऐंड्रॉयड, आईओएस और विंडोज पर हिंदी से अंग्रेजी सिखाने वाली कई फ्री ऐप्स होती हैं.

क्या ये भी एंटी रोमियो स्क्वाड का सदस्य है…!

योगी आदित्यनाथ ने एक तरफ सीएम की कुर्सी संभाली ही थी कि यूपी में खलबली मच गई. योगी के आते ही प्रेमियों तक पर बैन लग गया है. रात को सोते समय भी लोगों को ये डर रहता है कि योगी रातों रात न जाने किस पर बैन लगा दे. योगी की एंटी रोमियो स्क्वाड टीम जबसे हरकत में आई है बिना देखे लड़के और लड़कियों को सड़क, पार्क, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन पर धर दबोच कर पीट रही है. यह बिना जाने की वो भाई-बहन हैं या पति-पत्नी या रोमियो जूलियट, यह टीम सीधे हाथापाई पर उतर जाती है. हाल ही में एक वीडियो देखने में आया था, जहां एंटी रोमियो एक्ट के तहत लड़के और लड़कियों को इतनी बुरी तरह से पीटा गया है कि देखने से ही रूह कांप उठती है.

एंटी रोमियो स्क्वाड वाले सड़क पर जा रहे हैं बहन-भाई और बाप-बेटी तक को घेर कर सवाल पूछ रहे हैं और उन्हें आईडी कार्ड दिखाने की बातें कर रहे हैं. किसी भी कपल को सार्वजनिक जगह पर साथ बैठे देखते ही एंटी रोमियो स्क्वाड वाले वहां पहुंच उन्हें तंग करने लगते हैं.

यूपी के बलिया से एक मामला आया था जिसमें एंटी रोमियो स्क्वाड ने एक पति को अपनी पत्नी को प्यार से देखने पर पकड़ कर मारपीट कर दी. खबर के मुताबिक बलिया के कमल नाम का एक युवक अपनी पत्नी को लेकर बाहर डिनर करने जा रहा था. तभी सिविल ड्रेस में 2 पुलिस वालों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया और अगले चौक में रेड लाइट पर रुकते ही एंटी रोमियो स्क्वाड वालों ने उसे रोक लिया और बिना कुछ जाने पिटाई करनी शुरू कर दी. लेकिन युवक ने उन्हें बताया की वह उसकी पत्नी है तो उन्होंने अपनी गलती न मानते हुए युवक से फालतू के सवाल पूछने शुरू कर दिए.

“अगर बीवी तुम्हारी है तो साथ क्यों जा रहे हो”

“अपनी ही बीवी को खाने पर बाहर क्यों ले जा रहे हो”

और तो और सबसे मुश्किल सवाल

” रेड लाइट पर गाड़ी क्यों रोकी ?”                      

उनके इन सवालों से घबराये युवक ने उन्हें कहा कि वह अपनी पत्नी द्वारा बनाये गए खाने संतुष्ट नहीं हैं इसलिए स्वादिष्ट खाना खाने के लिए आज पत्नी को लेकर बाहर जा रहा है. इतना सुनकर युवक की पत्नी ने वहीं उसपर मानसिक उत्पीड़न का केस दर्ज करवा उसे पुलिस के हवाले कर दिया.

जितना जरूरी छेड़छाड़ की रोकथाम है उतना ही जरूरी स्वयंभू और स्वघोषित संस्कृति-रक्षकों पर लगाम लगाना भी. वर्ना पहले भी ऐसे अभियान शुरू किए गए हैं जिनका नतीजा अच्छा नहीं रहा. जब से योगी सरकार ने एंटी-रोमियो स्क्वाड का गठन करके सड़क छाप मजनुओं की धरपकड़ शुरू की है तब से एंटी-रोमियो दल की आड़ में अपनी गुंडागर्दी दिखाने वाले मामले भी सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ भगवा गमछा बांधे कुछ लोग लड़के और लड़की को पीट रहे हैं.

सवाल यह पैदा होता है की जब मुख्यमंत्री योगी ने पुलिस कर्मियों को लेकर इस दल का गठन किया है तो यह कौन लोग है जो खुद कानून हाथ में लेकर सरेआम सजा सुना रहे है और यहां तक की महिला को भी डंडे से बुरी तरह पीट रहे है. वहीं यह लोग मुख्यमंत्री योगी के उस बयान की भी खिल्ली उड़ा रहे है जिसमें उन्होंने शपथ लेते ही सबसे पहले कहा था की प्रदेश में कानून का राज होगा और गुंडागर्दी से आजादी मिलेगी.

आप भी देखिए वो वीडियो जिसे देखकर रुह कांप जाएगी…

महिलाओं की सुरक्षा के लिए किफायती ऐप्स

वर्तमान समय में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बहुत से कदम उठाए जा रहें हैं. नई-नई योजनएं तैयार की जा रही है. इसी के चलते कुछ ऐप्स भी तैयार किए गए है जो बेहद किफायती है.

Nirbhaya: Be Fearless

इस ऐप से आप सेट किए गए कॉन्टैक्ट पर इमरजेंसी मैसेज और कॉल कर सकते हैं. इस ऐप पर यूजर सेफ व अनसेफ एरिया का व्यू, मैप पर देख सकते हैं. पावर बटन का यूज कर ऐप में सेव ग्रुप को मैसेज कर सकते हैं.

bsafe

इस ऐप से आप अपनी लोकेशन शेयर कर सकते हैं. साथ ही GPS ट्रेस की सुविधा भी इसमे उपलब्ध है. टाइमर मोड का उपयोग कर ऑटोमैटिक अलार्म सेट कर सकते हैं. आई एम हियर फीचर में आप कहां हैं, यह सिलेक्टेड लोगों को बता सकते हैं. इस ऐप से आप फेक कॉल भी अपने फोन पर कर सकते हैं. अगर आप मुसीबत में फंस जाती हैं, तो गार्जियन बटन को हिट करते ही आपके दोस्तों और फैमिली तक नोटिफिकेशन पहुंच जाएगा. आप उन्हें अपनी लोकेशन के साथ ही वीडियो भी सेंड कर सकती हैं.

