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ब्रावो के घर पहुंचे भारतीय खिलाड़ी और फिर..

वेस्टइंडीज की धरती पर बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं. तभी तो जब भी टीम इंडिया वहां खेलने उतरती है, तो स्टेडियम में विंडीज से ज्यादा भारतीय फैन नजर आते हैं. वैसे विंडीज के निवासी ही नहीं बल्कि वहां के खिलाड़ियों का भी भारत से खासा लगाव रहा है.

विंडीज टीम से बाहर चल रहे ड्वेन ब्रावो तो भारत में न केवल अपने खेल बल्कि गायन कला के चलते भी काफी पॉपुलर हैं और उनके भारतीय कप्तान विराट कोहली, एमएस धोनी सहित कई भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे रिश्ते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने विराट-धोनी पर गीत भी लिखा है.

भारत और वेस्टइंडीज के दूसरे वनडे में भारत ने वेस्टइंडीज को 105 रनों से हरा दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैदान के बाहर दोनों टीम के क्रिकेटर्स के साथ अच्छी बॉन्डिंग है. तभी तो विराट कोहली, शिखर धवन और अजिंक्य रहाणे स्टार खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो के घर डिनर करने पहुंच गए. जिसकी तस्वीर शिखर धवन ने ट्वीटर पर शेयर की है.

इस तस्वीर में कोहली, रहाणे और शिखर, ड्वेन के घर पर बैठे हैं. ड्वेन ने भी दो तस्वीर शेयर की हैं, लेकिन उसमें उनके साथ महेंद्र सिंह धोनी अपनी बेटी जीवा के साथ और ब्रावो अपनी मां के साथ नजर आ रहे हैं.

वहीं दूसरी तस्वीर भुवनेश्वर कुमार के साथ शेयर करते हुए ब्रावो ने लिखा, आईपीएल के इतिहास के ऐसे दो खिलाड़ी जिन्होंने 2 बार पर्पल कैप जीती है.

अब क्रेडिट कार्ड से ये ट्रांजैक्शन नहीं कर सकते आप

क्रेडिट कार्ड से खरीददारी पर आपको नगद और डेबिट कार्ड से कहीं ज्‍यादा सुविधाएं मिल जाती हैं. छोटी-छोटी खरीददारी का पैसा चुकाने में तो आपको 50 से 60 दिन का. समय मिल ही जाता है साथ ही साथ आसान ईएमआई के ऑप्‍शन भी मिल जाते हैं. लेकिन, कई खरीददारी ऐसी भी हैं जो आप अपने क्रेडिट कार्ड से नहीं कर सकते हैं. और कहीं अगर आपने ऐसा करने का प्रयास किया तो आपको बैंक द्वारा डीबार्ड भी किया जा सकता है. ऐसी ही कुछ प्रमुख खरीददारियों से रोकने के लिए इन दिनों बैंक अपने कस्‍टमर्स को अलर्ट भी भेज रहे हैं.

लॉटरी टिकट

भारतीय स्‍टेट बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आप अपने क्रेडिट कार्ड से लॉटरी के टिकट नहीं खरीद सकते हैं. यह नियम खासतौर पर विदेशी लॉटरी के लिए लागू होते हैं. यदि आपने ऐसा किया तो सारी जिम्‍मेदारी आपकी होगी और इसके लिए बैंक आपको डिबार्ड भी कर सकता है.

कॉल बैक सर्विसेज

बैंकों के क्रेडिट कार्ड से आप कॉल बैक सर्विस का पेमेंट भी नहीं कर सकते हैं. एसबीआई की ओर से हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइनंस का हवाला देते हुए इस सर्विस के पेमेंट को भी क्रेडिट कार्ड से नहीं किया जा सकता है.

गैंम्‍बलिंग का नहीं चुका सकते पैसा

क्रेडिट कार्ड से आप बेटिंग नहीं लगा सकते हैं. किसी भी रजिस्‍टर्ड और गैर रजिस्‍टर्ड बेटिंग, गैंबलिंग व स्‍वीपस्‍टॉक का पेमेंट नहीं कर सकते हैं. ऐसा करने पर भी आपको बैंक से डिबार्ड किया जा सकता है.

