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मैं हर फिल्म में नई प्रतिभा को अवसर देता हूं : सब्बीर खान

‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ जैसी सफल एक्शन फिल्में निर्देशित करने के बाद अब सब्बीर खान म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म ‘‘मुन्ना माइकल’’ लेकर आए हैं. जिसमें टाइगर श्राफ व नवाजुद्दीन सिद्दिकी जैसे कलाकारों के साथ नवोदित अभिनेत्री निधि अग्रवाल ने अभिनय किया है. अभिनेता टाइगर श्राफ के साथ सब्बीर खान की यह लगातार तीसरी फिल्म है. इतना ही नही इस फिल्म के शुरू  होने पर सब्बीर खान की पिछली फिल्म ‘‘बागी’’ की ही भांति इस फिल्म को लेकर भी कुछ विवाद हुए थे.

क्या वजह है कि आपकी फिल्मों के साथ विवाद जरुर उठते हैं?

एक ही वाक्य में कहना चाहूंगा कि विवाद उठे, लेकिन हाईकोर्ट ने हमें सही साबित किया. वास्तव में हमारे यहां एक चलन सा बन गया है कि दूसरी फिल्मों के खिलाफ अदालत में मुकदमा करो. कुछ दिन पहले ‘राब्टा’ के खिलाफ ‘मगधीरा’ वालों ने अदालत में गुहार लगायी, फिर खुद ही अपनी शिकायत वापस भी ले ली.

सवाल यह है कि आखिर इस तरह की चीजें क्यों हो रही हैं?

यह एक ट्रेंड है. लोग कुछ समय के लिए इसी बहाने शोहरत पाना चाहते हैं. फिल्म इंडस्ट्री में कुछ लोग गंभीरता से अपना काम कर रहे हैं, तो कुछ लोग इस ढंग का काम कर रहे हैं. अब इससे उन्हें क्या हासिल होता है, मुझे नहीं पता. मुझे लगता है कि हर क्षेत्र में, चाहे वह क्रिकेट हो या फिल्म हो, कुछ लोग दिन रात काम कर रहे हैं. जो लोग काम नहीं कर रहें हैं, वह इस ढंग की हरकतें कर रहे हैं.

इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी को जोड़ने की वजह क्या रही?

कई बार हम फिल्मकार कुछ ऐेसे किरदार लिख जाते हैं, जो कि कलाकार को उनके कम्फर्ट जोन से बाहर निकालते हैं. जब हम यह फिल्म लिख रहे थे, तो महेंद्र फौजी के किरदार में हमें नवाजुद्दीन दिख रहे थे. पटकथा खत्म होते होते मुझे यकीन हो गया था कि यह किरदार नवाजुद्दीन के लिए कमाल का होगा. मैंने सोचा था कि इस किरदार को सुनते ही नवाजुद्दीन खुश हो जाएंगे या कहेंगे कि पागल हो गया है, मैं यह किरदार नहीं करुंगा. मैंने उनको कहानी सुनायी. कहानी खत्म होने से पहले ही उन्होंने खड़े होकर कहा कि, ‘बाकी बातचीत बाद में कर लेंगे, पर मैं महेंद्र का किरदार निभाना चाहता हूं.’ तो मेरी सोच बहुत सही थी. उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने अब तक इस तरह का कोई किरदार नहीं निभाया है. महेंद्र फौजी गैंगस्टर है, जिसने अपनी जिंदगी में कभी डांस नहीं किया, पर वह किसी वजह से डांस सीखना चाहते हैं और अंत में सीख भी लेते हैं.

हम अपनी इस माध्यम से एक संदेश देना चाहते हैं कि डांस एक ऐसी कला है, जिसे उम्र के किसी भी पड़ाव पर सीखा जा सकता है. मान लीजिए, हम आफिस में काम कर रहे हैं और हमें संगीत या डांस का शौक है, तो हम शर्म क्यों करें? हर इंसान को अपनी खुशी के लिए इस तरह के शौक पूरे करने चाहिए.

हीरोइन के तौर पर दिशा पटनी सहित कई हीरोइनों के नाम चर्चा में थे. पर अंत में आपने नई लड़की निधि अग्रवाल को चुना?