Safetipin

यह एक पर्सनल सेफ्टी ऐप है, जिसमें जीपीएस ट्रेकिंग, इमरजेंसी, इम्पोर्टेंट कॉन्टैक्ट नंबर, सेफ लोकेशन के लिए डायरेक्शन जैसे फीचर्स हैं. ऐप में मौजूद पिन सेफ व अनसेफ एरिया को डिस्प्ले करती है. कहीं जाने से पहले एरिया सेफ है या नहीं, सेफ्टी स्कोर से चैक कर सकते हैं. साथ ही आप अपना एक्सपीरियंस शेयर कर दूसरों को भी आगाह कर सकती हैं. इसमें एक डायरेक्टरी भी दी गई है, जिसमें इमरजेंसी हेल्प नंबर है.

iGoSafely

यह ऐप एक पर्सनल सिक्योरिटी अलार्म की तरह काम करता है. अगर आप किसी इमरजेंसी में फंस गई हैं, तो आपको अपना फोन जोर से हिलाना है या अपने हैडफोन को अनप्लग करना है. ऐसा करते ही आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स तक ईमेल या मैसेज पहुंच जाएगा. जब तक आप सीक्रेट कोड नहीं डालती, हर 60 सेकंड में उन तक अपडेट पहुंचती रहेगी. इसमें जीपीएस पोजिशन, स्ट्रीट एड्रेस और 30 सेकंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल है.

ब्लू माउंटेनः टीवी के रिएलिटी शो की हकीकत का चित्रण

टीवी के रिएलिटी शो का हिस्सा बनने वाले किशोरवय के बच्चों के मन मस्तिष्क और उनके भविष्य व उनकी शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव के अलावा माता पिता द्वारा अपने अधूरे सपनों को अपने बच्चों के माध्यम से पूरा करवाने का सपना देखने के क्या परिणाम होते हैं, इन दो मूल बिंदुओं पर बात करने वाली फिल्म है,‘‘ब्लू मांउटेंन’’. लेकिन पटकथा लेखक और निर्देशक की अपनी कमियों के चलते यह फिल्म मकसद से भटक जाती है.

एक हिल स्टेशन में रहने वाला किशोरवय का सोम शर्मा (यथार्थ रत्नम) यूं तो पायलट या वैज्ञानिक बनने का सपना देख रहा है, पर अचानक जब उसका टीवी के एक संगीत प्रधान रिएलिटी शो के लिए चयन हो जाता है, तो इससे उसकी मां वाणी शर्मा (ग्रेसी सिंह) बहुत खुश होती हैं. क्योंकि वाणी शर्मा (ग्रेसी सिंह) कभी मशहूर गायिका हुआ करती थीं, पर ओम से शादी करने के बाद उन्होंने संगीत को तिलांजली दे दी थी.

अब वाणी अपने संगीत के उस अधूरे सपने को अपने बेटे के माध्यम से पूरा होते हुए देखना चाहती हैं. वह चाहती हैं कि उनका बेटा मशहूर गायक बने और फिल्मों में हीरो के लिए पार्श्वगायन करे. जबकि सोम के पिता ओम (रणवीर शोरी) चाहते हैं कि बेटा सोम पढ़ाई पर ध्यान दे और फाइटर पायलट बने. मगर वाणी के आगे ओम को झुकना पड़ता है. वाणी बेटे सोम के साथ मुंबई पहुंचती है, जहां रिएलिटी शो में सोम हिस्सा लेता है. एपीसोड दर एपीसोड उसे स्टारडम मिलने लगता है. पर सेमी फाइनल में वह हार जाता है और फिर पूरी तरह से टूट जाता है.

वह वापस अपने शहर के घर आकर अपने आपको घर के कमरे में बंद कर लेता है. स्कूल नहीं जाता. अपने सहपाठियों से नहीं मिलता. सभी उसे आम बच्चों की तरह की जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करते हैं. पर सोम को किसी की बात समझ में नहीं आती. वह अपनी सहपाठी ओशी (सिमरन) को भी भगा देता है. पर सोम के दोस्त हार नहीं मानते. वह कोई न कोई योजना बनाते रहते हैं.

ओशी के जन्मदिन पर सोम के साथ सभी दोस्त इकट्ठा होते हैं और वहां पर सोम से ओशी रोमांटिक गीत गाने के लिए कहती है. पर वह गीत नहीं गाता है. बल्कि वहां से चल देता है. ओशी उसके पीछे आती है और रास्ते में सोम को थप्पड़ मारकर कहती है कि उसने उसका जन्मदिन बर्बाद कर दिया. तब सोम के अंदर का गुबार फट पड़ता है. वह रोने लगता है. ओशी भी रोती है और उसे समझाती है कि हर इंसान की जिंदगी में हार जीत होती रहती है. वह यह क्यों भूल जाता है कि जिन बच्चों का चयन इस रिएलिटी शो के लिए नहीं हुआ या जो सेमी फाइनल तक भी नहीं पहुंचे वह क्या उसी की तरह हार का गम मना रहे हैं?

उसके बाद पता चलता है कि सोम की मां बीमार है, अब मां को खुश करने के लिए सोम फिर से गाना गाने लगता है. मां वाणी स्वस्थ हो जाती है. सोम को भी मुंबई से एक फिल्म में पार्श्वगायन का निमंत्रण मिलता है. वह मुंबई जाने से पहले एक बार अपने दोस्तों के साथ साइकल की रेस लगाता है.