बैन्‍ड मैगजीन

क्रेडिट कार्ड से आप कुछ खास मैगजीन भी नहीं खरीद सकते हैं. ये वो मैगजींस हैं जिनके पब्लिकेशन को बैन कर दिया गया है. या फिर बैन्‍ड कंटेंट की मैगजीन हों. इस तरह की मैगजीन की खरीददारी के बाद भी आपको डिबार्ड किया जा सकता है.

एसबीआई से मिली जानकारी के अनुसार इन सभी ट्रांजैक्‍शन के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन हैं. Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) अंतर्गत यह नियम लागू होते हैं. इनके तहत इस तरह की ट्रांजैक्‍शन के लिए कार्ड होल्‍डर की जिम्‍मेदारी होगी. इसके लिए कार्ड होल्‍डर को बैंक द्वारा डिबार्ड भी किया जा सकता है.

जब एक ही ओवर में दो गेंदबाजों ने की गेंदबाजी

भारत और वेस्टइंडीज के बीच हुए दूसरे वनडे मैच में भारत ने 105 रनों से विशाल जीत दर्ज की. मुकाबले के दौरान भारतीय पारी का अंतिम ओवर तो ऐसा रहा कि वेस्टइंडीज के कप्तान जेसन होल्डर को शर्मिंदा होना पड़ा. ये ऐसा पल था, जिसे वो कभी भूल भी नहीं सकतें.

बारिश की वजह से मैच 43-43 ओवर का कर दिया गया था. भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी और शीर्ष तीन धुरंधरों, अजिंक्य रहाणे (103), विराट कोहली (87) और शिखर धवन (63) के दम पर 42 ओवर में स्कोर 288 रन तक पहुंच चुका था.

अब कुल एक ओवर बाकी था. अंतिम ओवर की जिम्मेदारी खुद वेस्टइंडीज के कप्तान जेसन होल्डर ने ली. लेकिन इस ओवर ने मेजबान कप्तान को शर्म से लाल कर दिया.

होल्डर ने इस ओवर में तीन नो बॉल फेंकी जिसमें से दो गेंदें बल्लेबाज की कमर से ऊपर थीं. जैसे ही उन्होंने ओवर की अंतिम गेंद केदार जाधव के कंधे से ऊपर फेंकी, तुरंत नियमों को देखते हुए उन्हें गेंदबाजी से हटा लिया गया. ओवर की अंतिम गेंद जोनाथन कार्टर ने फेंकी और पारी को पूरा किया. यही नहीं, इस अंतिम ओवर में भारत ने 22 रन जड़ डाले.

ये है जेसन होल्डर के अंतिम ओवर का पूरा हाल.

पहली गेंद

ऑफ साइ़ड के बाहर यॉर्कर गेंद, धोनी ने पीछे कट करते हुए एक रन लिया.

दूसरी गेंद

इस बार होल्डर ने ऊंची फुल टॉस गेंद फेंकी जिस पर केदार जाधव ने बैकवर्ड पोइंट दिशा में शानदार चौका जड़ दिया. होल्डर बाल-बाल बचे क्योंकि ये गेंद नो-बॉल करार दी जा सकती थी.

तीसरी गेंद (नो बॉल)

इस बार होल्डर का कदम क्रीज से काफी बाहर जाकर पड़ा. अंपायर ने तुरंत फैसला दिया और इस बीच जाधव ने एक रन लिया. कुल दो रन आए.

तीसरी गेंद

ऑफ स्टंप से बाहर की इस गेंद को धोनी ने लॉन्ग ऑन दिशा में जड़कर एक रन लिया.

चौथी गेंद

एक बार फिर ऑफ स्टंप से बाहर की गेंद, एक्स्ट्रा कवर की ओर खेलकर जाधव ने एक रन लिया.

पांचवीं गेंद (नो बॉल)

होल्डर ने फिर गलती की. इस बार गेंद ऊंची फुल टॉस. अंपायर ने नो-बॉल का इशारा दिया. धोनी ने बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर किसी तरह शॉट खेलकर एक रन लिया. कुल दो रन आए.

पांचवीं गेंद

इस बार धोनी ने ऑफ साइड की गेंद को लॉन्ग ऑफ दिशा में खेलकर एक रन लिया.

छठी गेंद (नो बॉल)

इस बार तो होल्डर ने हद ही कर दी. गेंद हवा में लहराती हुई सीधे जाधव के कंधे से ऊपर. उधर, अंपायर ने तुरंत नो बॉल का इशारा दिया तो दूसरी तरफ जाधव ने मौके का फायदा उठाते हुए थर्ड मैन दिशा में चौका जड़ा दिया. तीन नो बॉल होने की वजह से होल्डर को गेंदबाजी से हटा लिया गया. और अंतिम गेंद जॉनाथन कार्टर ने फेंका.