देखिए, सबसे बड़ा सच यह है कि मुझे अपनी इस फिल्म के लिए एक नई हीरोइन चाहिए थी. मैंने अब तक अपनी हर फिल्म में नए कलाकार या नए तकनीशियन को पहली बार काम करने का मौका दिया है. क्योंकि मैं यह कभी नहीं भूलता कि मुझे भी किसी ने पहली बार काम करने का मौका दिया था. अब हीरो तय था, इसलिए हमें नई प्रतिभाशाली अभिनेत्री चाहिए थी. आडीशन करते करते हमने निधि अग्रवाल को चुना. मैंने किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में सोचा ही नहीं था. मुझे नहीं पता कि दिशा पटनी या किसी अन्य का नाम कैसे चला. पर मैं देख रहा हूं कि जिस फिल्म में टाइगर श्राफ अभिनय करने वाले होते हैं, उस फिल्म के साथ सबसे पहले दिशा पटनी का नाम आ जाता है. अब यह कौन करवाता है, मुझे नहीं पता.

निधि और टाइगर श्राफ के किरदारों को लेकर क्या कहेंगे?

निधि अग्रवाल ने डाली का किरदार निभाया है, जो कि छोटे शहर की लड़की है. बचपन से ही डांस करती आयी है. उसकी तमन्ना मशहूर डांसर बनने की है. इस बात से उसके माता पिता खुश नहीं है. क्योंकि यह एक मध्यमवर्गीय परिवार है. पिता कहीं नौकरी करते हैं. पर डाली अपने पिता को एक दिन गर्वांवित महसूस करवाने के मकसद से एक दिन घर छोड़ कर मुंबई पहुंच जाती है. जहां उसकी मुलाकात मुन्ना से होती है. मुन्ना के किरदार में टाइगर हैं. मुन्ना मुंबई के तीन बत्ती इलाके में रहने वाला स्ट्रीट स्मार्ट लड़का है. वह बहुत अच्छा डांसर है. लेकिन किन्ही तकलीफों की वजह से वह डांस नहीं करता. तो यह फिल्म उन दो लोगों के बारे में है, जिनमें से एक अपने सपने को पूरा करना चाहता है, दूसरा नहीं करना चाहता. इनके बीच में त्रिकोण हैं महेंद्र फौजी.

क्या टाइगर श्राफ के किरदार में कहीं जैकी श्राफ का अंश है?

ऐसा नहीं है. मुन्ना यानी कि यह एक टपोरी किस्म का लड़का. इस तरह के किरदार जैकी श्राफ, अनिल कपूर, आमिर खान सहित तमाम कलाकारों ने निभाया है. अब हमारी फिल्म की कहानी तीन बत्ती इलाके से शुरू होती है. तो कहीं न कहीं जैकी श्राफ की झलक आ सकती है. जैकी श्राफ कभी तीन बत्ती इलाके में रहते थे.

लगता है आपने टाइगर श्राफ के साथ जोड़ी बना ली है?

वह मेरे छोटे भाई जैसा है. जब हमने एक साथ पहली फिल्म ‘‘हीरोपंती’’ की थी, उस वक्त दूसरी फिल्म करने की हमारी कोई योजना नहीं थी. यह फिल्म लोगों को पसंद आयी और हिट हो गयी. तो लोगों ने चाहा कि हम दूसरी फिल्म एक साथ करें, इसलिए हमने ‘बागी’ की. यह भी पसंद कर ली गयी. तो अब लोगों की इच्छा का सम्मान करते हुए हमने तीसरी फिल्म ‘‘मुन्ना माइकल’’ की है. सच यह है कि ‘बागी’ के बाद मैं छुट्टी मनाने जा रहा था. तभी टाइगर श्राफ का फोन आया कि आपने ‘हीरोपंती’ के समय एक कहानी सुनायी थी, तो क्यों न उस पर फिल्म बनाएं. मैंने उससे कहा कि मैं छुट्टी मनाने स्पेन जा रहा हूं और आइफा भी जाउंगा. वहां से वापस आने के बाद हम मिलेंगे, तब इस पर बात करेंगे. जब मैं वापस आया, तो टाइगर मेरे पास आए. बात करते करते फिल्म बन गयी. अब यह फिल्म प्रदर्शित हुई है. पर हमने अगली फिल्म की कोई योजना नहीं बनायी है.

‘‘बागी 2’’ के बनने की चर्चा हो रही है?

जी हां! ‘‘बागी 2’’ बन रही है. पर मैं उसे निर्देशित नहीं कर रहा. मैं ‘मुन्ना माइकल’ मे व्यस्त था, तो ‘बागी 2’ के लिए किसी अन्य को निर्देशक लिया है.

सिनेमा में आ रहे बदलाव को किस तरह से देखते हैं?

मेरी राय में हिंदी सिनेमा का यह स्वर्ण काल चल रहा है. इन दिनों खूबसूरत फिल्में बन रही हैं. एक तरफ ‘बाहुबली’ जैसी बड़े बजट की फिल्म सफलता पा रही है. तो दूसरी तरफ ‘पिंक’, ‘मसान’, ‘कपूर एंड संस’ जैसी फिल्में भी पसंद की जा रही हैं. आज वह दौर है, जहां यदि आप एक अच्छी कहानी सलीके से कहेंगे, तो वह जरूर पसंद की जाएगी.