लेखक व निर्देशक सुमन गांगुली ने फिल्म के लिए बहुत बेहतरीन विषय का चयन किया. उन्होंने टीवी के रिएलिटी शो की चमकीली दुनिया की हककीत व अवसाद को बेहतर तरीके से उकेरा है. फिल्म में बच्चों के लालन पोषण पर भी बात की गयी है. मगर कमजोर पटकथा के चलते फिल्म अपना प्रभाव खो देती है. फिल्म का क्लायमेक्स भी गड़बड़ा गया है.

लेखक व निर्देशक को अपनी फिल्म वहीं खत्म करनी चाहिए थी, जहां सोम, ओशी का थप्पड़ खाकर रो पड़ता है और ओशी उसे जिंदगी की असलियत समझाती है. सोम के मन का सारा गुबार वहीं निकलना चाहिए था. मगर फिल्म में मां के इमोशन को महत्व देने के चक्कर में कहानी आगे बढ़ाकर सारा प्रभाव खत्म कर दिया गया. यह बात दर्शक के गले नहीं उतरती.

फिल्म का गीत संगीत अच्छा है. फिल्म में शास्त्रीय संगीत को बहुत अच्छे तरीके से पिरोया गया है. लोकेशन बहुत बेहतरीन चुनी गयी है. कैमरामैन ने हिमायल की खूबसूरत वादियों को बहुत अच्छे तरीके से कैमरे में कैद किया है.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो ग्रेसी सिंह व रणवीर शोरी ने अच्छा अभिनय किया है. सोम शर्मा के किरदार को यथार्थ रत्नम ने बेहतर तरीके से निभाया है.

134 निमट की अवधि वाली फिल्म ‘‘ब्लू मांउटेन’’ के निर्माता राजेश कुमार जैन, लेखक व निर्देशक सुमन गांगुली, कैमरामैन चंद्रशेखर रथ, संगीतकार संदीप शौर्य, मोंटी शर्मा, आदेश श्रीवास्तव तथा कलाकार हैं- ग्रेसी सिंह, रणवीर शोरी, यथार्थ रत्नम, सिमरन शर्मा, राजपाल यादव, आरिफ जकरिया, महेष ठाकुर व अन्य.

गुरमेहर कौर : क्या है गुनाह

आखिरकार दिल्ली विश्वविद्यालय में मचे घमासान के चलते गुरमेहर कौर दिल्ली से बाहर चली गई. उस के परिवार का कहना है कि वह अब दिल्ली में नहीं है. गुरमेहर आइसा के पब्लिक प्रोटैस्ट मार्च से भी अलग हो गई है. 27 फरवरी को गुरमेहर ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से मुलाकात की थी. उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों की ओर से दुष्कर्म की धमकी मिलने की शिकायत की थी.

दिल्ली पुलिस ने कारगिल युद्ध में शहीद की बेटी गुरमेहर की शिकायत पर आईटी ऐक्ट के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. पुलिस की साइबर सैल इस मामले की जांच कर रही है. उधर, एबीवीपी की ओर से भी पुलिस को एक आवेदन दिया गया है, जिस में कहा गया है कि उस का कोई सदस्य रेप की धमकी देने वालों में शामिल नहीं है. कुल मिला कर यही कह सकते हैं कि यह बेहद शर्मनाक प्रकरण है. एक युवती, जिस के पिता ने देश के लिए शहादत दी, के साथ इस प्रकार का व्यवहार न सिर्फ अशोभनीय और अनैतिक है बल्कि अत्यंत निंदनीय भी है. आखिरकार, यह समझ से परे है कि छात्रा गुरमेहर कौर का गुनाह क्या है, जो उसे इस तरह घटिया स्तर तक जा कर मानसिक रूप से उत्पीडि़त करने की कोशिश की गई है?

इस मामले पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि गुरमेहर पर कोई विवाद सही नहीं है. यह उन वामपंथियों की सोच है जो जवानों के शहीद होने पर जश्न मनाते हैं. उन्होंने कहा है कि भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के दौरान भी वामपंथियों ने चीन का समर्थन किया था. वे युवाओं को गुमराह करते हैं. गृह राज्यमंत्री को अपने ही देश के वामपंथी संगठनों को राष्ट्रविरोधी बताने में थोड़ा भी संकोच नहीं हुआ. इसे कितना जायज ठहराया जाए, यह कोर्टकचहरी का मामला है, पर सिर्फ इसलिए किसी छात्रा को रेप की धमकी दी जाए कि उस ने उस की विचारधारा का विरोध क्यों किया, तो यह मेरे खयाल से शर्मनाक है.

बता दें कि कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी ने दिल्ली के रामजस कालेज में हुई हिंसा के बाद आई एम नौट अफ्रेड औफ एबीवीपी अभियान शुरू किया था. यह वायरल हुआ और देशभर के छात्रों ने इस का समर्थन किया. दुनिया के सब से बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में अभिव्यक्ति की आजादी की बात कही जाती है. पर सवाल है कि क्या इसे ही अभिव्यक्ति की आजादी कहेंगे? जिस देश की भाजपा यानी नरेंद्र मोदी सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नामक अभियान चला रही है. उस भाजपा के आनुषंगिक संगठन एबीवीपी की कार्यशैली को किस श्रेणी में रखा जाए?

सवाल यह भी है कि आखिर उन्हें ये सब करने की छूट किस ने दी. बीते वर्ष का जेएनयू प्रकरण सब को याद है. जेएनयू के मुद्दे पर एबीवीपी व दिल्ली पुलिस गठजोड़ वाली पूरी फिल्म ही फ्लौप हो गई. अब रामजस कालेज मसले पर जेएनयू प्रकरण दोहराने की कोशिश हुई, लेकिन वह भी फ्लौप हो गया. जाहिर है कि गुरमेहर के प्रति एबीवीपी का जो रवैया सामने आया है, वह अपने फ्लौप अभियानों की कुंठा की वजह से है.