छठी गेंद

कार्टर ने नो बॉल तो नहीं की लेकिन फुल टॉस जरूर फेंक दी. इस पर जाधव ने डीप स्क्वायर लेग पर शॉट खेलकर दो रन लिए. ओवर में कुल 22 रन आए. भारत का स्कोर 310 रन तक जा पहुंचा.

क्या है नियम

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) द्वारा अक्टूबर 2012 में नो बॉल के नियमों में संशोधन किया गया था. पहले वनडे और टी20 क्रिकेट में गेंदबाज को एक बाउंसर की इजाजत थी जबकि टेस्ट मैच में गेंदबाज एक ओवर में दो बाउंसर कर सकता था. लेकिन अक्टूबर 2012 के बाद इसे हर प्रारूप में दो गेंदों तक सीमित कर दिया गया.

अगर गेंदबाज एक ओवर में दो बाउंसर फेंकता है तो उसे अंपायर द्वारा चेतावनी दी जाती है और तीसरी बार ऐसा करने पर गेंदबाज को हटा लिया जाता है. इसके साथ ये भी बताते चलें कि जरूरी नहीं कि ये गेंदें किसी एक ही बल्लेबाज को फेंकी गई हों.

नियमों के मुताबिक बाउंस के बाद बल्लेबाज के कंधे से ऊपर की गई कोई भी गेंद बाउंसर कही जाती है. अगर ये गेंद बल्लेबाज के सिर के ऊपर रही और बल्लेबाज ने गेंद को नहीं खेला तो ये वाइड करार दी जाती है.

हालांकि बाउंसर के नियम फॉर्मेट के हिसाब से अलग-अलग हैं और मैदान पर अंपायरों को भी उनके फैसलों की छूट होती है. अगर कोई गेंद फुल टॉस है और बल्लेबाज की कमर से ऊपर रही तो इसे भी नो बॉल माना जाता है.

बागवानी का है शौक तो मोबाइल मे जरूर रखें ये ऐप्स

बागवानी कई लोगों का पसंदीदा काम है. कुछ लोगों को फल और सब्जियों की बागवानी करना पसंद है और कुछ लोगों को फूल और छोटे पौधों की बागवानी पसंद हैं. इसमें कई चीजें हैं जिसमें आपको टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है. बागवानी उनमें से एक है. जाहिर है कि, आपका स्मार्टफोन आपके लिए बागवानी या खेती नहीं कर सकता. इसके लिए काफी मेहनात करनी होती है. लेकिन प्ले स्टोर में कुछ ऐसे ऐप्स हैं जो आपको बागवानी करने में मदद कर सकते हैं. ऐसे कुछ ऐप्स जो एंड्रॉयड यूजर की उनके पसंदीदा काम बागवानी में काफी मदद कर सकते हैं.

एग्रोबेश (Agrobase)

एग्रोबेश नाम की एक गार्डनिंग ऐप गूगल प्ले स्टोर में मौजूद है. इसका उपयोग कृषि के लिए किया जाता है. माली इस ऐप की मदद से आसानी से कीट या ऐसी चीजों का पता लगा सकते हैं. यह एक फ्री ऐप है जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.

अमेजन किनडल (Amazon Kindle)

अमेजन किनडल में आपको गार्डनिंग से जुड़ी कई नई चीजें जानने को मिलेंगी. इसमें आपको गार्डनिंग से जुड़ी कई किताबें और रेफरेंस गाइड भी मिलेंगी. इसके अलावा इसमें आपको बहुत कुछ सीखने जैसे-पौधों की देखभाल, प्रत्येक पौधे की विशिष्ट आवश्यकताओं, बग प्रजातियां, चीजों को देखने के लिए और भी बहुत कुछ सिखने को मिलेंगा. यह एक फ्री ऐप है जिसे आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.

गूगल सर्च (Google Search)

गूगल की आधिकारिक ऐप बहुत उपयोगी है. इसके जरिये आप बागवानी के कई टिप्स को खोज सकते हैं. आप गूगल असिस्टेंट की भी मदद ले सकते हैं, जो आपको पौधों में पानी और खाद डालने के लिए रिमाइंडर देता रहेगा.