हालीवुड जिस तरह से बालीवुड को टक्कर दे रहा है. उससे कैसे निपटेंगे?

हमारे पास एक ही रास्ता है कि हम हालीवुड से बेहतर फिल्में बनाएं. ‘बाहुबली’ को पूरे विश्व के लोगों ने सराहा.

वीना मलिक का एमएमएस हुआ लीक, करोड़ों लोगों ने देखा

पाकिस्तानी एक्ट्रेस वीना मलिक बौलीवुड में हाथ आजमाने के बाद अब एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल में बतौर एकंर काम कर रही हैं. वीना का नाता हमेशा कॉन्ट्रोर्वसियों से गहरा रहा है. कभी न्यूड फोटोशूट तो कभी गायब होने का नाटक और कभी टॉवल में इंटीमेट सीन. वीना हर वक्त गलत वजहों के कारण ही सुर्खियों में रहती हैं. साल 2013 में उनका एक एमएमएस सामने आया था जो एक बार फिर सोशल मीडिया पर लीक हो चुका है.

पाकिस्तानी ड्रामा क्वीन वीना मलिक का एमएमएस यूट्यूब पर एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस एमएमएस ने खूब धूम मचा रखी है. एक्स बिग बॉस कंटेस्टेंट वीना इस एमएमएस में बॉलीवुड एक्टर राजन वर्मा के साथ दिखाई दे रही है. 44 सेंकेड के इस वीडियो में राजन और वीना अश्लीलता की सारी हदें पार करते नजर आ रहे हैं.

रियलिटी शो के बाद उन्होंने बॉलीवुड में भी कमद रखा था, वीना ने  ‘जिंदगी 50-50’ और ‘मुंबई 125 KM’ जैसी फिल्मों में काम किया है. वीना उस वक्त सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने एक मैगजीन कवर के लिए न्यूड फोटो शूट भी करवाया था. इसके कारण वह विवादों में फंस गई थी जिससे उन्हें अपने ही देश पाकिस्तान में काफी जिल्लत का सामना करना पडा था क्योंकि उन्होंने अपने शोल्डर पर आईएसआई का टैटू बना रखा था.

साल 2013 वीना ने में दुबई के बिजनेसमैन असद खटक से शादी की थी. दोनों के दो बच्चे हैं. हालांकि पिछले दिनों ये खबर आई कि वीना ने अपने पति असद को तलाक दे दिया है. वीना ने अपने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था.

यहां देखें वीना का लीक्ड एमएमएस

रामगोपाल वर्मा की ये हौट शार्ट फिल्म आप अपनी बेटी को मत दिखाइयेगा

अपने विवादित बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहने वाले फिल्म डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा उर्फ रामू ने इस बार कुछ ऐसा कर दिया है कि आप खुद शर्मा जाये. सरकार-3 के फ्लॉप होने के बाद अब रामू एक वेब सीरीज लेकर आये हैं जिसे देखने के बाद आप बस ऐसा महसूस होगा की अब सब खत्म सा हो गया है, इसके बाद तो अब कुछ बचा ही नहीं देखने के लिए.

रामू ने यूट्यूब पर ‘मेरी बेटी सनी लियोन बनना चाहती है’ को पेश किया है. इसमें एक लड़की अपने मां-बाप से इस बात के लिए लड़ाई करती है कि उसे सनी लियोन जैसा बनना है.

इस 12 मिनट की वेब सीरिज में उन्होंने वो सब कुछ परोसने की कोशिश की है जो वो फिल्मो में नहीं परोस पाते हैं. यहां पर तो कोई सेंसर बोर्ड और न ही उसकी कैंची काम करती है. इसलिए रामू ने यूट्यूब का सहारा लिया और सब उगल दिया जो अभी तक वो फिल्मों में नहीं दे पाए थे.

इस फिल्म में एक लड़की अपने माता पिता से कहती नजर आ रही है कि वह सनी लियोनी की तरह बनना चाहती है. वह आजादी चाहती है, समाज की दकियानूसी सोच से. इसके साथ ही अगर आपको और संवाद जानने हैं, तो आपको पूरा वीडियो देखना होगा. फिल्म में नैना गांगुली मुख्य किरदार में हैं. इस किरदार में ढल कर उन्होंने साथ ही ये संदेश ​देने की कोशिश की है कि समाज कई बार अपनी हम पर मर्जी थोपने की कोशिश करता है, जो कि गलत है.