जानकार बताते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर ने एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपना अभियान अब वापस ले लिया है. ऐसा कहा जा रहा है कि गुरमेहर ने एबीवीपी की ओर से कथित तौर पर धमकियां मिलने और भाजपा के नेताओं द्वारा ट्रोल किए जाने पर अभियान वापस लिया. गुरमेहर को उस के कालेज लेडी श्रीराम कालेज ने समर्थन देते हुए साहसपूर्ण कदम बताया.

इस बाबत गुरमेहर ने ट्वीट किया कि मैं अभियान से हट रहीं हूं. मुझे जो कहना था, वह मैं कह चुकी हूं. गुरमेहर ने कहा कि उसे काफी कुछ झेलना पड़ा. 20 साल की उम्र में मैं इतना ही बरदाश्त कर सकती हूं. अभियान वापस लेने के बाद डीयू की यह छात्रा अब एबीवीपी के सदस्यों के खिलाफ किसी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगी. मतलब यह कि गुरमेहर के साथ बदतमीजी करने की धमकी दे कर उसे डराया गया और एबीवीपी के खिलाफ अभियान में शामिल न होने के लिए दबाव डाला गया. किसी मसले पर लोगों में मतभेद हो सकता है, पर जिस तरह रामजस कालेज की घटना पर कुछ लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उसे किसी भी रूप में लोकतांत्रिक नहीं कह सकते. इस के बाद देशभर के विद्यार्थियों में रोष है.

एबीवीपी के छात्रों ने विरोध के लिए जिस तरह का हिंसक रास्ता चुना, उस की निंदा हो रही है. इसी क्रम में छात्रा गुरमेहर कौर ने फेसबुक पर एबीवीपी की निंदा की, जिसे ले कर निहायत अश्लील और धमकी भरे संदेश आने लगे. जब यह मामला गूंजने लगा तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा गया, ‘तानाशाही के खिलाफ हम अपने छात्रों के साथ हैं. गुस्से व असहिष्णुता में उठी हर आवाज के लिए एक गुरमेहर कौर होगी.’

उल्लेखनीय है कि गुरमेहर ने प्रतिक्रिया में कहा कि उसे खुद को देशभक्त साबित करने के लिए प्रमाण की जरूरत नहीं, क्योंकि उस के पिता देश की रक्षा करते हुए मारे गए. अब इस मामले ने पूरी तरह से राजनीतिक मोड़ ले लिया है. इस मुद्दे पर भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने ट्विटर पर गुरमेहर और दाऊद की तसवीर पोस्ट करते हुए लिखा कि दाऊद ने अपने राष्ट्रविरोधी रवैए को सही ठहराने के लिए अपने पिता के नाम का इस्तेमाल नहीं किया.

तसवीर में गुरमेहर की तख्ती पर लिखे ‘पाकिस्तान ने नहीं, मेरे पिता को जंग ने मारा’ के जवाब में दाऊद के हाथ में थमाई तख्ती में लिखा, ‘मैं ने 1993 में लोगों को नहीं मारा, बमों ने मारा.’ क्रिकेटर विरेंद्र सहवाग ने ट्विटर पर हाथ में तख्ती लिए एक तसवीर पोस्ट की है, जिस पर लिखा था, मैं ने 2 तिहरे शतक नहीं बनाए, मेरे बैट ने बनाए. सहवाग के ट्वीट का अभिनेता रणदीप हुड्डा ने समर्थन किया.

जब आरोपप्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ तो कांग्रेसी विचारधारा के तहसीन पूनावाला ने सहवाग और हुड्डा के ट्वीट पर जम कर फटकार लगाई. तहसीन ने कहा कि ये सैलिब्रिटी एक लड़की की मर्यादा को नहीं समझ पा रहे हैं. यह राष्ट्रहित में नहीं है. इतना ही नहीं, रौबर्ट वाड्रा ने भी गुरमेहर कौर के साहस की तारीफ की. दिल्ली कांग्रेस आईटी सैल के संयोजक विशाल कुंद्रा ने राहुल गांधी के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए पूछा है, ‘आखिर गुरमेहर का गुनाह क्या है?’

दरअसल, रामजस कालेज में कथित तौर पर एबीवीपी छात्रों की हिंसा के बाद कैंपेन के लिए कौर ने एक तख्ती पकड़ी हुई तसवीर फेसबुक पर प्रोफाइल फोटो के तौर पर लगाई है. तख्ती पर लिखा है, मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ती हूं. मैं एबीवीपी से नहीं डरती. हैशटैग स्टूडैंट्स अगेंस्ट एबीवीपी.

ये सबकुछ जिस भाषा में और जिस तरीके से हो रहा है, वह किसी जिम्मेदार समाज की निशानी नहीं है. पिछले कुछ वर्षों से छात्र राजनीति मुख्यधारा की राजनीति से संचालितपोषित होती आ रही है. परिणामस्वरूप कैंपस में वैचारिक असहिष्णुता का माहौल है. यही वजह है कि छात्र राजनीति में स्वस्थ परंपरा के विकास पर कम ध्यान दिया जा रहा है. मगर जब भी विद्यार्थियों में हिंसक भिड़ंत होती है तो मुख्यधारा के राजनीतिक दल अपने छात्र संगठनों के बचाव में उतर आते हैं.

पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह देशभक्ति के नाम पर एबीवीपी उग्र तेवर अख्तियार कर रही है और उस के बचाव में अलोकतांत्रिक ढंग से भाजपा और उस के समर्थक बयान दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ. गुरमेहर के विरोध पर समाज, राजनीति खेल और सिनेमा के कुछ लोगों के मैदान में उतरने और भाषा की शालीनता का खयाल न रखने के मामले की हकीकत पर परदा नहीं डाला जा सकता, बेशक लोकतांत्रिक मर्यादा भंग हो रही है. शील, मर्यादा और अनुशासन का घोष करने वाली एबीवीपी ने परिसर में अभिव्यक्ति की आजादी को जगह न देते हुए हिंसक बरताव किया, उस पर कोई बात करने के बजाय उस का विरोध करने वाली छात्रा पर अश्लील टिप्पणियां करना कहां की नैतिकता है?                   