DIY गार्डनिंग (DIY Gardning)

इस ऐप की खासियत यह है कि आप इसकी मदद से गार्डनिंग की ऐसी टिप्स जान सकते हैं, जो आपके काम की हों. यदि आप पहली बार गार्डनिंग कर रहे हैं तो भी यहां वो सभी जानकारियां मौजूद हैं, जो आपकी मदद करेंगी. ऐप में वेजिटेबल, फ्रूट या हर्ब गार्डन की टिप्स अलग-अलग दी गई हैं. यहां बताया गया है कि किस तरह से छोटे गार्डन में सर्दी के मौसम में बीज बोए जा सकते हैं.

बिगनर्स गार्डनिंग गाइड (Beginners gardening guide)

यदि आप गार्डनिंग के बारे में कुछ नहीं जानते हैं और पहली बार अपने बगीचे में गार्डनिंग करने की सोच रहे हैं तो यह ऐप आपके काम आ सकता है. इसके अलावा इसमें वीडियो लिंक्स भी मौजूद हैं जो आपको किसी भी चीज को करने का सही तरीका सिखाती हैं.

कैसे कम करें होम लोन पर ईएमआई का बोझ

भारतीय बैंक ने हाल ही में नीतिगत दरों में भले ही कोई बड़ा बदलाव न किया हो, लेकिन सस्ते होम लोन से लेकर होम लोन ट्रांसफर कराने तक की खास सुविधाओं के लिए बैंकों की ओर से की जाने वाली तमाम फोन कॉल्स आपके पास भी आती होंगी.

लोन देने के दौरान बैंकों का रवैया भले ही ठीक रहता हो लेकिन लोन की ईएमआई शुरू होने के बाद ग्राहक बैंकों के रवैए से परेशान होने लग जाते हैं. बैंक दरें एवं शुल्क बढ़ा देना इसकी प्रमुख वजह हो सकता है. ऐसे में होम लोन को पोर्ट कराना आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है. हम यहां आपको होन लोन पोर्टेबिलिटी के बारे में ही बताने जा रहे हैं, जिससे आप अपनी ईएमआई का बोझ भी कर कर सकते हैं.

होम लोन को पोर्ट करना है काफी आसान –

होम लोन पोर्ट करवाना कभी कभी फायदेमंद भी रहता है क्योंकि ऐसा करने होम लोन की ईएमआई का बोझ कम होने की संभावना बढ़ जाती है. यह बैंकों की अलग-अलग ब्याज दरों और अन्य सहूलियतों के कारण होता है. होम लोन को एक बैंक से दूसरे बैंक में शिफ्ट करवाने यानी पोर्ट करवाने की प्रक्रिया काफी आसान कर दी गई है.

ये है प्रक्रिया :  लोन शिफ्ट करवाने के लिए सबसे पहले आपको उस बैंक में आवेदन करना होगा जहां से आपने लोन ले रखा है. आवेदन करने के बाद बैंक आपको एनओसी (NOC) और एक स्टेटमेंट इश्यू करेगा. इस स्टेटमेंट में आपके ऊपर लोन की बकाया राशि का विवरण होगा. फिर आप जिस बैंक में लोन ट्रांसफर करवा रहे हैं उस बैंक में एनओसी जमा करेंगे. इसके बाद वह बैंक लोन की राशि पुराने बैंक को ट्रांसफर करेगा और पुराने बैंक में आपका एकाउंट क्लोज कर दिया जाएगा. इसके साथ ही आपका उस बैंक में दिया हुआ पोस्टज डेटेड चेक/ईसीएस रद्द हो जाएगा.

ऐसे में लोन शिफ्ट न करें : होम लोन को एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट कराने से पहले आपको उस बैंक की ब्याज दर को भी परखना चाहिए जिसमें आप अपना लोन पोर्ट करवाने जा रहे हैं.संबंधित बैंक व उसके ऑफर्स से जुड़ी जानकारी बैंक की वेबसाइट से ली जा सकती है. अगर ब्याज दरों में ज्यादा अंतर न हो और सेविंग्स भी कम हो तो बेहतर है कि लोन शिफ्ट न करें. ऐसा इसलिए कि दोनों बैंकों की ब्याज दरों मे ज्यादा खास अंतर न होने पर प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज मिलाकर इससे ज्यादा का खर्चा हो जाता है.