14 साल में एक्टिंग की शुरुआत करने वाले नसीरुद्दीन शाह की 5 बेहतरीन फिल्में

100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके नसीरुद्दीन शाह को कौन नहीं जानता. आज नसीरुद्दीन अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं. 1980 से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले नसीर की एक्टिंग का तो हर कोई मुरीद है. फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है.

नसीरुद्दीन शाह ने 14 साल की उम्र में ही अभिनय करना शुरू कर दिया था. वहीं सबसे पहले उन्होंने शेक्सपियर के नाटक में एक्टिंग की थी.

नसीरुद्दीन ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म ‘निशांत’ से की. यह एक आर्ट फिल्म थी जिसमें नसीरुद्दीन शाह के साथ स्मिता पाटिल और शबाना आजमी जैसी बड़ी अभिनेत्रियों ने काम किया.

यह फिल्म कमाई के हिसाब से तो पीछे रही पर फिल्म में नसीरुद्दीन शाह के अभिनय की सबने सराहना की. इसके बाद नसीरुद्दीन शाह ने आक्रोश, स्पर्श, मिर्च मसाला, अलबर्ट पिंटों को गुस्सा क्यों आता है, मंडी, मोहन जोशी हाज़िर हों, अर्द्ध सत्य, कथा आदि कई आर्ट फिल्में कीं.

आर्ट फिल्मों के साथ वह कॉमर्शियल फिल्मों में भी सक्रिय रहें. मासूम, कर्मा, इजाजत, जलवा, हीरो हीरालाल, गुलामी, त्रिदेव, विश्वात्मा, मोहरा, सरफ़रोश जैसी कॉमर्शियल फिल्में कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह सिर्फ आर्ट ही नहीं कॉमर्शियल फिल्में भी कर सकते हैं.

नसीरुद्दीन का नाम उन एक्टर्स की लिस्ट में शुमार है जिन्होंने एक्टिंग की परिभाषा को ही बदल दिया. वो दिखने में आम हैं लेकिन उनकी एक्टिंग के सामने बड़े से बड़ा एक्टर भी फेल हो जाता है.

उनकी कुछ खास फिल्मों को जरूर देखें.

ए वेडनेसडे (2008)

एक नए कांसेप्ट के साथ ये बेहद रोचक और कसी हुई फिल्म है. जिसे नीरज कुमार ने निर्देशित किया. इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह के कॉमन मैन के रोल को इस तरह जीवंत किया कि वो बरसों तक याद किया जाएगा.

सरफरोश (1999)

आमिर खान और नसीरुद्दीन शाह अभिनीत इस फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके डॉयलाग और मौसिकी को खास तौर पर याद किया जाएगा. इस फिल्म का यह सीन दर्शकों के जहन में घर कर गया.

जाने भी दो यारों (1983)

नसीरुद्दीन शाह के करियर के शुरुआती दिनों की यह फिल्म है. इस फिल्म ने सभी को हंसी से लोट-पोट कर दिया. साथ ही बॉलीवुड को एक नायाब कलाकार दिया. नसीरुद्दीन शाह ने करियर की शुरुआत में कला फिल्मों की ओर ज्यादा ध्यान दिया. लेकिन यह कॉमेडी फिल्म मील का पत्थर साबित हुई.

मासूम (1983)

नसीरुद्दीन शाह की ये फिल्म भावनाओं के समुंदर में आपको लेकर जाता है. फिल्म में कहानी है एक ऐसे शादीशुदा शख्स की जिसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है जब किसी और महिला से उसे एक बच्चा हो जाता है.

स्पर्श (1980)

इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने एक अंधे स्कूल प्रिंसिपल का किरदार निभाया था. सालों पुरानी फिल्म आज भी लोगों के दिल पर राज करती है.

पर्दे में छिपा यूपी विधानसभा का विस्फोटक

एक सप्ताह का समय बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश की विधानसभा में मिले विस्फोटक का राज पर्दे के बाहर नहीं आ पाया है. इससे समझा जा सकता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का क्या हाल है? ‘हाई सिक्योरिटी’ मामला होने के बाद भी जांच में यह पता पही चल पा रहा कि विस्फोटक किस तरह का है. जांच में एक दूसरे की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. विधानसभा के मार्शल से लेकर देश में आतंकवाद के खिलाफ गठित हुआ सबसे भरोसेमंद एटीएस तक इस मामले की जांच में लगा है. इसके बाद भी कोई परिणाम सामने नहीं आ पा रहा है. जिम्मेदार अधिकारियों के अलग अलग बयान संदेह को जन्म दे रहे हैं. जिससे अब यह सवाल उठने लगा है कि कहीं विस्फोटक को लेकर सुरक्षा दस्ता गलत बयानी तो नहीं कर बैठा?