जब प्रेमिका हो बलात्कार की शिकार

फिल्म ‘काबिल’ में सुप्रिया यानी गौतम जब बलात्कार का शिकार होती है तब रोहन यानी रितिक रोशन फटाफट उसे पुलिस स्टेशन व जांच के लिए हौस्पिटल ले जाता है ताकि सुप्रिया के गुनहगारों को सजा मिल सके. लेकिन पुलिस के अजीबोगरीब सवालों से वह इतना परेशान हो जाता है कि सुप्रिया की शारीरिक व मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दे पाता. वह सुप्रिया को संभालने के बजाय उस से बात ही नहीं करता. वह यह सोच सोच कर खुद को दोषी मानने लगता है कि वह इस काबिल भी नहीं है कि सुप्रिया की रक्षा कर पाए?

रोहन को इस तरह शांत देख कर सुप्रिया को लगने लगता है कि रेप की घटना की वजह से रोहन उस के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जिस का परिणाम यह होता है कि सुप्रिया रोहन मेरे कारण और परेशान न हो इसीलिए वह आत्महत्या कर लेती है. यह तो कहानी है फिल्म की, लेकिन वास्तविक जीवन में भी जब प्रेमिका बलात्कार की शिकार होती है तो रिश्ते में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं. कुछ प्रेमी सोचते हैं काश, मैं ने उसे अकेला न छोड़ा होता, काश, मैं ने डिं्रक करने से मना किया होता, मैं उस के साथ होता तो ऐसा कभी नहीं होता और खुद को दोषी मानने लगते हैं. कुछ प्रेमी प्रेमिका को इस का दोषी मान कर ब्रेकअप तक कर लेते हैं, जबकि यह समय ऐसा होता है जिस में पार्टनर को एकदूसरे के साथ की जरूरत होती है इस गम से बाहर निकालने में.

प्रेमिका बलात्कार की शिकार हो तो क्या करें

–       मोरली सपोर्ट करें :  इस वक्त प्यार व सपोर्ट की खास जरूरत होती है, इस से लगता है कि कोई है जिस के साथ जिंदगी गुजारी जा सकती है, क्योंकि इस तरह की घटना के बाद लड़की को ऐसा लगने लगता है कि कोई उस के साथ नहीं रहेगा. अब वह किसी काबिल नहीं है और वह खुद को दोषी मानने लगती है. इसलिए जब भी आप की प्रेमिका ऐसा कुछ कहे तो कुछ सकारात्मक बातें कहें ताकि उस का मनोबल बढ़े. इस वक्त परिवार को भी काफी सपोर्ट की जरूरत होती है, उन का भी साथ दें. जब जांचपड़ताल के मामले में उन्हें कहीं जाना हो तो साथ जाएं ताकि उन का हौसला बरकरार रहे.

–       हर गम की दवा प्यार :  गम कितना भी गहरा क्यों न हो, लेकिन प्यार से निभाया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता, इसलिए प्यार से इस स्थिति से प्रेमिका को बाहर निकालें. ऐसा भी हो सकता है कि प्रेमिका के घर वाले उस का साथ न दें उसे भलाबुरा सुनाएं, लेकिन यह आप की जिम्मेदारी है कि आप उस के परिवार वालों को समझाएं कि इस में किसी का दोष नहीं है. उन की बेटी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया कि आप उस के साथ ऐसा व्यवहार करें बल्कि आप अपनी बेटी का साथ दें, ताकि वह इस गम से बाहर निकल सके.

–       स्मार्ट माइंड से लें स्मार्ट ऐक्शन : जब आप की प्रेमिका के साथ रेप हो रहा है तब आप हाथ पर हाथ रखे न बैठे रहें बल्कि स्मार्ट माइंड से स्मार्ट ऐक्शन लें. जैसे तुरंत पुलिस को कौल करें, फोन से पुलिस की गाड़ी का हौर्न बजाएं, वीडियो बना लें ताकि अपराधियों के खिलाफ सुबूत मिल सके.

–       प्रीकौशन पिल्स दें : रेप हो गया है अब क्या करें, कितनी बदनामी होगी, ऐसी बातें ही न सोचते रहें बल्कि थोड़ा स्मार्ट बनें ताकि आप की प्रेमिका के साथ और बड़ा हादसा न हो. इसलिए प्रेमिका को प्रीकौशन पिल्स दें ताकि गर्भ न ठहरे, क्योंकि पता चला आप दोनों रेप के गम में डूबे रहें और कोई बड़ा हादसा हो जाए.

–       दोषी को मीडिया से करें हाईलाइट :  खुद से हीरो बनने की कोशिश न करें बल्कि दोषी को हाईलाइट करने के लिए मीडिया का सहारा लें. अगर मीडिया मामले को उजागर करता है तो पुलिस भी तुरंत ऐक्शन लेती है. आप चाहें तो किसी एनजीओ की मदद भी ले सकते हैं. ऐसे कई एनजीओ हैं जो इस तरह के मामलों में सहायता करते हैं.

–       गम से उभरने का वक्त दें :  ऐसी उम्मीद न कर बैठ जाएं कि कुछ दिन बाद वह नौर्मल हो जाएगी. अगर वह नौर्मल नहीं होती तो आप उसे डांटने न लगें कि क्या ड्रामा कर रखा है, इतने दिन से समझा रहा हूं, लेकिन तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है, बल्कि उसे इस गम से उभरने का वक्त दें. बारबार न कहते रहें कि जो हुआ भूल जाओ, ऐसा कर के आप उसे और गम में धकेलते हैं.

–       काउंसलिंग न करें मिस : इस दौरान मैंटल और इमोशनल कई तरह की समस्याएं होती हैं. इन्हें काउंसलिंग द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है. काउंसलिंग से न केवल गम से उभरने में मदद मिलती है बल्कि जीने की एक नई राह भी मिलती है, इसलिए काउंसलिंग कभी मिस न करें. संभव हो तो आप भी साथ जाएं ताकि ऐसा न लगे कि आप जबरन भेज रहे हैं.