लोन ट्रांसफर की गणना करें : लोन शिफ्ट कराने से पहले यह जरूर जान लें कि आपको कितना लोन शिफ्ट करवाना ह. यानी आपको टोटल आउट फ्लो की गणना करनी होगी. टोटल आउट फ्लो यानी आप जब लोन किसी अन्य बैंक में शिफ्ट करेंगे तो उस बैंक में कुल कितना भुगतान करना होगा. लोन शिफ्ट करते वक्त कुल अमाउंट का भुगतान करना होता है. इससे आप यह पता लगा सकते हैं कि आपको कितनी राशि की बचत होगी.

लोन ट्रांसफर से पहले चार्ज के बारे में मालूम करें : लोन शिफ्टिंग से पहले प्रोसेसिंग फीस व अन्य चार्ज के बारे में पता लगाना फायदेमंद रहता है. इसमें आप प्रोसेसिंग फीस, स्टैंप फीस, लीगल चार्ज, वैल्युएशन फीस आदि के बारे में पता लगा सकते हैं. अधिकांश बैंक सिर्फ प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं और उसी के तहत अन्य चार्जों को शामिल करते हैं.

लोन शिफ्टिंग में पेनाल्टी : लोन शिफ्टिंग से पहले आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि लोन शिफ्ट करने से पहले बैंक ग्राहकों से पेनल्टी भी मांगते हैं. यानी आप लोन की अवधि पूरा होने से पहले लोन शिफ्ट करवाते हैं तो बैंक आपसे बैंक फ्री पेमेंट पेनल्टी चार्ज वसूल कर सकते हैं. यह चार्ज लोन राशि का 2 फीसद तक हो सकता है.

तो बिल्कुल भी शिफ्ट न करें लोन : आपने अपने मौजूदा बैंक को लोन की आधे से ज्यादा राशि चुका दी है तो लोन को शिफ्ट करवाना बेहतर फैसला नहीं होता है. केवल उस स्थिति में आपको लोन शिफ्ट करना चाहिए जब लोन का कार्यकाल लंबा हो और लोन अमाउंट 60से 70 फीसद तक देना बाकी हो. वहीं अगर लोन अमाउंट 20 से 25 फीसद बचा हो तो लोन शिफ्ट न करें.

केवल 2 मिनट में ठीक करें अपना खराब मैमोरी कार्ड

कई बार ऐसा होता है कि आपके मेमोरी कार्ड से आपका सारा डाटा डिलीट हो गया हो. उन डिलीट हुए डाटा को रिकवर करना भी मुश्किल होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके मेमोरी से कैसे डाटा डिलीट होता है?

आपको बता दें कि, ऐसा आपके फोन में वायरस आने की वजह से होता है. मेमोरी कार्ड के खराब होने या करप्ट होने की मुख्य वजह एंड्रायड मोबाइल में वायरस आने के लिए होता है. ऐसे में आज हम आपको बाताएंगे कि आप अपने मेमोरी कार्ड को कैसे ठीक करें.

मेमोरी कार्ड को कंप्यूटर से करें कनेक्ट :

1. इसके लिए आपको सबसे पहले अपने मेमोरी कार्ड को कार्ड रीडर में लगाए. इसके बाद मेमोरी कार्ड को अपने कंप्यूटर से कनेक्ट करें.

2. मेमोरी कार्ड को कंप्यूटर से कनेक्ट करने के बाद, ड्राइव जांच करें जो आपके मेमोरी कार्ड की लोकेशन दिखा रही है.

3. लोकेशन पाकर अब मेमोरी कार्ड में राइट क्लिक करें और प्रॉपर्टीज ऑप्शन में जाएं. अब आपको फॉरमेट ऑप्शन नजर आएगा. इस पर क्लिक कर दें.

4. इसके बाद फॉरमेट ऑप्शन पार क्लिक करने के बाद एक पॉपअप बॉक्स सामने आएगा, जो फाइल सिस्टम फैट नाम से होगा.

5. इतना होने के बाद यहां स्टार्ट बटन पर क्लिक करें, लेकिन यह ध्यान रहें कि क्विक फॉरमेट ऑप्शन को चेक न करें. उसे खाली ही छोड़ दें.

6. इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब आपका मेमोरी कार्ड चेक करें कि वो काम कर रहा है या नहीं. इस पूरे प्रोसेस के बाद आपका मेमोरी कार्ड ठीक हो जाएगा.

इसके अलावा आप एक और तरीके से अपने मेमोरी कार्ड को ठीक कर सकते हैं.

1. मेमोरी कार्ड को कंप्यूटर में कनेक्ट कर के Ctrl+R प्रेस कर RUN कमांड को ओपन करें.

2. इसके बाद इसमें CMD टाइप कर एंटर करें. अब अपने मेमोरी कार्ड का नाम उसमे डालें, जैसे की अगर ड्राइव का नाम L: है तो L: टाइप जाकर एंटर करें.

3. इसके बाद Format L: टाइप कर एंटर करें.

4. इसके प्रक्रिया की बाद आपको एक कन्फर्मेशन के लिए मेसेज आएगा. अब इसमें Yes के लिए Y या No के लिए N दबाएं.

5. अब Y पर क्लिक करने के बाद फाइल फॉर्मेट होना शुरू हो जाएगा. अब आपका मेमोरी कार्ड सही हो जाएगा.

फिल्म ‘‘मॉम’’ में नवाजुद्दीन की अनूठी है संवाद अदायगी

नवाजुद्दीन सिद्दिकी अपने करियर में बहुत ही कम समय में रिपोर्टर, गैंगस्टर, हत्यारा, गाव वाला, मजदूर जैसे कई किरदार निभाते हुए कई तरह की जिंदगी जी चुके हैं. वह बॉलीवुड के एकमात्र ऐसे कलाकार हैं, जिनके काम करने का अंदाज बहुत जुदा है. वह इन दिनों श्रीदेवी के करियर की 300 वीं फिल्म में दयाशंकर कपूर का किरदार निभाकर जोश में हैं. इस फिल्म में उनका किरदार ही नही बल्कि संवाद अदायगी का लहजा भी बहुत अनूठा है. फिल्म के दो टीजर आ चुके हैं, जिसमें वह अनूठे अंदाज में कहते हैं- ‘‘मेरा नाम दयाशंकर कपूर है, पर यूं कैन कॉल मी “डी के.”

फिल्म का लुक तो निर्देशक रवि उध्यावर ने तय किया था, लेकिन संवाद अदायगी का लहजा पूरी तरह से नवाजुद्दीन सिद्दिकी के अपने दिमाग की उपज है. इस अंदाज को कहां से प्रेरित होकर उन्होंने गढ़ा, इस बारे में ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिब बात करते हुए नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने बताया-

‘‘इस किरदार के मैनेरिजम को चुनने का भी मजेदार किस्सा है. निर्देशक रवि उध्यावर ने हमारा लुक तो तय कर दिया था. हम शूटिंग के लिए दिल्ली भी पहुंच चुके थे. पर ऐसा कुछ नही सोचा था कि हम इसे किस तरह से निभाएंगे. पहले दिन शूटिंग के लिए हम वैनिटी वैन में बैठे हुए थे. दो घंटे की मशक्कत के बाद मेकअप हो गया था. यह प्रोस्थेटिक मेकअप नहीं है, बल्कि विग है. जब मैं अकेला वैनिटी वैन में बैठा हुआ था, तो मेरे दिमाग में कुछ लोगों के चेहरे घूमने लगे. मैं अपने संवादों को उन इंसानों की तर्ज पर बोलकर देखने लगा कि क्या ज्यादा ठीक रहेगा. अचानक मेरे दिमाग में अभिनेता पियूष मिश्रा आए.

उनके बोलने का अंदाज बहुत अलग है. फिर हबीब तनवीर का भी अंदाज याद आया. मैंने हबीब तनवीर और पियूष मिश्रा इन दोनों के बात करने का जो टोन है, उसके बीच का टोन मैंने दयाशंकर कपूर के किरदार को दिया. मुझे लगा कि मेरी शारीरिक बनावट पर यही टोन ज्यादा अच्छी लग रही है. यह बात मैंने आज तक आपके अलावा किसी अन्य को नहीं बतायी.’’