–       दूसरों के लिए मिसाल बनें : ऐसा न करें कि दब्बू बन कर चुपचाप बैठ जाएं और प्रेमिका को भी भूल जाने को कहें बल्कि इस के खिलाफ कठोर कदम उठाएं ताकि आप को देख कर बाकी युवाओं को हिम्मत व प्रेरणा मिले.

क्या न करें

–       रिश्ता तोड़ने की गलती न करें : आप की प्रेमिका का बलात्कार हुआ है, आप उस के साथ रहेंगे तो लोग आप के बारे में भी तरहतरह की बातें करेंगे, ऐसी बातें सोचसोच कर रिश्ता तोड़ने की गलती न करें. जरा सोचिए, अगर आप की बहन का बलात्कार हुआ होता, तो क्या आप अपनी बहन से रिश्ता तोड़ लेते नहीं न? तो फिर इस रिश्ते में ऐसा क्यों? इसलिए रिश्ता तोड़ने के बजाय अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं और पार्टनर का साथ दें.

–       प्रेमिका को दोषी न मानें : इस हादसे के लिए कभी भी अपनी प्रेमिका को दोष न दें कि रात में बाहर घूमने व छोटे कपड़े पहनने की वजह से ऐसा हुआ है बल्कि उस पर विश्वास करें, उस की बातें सुनें. हो सकता है आप की प्रेमिका उस वक्त कुछ अजीब तरह की बातें करे, लेकिन आप उन बातों पर गुस्सा करने के बजाय सुनें और प्यार से समझाएं कि इस में उस की कोई गलती नहीं है.

–       मरजी के बिना न करें सैक्स : यह ठीक है कि आप अपना प्यार प्रदर्शित करने के लिए प्रेमिका के करीब जाना चाहते हैं ताकि उसे इस बात का एहसास करा सकें कि वह आप के लिए अब भी वैसी ही है जैसी पहले थी, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि वह इस घटना से इतनी डिस्टर्ब हो कि आप की इस भावना को समझ ही न पाए और आप पर गुस्सा करने लगे, जोरजोर से चिल्लाने लगे कि आप उस का रेप कर रहे हैं. इसलिए कभी भी खुद से सैक्स का प्रयास न करें. अगर प्रेमिका सहमति से संबंध बनाना चाहती है तो उस का साथ दें, मना न करें. आप के ऐसा करने से प्रेमिका को लग सकता है कि उस का रेप हुआ है. इसलिए आप मना कर रहे हैं.

कभी ऐसा भी हो सकता है कि वह खुद पहल कर संबंध बनाए, लेकिन बाद में सारा दोष आप पर डाल दे और चिल्लाने लगे. ऐसी स्थिति के लिए भी खुद को तैयार रखें. ऐसा न करें कि आप भी उलटा चिल्लाने लगें कि तुम ही आई थी संबंध बनाने, मैं तो नहीं चाहता था, बल्कि धैर्य से काम लें.

गलत कदम न उठाएं और न उठाने दें : कई बार युवा जोशजोश में ऐसे कदम उठा लेते हैं जिस का खमियाजा बाद में भुगतना पड़ता है इसलिए न तो आप गलत कदम उठाएं और न ही प्रेमिका को उठाने दें.                                      

बीमारियों की आड़ में लूट का खेल

उस का असली नाम नीना नहीं, अंजलि कपलिश था. पढ़लिख कर वह विवाह के लायक हुई तो 24 फरवरी, 1996 को सामाजिक रीतिरिवाज से उस का विवाह कैमिकल इंजीनियर मंगतराम शर्मा से कर दिया गया था. मंगतराम एक निजी संस्था में बढि़या नौकरी करते थे. उन के घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी. उन्होंने अंजलि को न केवल हर सुखसुविधा के साथ भरपूर प्यार दिया था, उस का नाम भी बदल कर नीना रख दिया था. समय अपनी गति से गुजरता रहा और इस बीच नीना एक बेटे और एक बेटी की मां बन गई थी.

बीए एवं एमलिब (मास्टर औफ लाइब्रेरी साइंस) की डिग्रियां हासिल करने वाली नीना शादी के पहले रोपड़ के एक स्कूल में नौकरी करती थी. शादी के बाद भी वह 2 सालों तक नौकरी करती रही. लेकिन बाद में पति ने उसे घर संभालने की सलाह देते हुए नौकरी करने को मना कर दिया.

नीना नौकरी नहीं छोड़ना चाहती थी, पर पति की वजह से उसे नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा. पति से इस फैसले के बारे में वह ज्यादा कुछ कह तो नहीं सकी, पर अच्छीभली नौकरी छोड़ने का उसे काफी अफसोस था. पति का यह फैसला उसे सही नहीं लगा.

वजहें कुछ भी रही हों, शादी के 6 साल बाद उन के वैवाहिक रिश्ते में खटास पैदा होने लगी. इस का नतीजा यह निकला कि सन 2004 में नीना ने पति से तलाक ले लिया. नीना के इस फैसले से मंगतराम काफी आहत हुए. कुछ समय बाद वह इंडिया छोड़ कर आस्ट्रेलिया चले गए.

नीना के मायके वाले भी तलाक के लिए नीना को ही दोषी मान रहे थे, इसलिए उन्होंने भी उस से नाता तोड़ लिया. नीना अब बेसहारा हो चुकी थी. ऐसी हालत में उस ने हिम्मत से काम लिया. किसी की परवाह न कर के उस ने आने वाली संभावित स्थितियों से मुकाबला करने के लिए कमर कस ली.

रोपड़ के दशमेशनगर में किराए का मकान ले कर वह अपने दोनों बच्चों के साथ रहने लगी और फिर से नौकरी हासिल करने की कोशिश करने लगी. पर काफी मेहनत के बाद भी नौकरी हाथ नहीं लगी. इस के बाद उस ने घर से ही ट्रेडिंग का काम करना शुरू कर दिया. थोक में दालें वगैरह खरीद कर लाती और उन के एक किलोग्राम और आधा किलोग्राम के पैकेट तैयार कर के वह उन्हें राशन की दुकानों पर सप्लाई करने लगी.

देखने में काम छोटा था, मगर अच्छा चल निकला. पैसों के लिए नीना अब किसी की मोहताज नहीं रही. इस के बावजूद ज्यादा कमाई वाला काम करने की उथलपुथल उसे बेचैन किए रहती थी. उसी बीच वह कई बीमारियों की चपेट में आ गई, जिन में हाई ब्लडपै्रशर, गौलब्लैडर में ट्यूमर व ब्लडकैंसर सरीखी बीमारियां थीं. वह अपनी इन बीमारियों का लगातार इलाज करवा रही थी.

दुख और बीमारी में जो काम दवा नहीं कर पाती, वह किसी अपने की प्यारभरी हमदर्दी और मीठे बोल कर जाते हैं. नीना भी इसी तरह के प्यार और हमदर्दी को तरस रही थी. इस दुख को वह अपने बच्चों से भी साझा नहीं करती थी. ऐसे में उसे यह बात बारबार कचोटती थी कि मंगतराम को तलाक दे कर उस ने भारी भूल की थी. उसे यह भी भरोसा था कि अगर वह मंगतराम के पास जा कर अपनी गलती मान ले तो वह निश्चित ही उसे माफ कर के फिर से अपना लेगा.

आखिर नीना आस्ट्रेलिया जाने की तैयारी करने लगी. पासपोर्ट उस के पास था ही. वह वीजा हासिल करने की कोशिश में लग गई, पर लाख कोशिशों के बावजूद भी उसे वीजा नहीं मिल सका. ट्रैवल एजेंटों ने उसे खासा परेशान किया. उस का वक्त तो बरबाद हुआ ही, वे लोग उस से पैसा भी खूब वसूलते रहे. यानी वह ठगी गई.

मंगतराम से समझौता करने नीना आस्ट्रेलिया तो नहीं जा पाई, अलबत्ता इन कोशिशों का एक फायदा उसे यह हुआ कि वह ट्रैवल एजेंटों द्वारा झांसा दे कर ठगी करने के कई गुर सीख गई. लिहाजा उस ने खुद भी यही सब कर के पैसा कमाने का निश्चय किया. उस की तमन्ना बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर लेने का था.

पूरी योजना बना कर नीना ने एक मैटर तैयार किया. ‘आप स्टूडेंट हो, घरपरिवार वाली औरत हो, पढ़ेलिखे हो या फिर मामूली पढ़ाईलिखाई व सीमित अनुभव के साथ छोटीमोटी नौकरी करने को मजबूर हो. विदेशों में मोटी तनख्वाह वाली एक से एक बढि़या नौकरी आप के इंतजार में है. दिशानिर्देशन व वर्क परमिट के लिए संपर्क करें.’

इस के नीचे अपने घर का पता देते हुए नीना ने कई अखबारों में विज्ञापन दे दिए. इस के बाद तो विदेश जाने के इच्छुक लोगों की नीना के यहां लाइनें लगनी शुरू हो गईं. वैसे भी विदेश जा कर पैसा कमाने का पंजाब में कुछ ज्यादा ही क्रेज है. नीना ने खुद को एक विदेशी कंसल्टैंट कंपनी की एजेंट बताया.

जो लोग उस के पास पूछताछ करने आते थे, वह उन्हें बताती कि जो लोग विदेश जाना चाहते हैं, उन का पहले रजिस्ट्रेशन होगा, उस के बाद विदेश से आ कर कंपनी के अधिकारी उन लोगों का इंटरव्यू लेंगे, जो लोग सफल होंगे, उन्हें पौने 2 लाख रुपए महीने की तनख्वाह पर रख लिया जाएगा. उस तनख्वाह से कंपनी 2 सालों तक हर महीने 50 हजार रुपए अपने पास कमीशन के रूप में रखेगी. 2 साल बाद यह समझौता खुद ब खुद खत्म हो जाएगा.

नीना ने यह भी बताया कि रजिस्टे्रशन फीस के रूप में हर आदमी को 25 हजार रुपए जमा करवाने होंगे. सिलैक्ट हुए उम्मीदवारों को वाजिब हवाई किराया व कुछ अन्य खर्चे भी देने होंगे. किसी वजह से जो लोग सिलेक्ट नहीं हो पाएंगे, उन्हें उन की रजिस्ट्रेशन फीस वापस कर दी जाएगी. बाद में नौकरियों की रिक्तियां निकलने पर फिर से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.

रजिस्ट्रेशन फीस 25 हजार तय करते समय नीना को लगा था कि उस ने जल्दबाजी में फीस शायद ज्यादा रख दी है. पर कमाल की बात यह हुई कि पहले ही झटके में 20 लोगों ने 25-25 हजार रुपए दे कर नीना की झोली में 5 लाख रुपए डाल दिए.

इस के बाद तो नीना के जैसे पंख निकल आए. चंडीगढ़ के सेक्टर-35 में उस ने इमीग्रेशन कंसल्टैंट्स का अपना शानदार औफिस खोल कर बडे़ पैमाने पर लोगों को ठगना शुरू कर दिया.

नीना को कमाई का यह नया तरीका सूझ गया था. वह भी मोटी कमाई का. उस की चिकनीचुपड़ी बातों में आ कर कई लोगों ने अपनी जमीनजायदाद तक गिरवी रख कर उसे मुंहमांगी रकम दे दी. पैसा देने वाले का मुंह बंद रहे, इस के लिए वह कभी मैडिकल का तो कभी कोई अन्य फार्म भरवा लेती.