दयाशंकर के किरदार के लुक के लिए विग लगाने में दो से ढाई घंटे लगने की वजह पर रोशनी डालते हुए नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने कहा-

‘‘अब पहले वाला जमाना नहीं रहा. सब कुछ मॉडर्न हो गया है. आजकल हर चीज में प्रयोग हो रहे हैं. पहले दो ढाई घंटे के बाद विग नजर आने लगती थी. माथे पर विग का जाल दिखने लगता था. आजकल जो जाल आता है, वह भी स्विटजरलैंड व अन्य देशों से आता है. जो कि बहुत सटीक होता है. इसके चलते हम पूरा दिन विग लगाकर रखते हैं, गर्मी हो या ठंडी, पता ही नहीं चलता कि विग है या मौलिक बाल हैं. इस फिल्म के लिए गेटअप में आने के लिए विग लगाते समय पहले मेरे बालों को पीछे करके बैठाया जाता था. उसके ऊपर कैप बैठायी जाती थी. उसके उपर विग लगायी जाती थी. बहुत बारीकी से काम होता था. इसलिए हर दिन दो से ढाई घंटे विग लगाने और उतना ही समय विग निकालते समय लगते थे. विग निकालने से पहले एक खास तरह के सोल्यूशन का उपयोग किया जाता है.’’

लीग मैच में 10 विकेट ले इस खिलाड़ी ने रचा इतिहास

कर्नाटक के बगलकोट में खेले गए एक लीग क्रिकेट मैच में वरुण सोरगांवी ने इतिहास रचा दिया है. वरुण ने यहां खेले गए एक मैच में विपक्षी टीम के सभी 10 विकेट झटक कर उसे 70 रन के साधारण स्कोर पर ऑल आउट कर दिया. कर्नाटक स्टेट क्रिकेट असोसिएशन के थर्ड डिविजन का यह लीग क्रिकेट मैच लॉयड फाउंडेशन और गुलेडागुड्डा टीम के बीच खेला गया.

लॉयड फाउंडेशन की ओर से मीडियम पेसर वरुण ने सभी 10 विकेट लेकर सनसनी मचा दी. इस मध्यम तेज गति के गेंदबाज ने अपनी 10 विकेटों में से 5 बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड, 2 को एलबीडब्लू आउट किया, तो वहीं बाकी के तीन बल्लेबाजों को कैच आउट कराया. इस तरह वरुण की इस घातक गेंदबाजी की बदौलत विपक्षी टीम महज 15 ओवर में 70 रन के साधारण स्कोर पर ऑल आउट हो गई.

गुलेडागुड्डा की पारी में केवल एक ही बल्लेबाज ऐसा था, जिसने दहाई का अंक छुआ. आकाश नाम के इस बल्लेबाज ने अपनी टीम की ओर से 30 रन का सर्वाधिक योगदान दिया.

इस मैच में वरुण का कारनामा यहीं नहीं थमा. 70 रन के स्कोर का पीछा करने उतरी लॉयड टीम के लिए वरुण ने बल्ले से भी शानदार योगदान दिया. उन्होंने मात्र 30 बॉल में तेजतर्रार 58 रन भी ठोक दिए. उनकी 58 रन की इस पारी में 10 चौके और 1 छक्का शामिल था. वरुण की मैच विनिंग परफॉर्मेंस की बदौलत लॉयड की टीम ने यह मैच 9 ओवर में 8 विकेट से अपने नाम कर लिया. इस शानदार प्रदर्शन के लिए वरुण को मैन ऑफ द मैच चुना गया.

मैं 19 साल की हूं. मेरे पति रोज सहवास करते हैं. मैं जानना चाहती हूं कि मेरे पति सैक्स ऐडिक्ट तो नहीं हैं.

सवाल

मैं 19 वर्षीय विवाहिता हूं. मेरे विवाह को साल भर होने वाला है. मेरे पति रोज सहवास करते हैं. मैं जानना चाहती हूं कि मेरे पति सैक्स ऐडिक्ट तो नहीं हैं? कहीं इस से हमें कोई स्वास्थ्य संबंधी हानि जैसे कमजोरी वगैरह तो नहीं हो जाएगी?

जवाब

आप की शादी को अभी साल भर हुआ है और बच्चे की जिम्मेदारी भी नहीं है, इसलिए यदि आप के पति सहवास में रुचि लेते हैं तो इस में कोई बुराई नहीं है. उन के बारे में किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न पालें.

रोज शारीरिक संबंध से स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है वरन कई माने में तो सहवास मानसिक रूप से भी फिट रखता है. अत: आप बेफिक्र हो कर शारीरिक सुख का आनंद उठाएं. 

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.    