देखतेदेखते नीना ने करीब 500 लोगों से 4 करोड़ रुपए की रकम इकट्ठी कर ली. इन लोगों का काम वह तभी करवा पाती, जब उस के हाथ में कुछ होता. उसे तो इस ठगी से अधिक से अधिक मोटी रकम बटोरनी थी. जिस रफ्तार से उस के पास पैसा आ रहा था, 4 करोड़ की रकम भी उसे छोटी लग रही थी.

उसे उम्मीद थी कि आने वाले कुछ समय में उस के पास इस से कई गुना ज्यादा रकम इकट्ठी हो जाएगी. तब वह यहां से इतनी दूर चली जाएगी कि कोई भी उसे ढूंढ नहीं पाएगा. मगर उसी बीच परिस्थिति बदल गई. फातियाबाद, हरियाणा के 2 भाई कुलविंदर सिंह और हरमिंदर सिंह भी आस्ट्रेलिया व कनाडा में नौकरी लगवाने के लिए नीना से मिले.

नीना ने इन दोनों भाइयों से मोटी रकम ऐंठ ली. काफी दिनों बाद भी जब इन का काम नहीं हुआ तो इन्होंने नीना के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत कर दी. चंडीगढ़ पुलिस ने काररवाई करते हुए 28 नवंबर, 2005 को नीना को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने नीना को कोर्ट में पेश कर के उस का 4 दिनों का पुलिस रिमांड लिया. पुलिस को पता चला कि वह पहले से ही गंभीर बीमारियों से ग्रस्त है. इस वजह से पूछताछ के वक्त उस से ज्यादा सख्ती नहीं की जा सकी. मनोवैज्ञानिक तरीके से की गई पूछताछ मे वह करोडों रुपयों की ठगी करने की बात तो कबूलती रही, पर उस ने पैसा कहां छिपा कर रखा है, यह नहीं बताया.

पुलिस ने उस के बैंक खातों व लौकरों की जांच की तो वहां कुछ हजार रुपए ही मिले. 4 दिनों के कस्टडी रिमांड की समाप्ति पर जब पुलिस नीना को अदालत में पेश करने ले जा रही थी, तभी ठगी का शिकार हुए लोगों  ने उस का रास्ता रोक लिया.

वह उस से अपने पैसों को मांग करने लगे. तब नीना ने उन से सपाट लहजे में कहा, ‘‘हां, मैं कसूरवार हूं, लेकिन मेरी भी अपनी मजबूरियां हैं, मैं गंभीर रूप से बीमार हूं, मुझे अपना इलाज करवाना है. इस के  अलावा मैं मानती हूं कि मैं ने आप लोगों से ठगी की है. मगर मैं यह पैसा लौटा नहीं सकती. आप लोगों से ज्यादा मुझे इस पैसे की जरूरत है. अदालत मुझे मेरे किए की सजा जरूर देगी. शायद मैं सजा भुगतते हुए जेल के भीतर मर ही जाऊं.’’

लेकिन वह न मरी और न ही जमानत पर छूटने के बाद उस ने ठगी का अपना कारोबार बंद किया. उस के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होते रहे, पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल भेजने के अलावा उस के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर अदालत में दाखिल करती रही.

16 दिसंबर, 2006 को नीना ने बलविंदर शर्मा नामक शख्स से दूसरा विवाह रचा लिया. उस के साथ मिल कर उस ने मोहाली में ‘एलीवेशन प्लेसमेंट सर्विस’ के नाम से अपना एक आलीशान औफिस खोला. इसी तरह के कई औफिस उस ने अलगअलग जगहों पर खोले और अपने धंधे को पहले की तरह ही अंजाम देती रही. उस के खिलाफ आपराधिक मामले भी लगातार दर्ज होते रहे. देखते ही देखते उस के ऊपर 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हो गए.

विभिन्न केसों में बारबार रिमांड पर ले कर पुलिस उस से सिवाय सौफ्ट इंटेरोगेशन के और कुछ नहीं कर सकती थी. और तो और पुलिस उस से ठगी की रकम का भी पता नहीं लगा पाई कि उस ने कहां छिपा रखी है. वह सीधे कह देती थी कि बीमारी पर खर्च कर दी है.

नीना के खिलाफ भले ही कितने ही केस क्यों न चल रहे थे, पर उन में से तमाम अधर में ही लटके थे. कुछ केसों में वह बरी भी हो गई थी. मैडिकल आधारों पर उसे अदालत से जल्दी जमानत मिल जाती थी. इसी बात का वह फायदा उठा रही थी. ठगे गए लोग तो पुलिस पर भी उस के साथ सांठगांठ का आरोप लगा रहे थे.

अभी हाल ही में नीना को उस के खिलाफ दर्ज एक मामले में पहली बार सजा हुई है. करीब 4 साल पहले हिमाचल प्रदेश के कस्बा बरनी निवासी अशोक कुमार की शिकायत पर नीना के खिलाफ भादंवि की धारा 406 एवं 420 का यह केस मोहाली के थाना मटौर में दर्ज हुआ था.

शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसे कनाडा भेजने के नाम पर नीना ने उस से 1 लाख 10 हजार रुपए ठगे थे. इस केस में मटोर थाना के थानाप्रभारी धर्मपाल ने नीना को गिरफ्तार कर के जेल भिजवाते हुए उस के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी.

सुनवाई करते हुए 16 दिसंबर, 2016 को मोहाली के विद्वान प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी हरप्रीत सिंह ने नीना को ठगी की कसूरवार मान कर 2 साल 10 महीने की कैद के अलावा 5 हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाई थी. जुरमाना अदा न करने पर उसे 6 महीनों की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.

सजा सुनने के बाद भी नीना मुसकुराती रही. फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कह कर उस ने पूरे आत्मविश्वास से कहा,  ‘कोई बात नहीं, मैं इस कदर गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हूं कि जल्दी ही मुझे जमानत मिल जाएगी.’?

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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