क्रेडिट कार्ड EMI या पर्सनल लोन, क्या है बेहतर

अगर आपको अपने घर का रेनोवेशन करवाना है, मतलब घर का कुछ फर्नीचर बदलवाना है या घर के पुराने हो चुके इलेक्ट्रॉनिक आइट्म्स को बदलकर नए लगवाने हैं तो आपके पास दो विकल्प होते है. पहला यह कि आप अपने क्रेडिट कार्ड से इसका भुगतान कर खर्च की गई राशि की ईएमआई बनवा लें या फिर आप पर्सनल लोन लेकर इसे खर्च कर दें. आपके लिए इन दोनों विकल्पों में से कौन सा ज्यादा बेहतर है.

पर्सनल लोन (Personal Loan)

पर्सनल लोन आमतौर पर एक तरह का असुरक्षित ऋण माना जाता है, जिसमें चिकित्सा कारणों को लेकर होने वाले खर्चों से लेकर लेकर अवकाश (वैकेशन) के दौरान की जाने वाली महंगी खरीद शामिल होती है. पर्सनल लोन पर वसूली जाने वाली ब्याज की दर भी काफी ऊंची होती है क्योंकि इसे जोखिम वाला लोन भी कहा जाता है.

क्रेडिट कार्ड लोन

क्रेडिट कार्ड पर लिया जाने वाला लोन एक पहले से ही मंजूर लोन होता है, जिसमें किसी भी प्रकार के दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं होती है. यह क्रेडिट हासिल करने का सबसे तेज स्रोत होता है. इस प्रकार लोन में, आपकी क्रेडिट कार्ड सीमा का एक निश्चित हिस्सा जो अनुपयुक्त है, उसे लोन (ऋण) के रूप में दिया जाता है.

क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन

पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन ये दोनों एक से ही जान पड़ते हैं लेकिन मूलभूत रुप से दोनों एक नहीं होते हैं.

दस्तावेजीकरण(Documentation)

पर्सनल लोन के लिए आपको कुछ दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं ताकि कुछ दिन बाद प्रक्रिया के तहत आपके लोन को मंजूरी दी जा सके. जबकि क्रेडिट कार्ड की ओर से मिलने वाले लोन में किसी भी कागजी कार्यवाही की जरूरत नहीं होती है. यह क्रेडिट प्राप्त करने का तेज माध्यम है.

ब्याज(Interest)

यह सबसे प्रमुख पहलू होता है जिसके बार में हमें लोन लेने से पहले जरूर सोचना चाहिए. आमतौर पर पर्सनल लोन 13 से 22 फीसद ब्याज पर दिया जाता है, जबकि क्रेडिट कार्ड लोन 10 से 18 फीसद ब्याज पर दिया जाता है.

हालांकि एक अन्य अहम कारक यह है कि क्रेडिट कार्ड लोन का फायदा फ्लैट इंटरेस्ट रेट (ब्याज दर तय होती है) पर लिया जाता है, जबकि पर्सनल लोन में कम होती लोन राशि के साथ ब्याज दर कम होती रहती है. पर्सनल लोन का फायदा उठाने के लिए आपका संबंधित बैंक में खाता होना जरूरी है, जबकि क्रेडिट कार्ड से लोन लेने की स्थिति में आपका बैंक कस्टमर होना जरूरी नहीं है.

अनसिक्योर्ड लोन

हालांकि ये दोनों ही तरह के लोन अनसिक्योर्ड होते हैं.

टेन्योर

क्रेडिट कार्ड लोन छोटी अवधि के लिए लिया जा सकता है, जबकि पर्सनल लोन आमतौर पर लंबी अवधि के लिए लिया जाने वाला लोन होता है.

लोन की राशि

क्रेडिट कार्ड से लोन लेना उस वक्त मुफीद होता है जब आपको एक छोटी अवधि के लिए छोटी राशि का लोन लेना होता है. जबकि पर्सनल लोन का फायदा एक बड़ी राशि लेने के लिए किया जाता है.

लब्बोलुआब

ऊपर दिए गए तमाम मानकों पर परखने के बाद आप इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि आपके लिए क्रेडिट कार्ड से लोन (ईएमआई) लेना बेहतर रहेगा या फिर पर्सनल लोन लेना. अगर आप अपनी जरूरतों को लेकर क्लियर हैं तो आप सही नतीजे पर पहुंच सकते हैं.

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