विधानसभा में सुरक्षा के नाम पर बहुत सारे लोगों का प्रवेश अब बंद कर दिया गया है. इसका सबसे अधिक प्रभाव भाजपा के कार्यकर्ताओं पर ही पड़ा है. अब उसका प्रवेश बंद हो गया है. इससे पहले भाजपा कार्यकर्ता मंत्रियों के कमरों तक पहुंच जाते थे और यह देखते थे कि काम कैसे हो रहा है? मंत्रियों के द्वारा दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं के काम करने को लेकर पार्टी में शिकायत भी होती थी. अब ऐसे कार्यकर्ता विधानसभा में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं. तबादलों से लेकर सरकारी वकीलों की नियुक्ति तक के मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाये हैं.

कार्यकर्ताओं के विधानसभा में प्रवेश न पाने से मंत्रियों को राहत का अनुभव हो रहा है. सुरक्षा के नाम पर ऐसे बहुत सारे लोगों का प्रवेश मुश्किल हो गया है जो अंदर के हालात को देख समझ रहे थे. सचिवालय में भी हर जगह के लिये अलग पास की व्यवस्था हो गई है. ऐसे में बिना किसी बड़ी सिफारिश के अंदर जाना मुश्किल काम हो गया है. सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष के विधायकों को भी अब कार्यकर्ताओं से बचने का आसान रास्ता मिल गया है. सुरक्षा के नाम पर की जा रही सख्ती तो बन रही है पर सरकार को यह नहीं पता कि विधानसभा के अंदर मिला विस्फोटक क्या था? वह कितना खतरनाक था? उसको वहां लाने का उद्देशय क्या था? इस साजिश के पीछे कौन लोग है?

सरकार की यह लापरवाही पहली बार सामने नहीं आई है. इसके पहले लखनऊ में एक आतंकी के एनकांउटर को लेकर बहुत सारे सवाल उठ रहे हैं. उस घटना में आगे पुलिस ने क्या पता किया और कहां तक पहुंची इसका पता आज तक नहीं चला. अगर पुलिस ने उस घटना की विवेचना ठीक से की होती तो आतंकी विधानसभा तक विस्फोटक पहुंचाने में सफल नहीं होते. आज के युग में जहां हर तरह की जांच कम से कम समय में हासिल हो रही है वहां उत्तर प्रदेश की विधानसभा जैसी महत्वपूर्ण जगह पर मिले विस्फोटक की जांच में एक सप्ताह से अधिक का समय लगना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है. इस बात को भी बल मिलता है कि कहीं यह किसी शरारती तत्व के द्वारा किया गया काम तो नहीं है जिसमें पुलिस फंस गई और तिल का ताड बना बैठी?                 

सचिन को ये जिम्मेदारी देना चाहते हैं शास्त्री

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री अब सचिन तेंदुलकर को टीम इंडिया का सलाहकार बनाना चाहते हैं, बशर्ते यह हितों के टकराव का मामला न हो.

शास्त्री ने बीसीसीआई की स्पेशल मीटिंग में कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना, सीईओ राहुल जोहरी, कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी और प्रशासक कमिटी की सदस्य डायना एडुलजी के सामने अपनी यह इच्छा जाहिर की है.

तेंदुलकर क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी (सीएसी) के सदस्य हैं. इसी कमिटी ने शास्त्री को बतौर टीम इंडिया का मुख्य कोच चुना है. स्पेशल कमिटी ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय टीम के साथ किसी भी भूमिका में जुड़ने से पहले हितों के टकराव का कोई मामला नहीं होना चाहिए.

कमिटी के एक सदस्य ने पहचान सार्वजनिक न किए जाने की शर्त पर बताया, 'रवि ने सचिन को बहुत कम वक्त के लिए टीम का सलाहकार बनाए जाने का आइडिया दिया है. लेकिन कमिटी ने फौरन उन्हें हितों के टकराव की बात याद दिला दी.'

सदस्य ने कहा, 'अगर तेंदुलकर इस भूमिका को स्वीकार कर लेते हैं तो उन्हें आईपीएल सहित कई समितियों की सदस्यता छोड़नी होगी. और किसी को बहुत थोड़े वक्त के लिए साथ आने को कहना और इतनी सारी अन्य व्यावसायिक समितियों को छोड़ने को कहना, कुछ ज्यादा ही हो जाएगा.'

जहीर खान के साथ भी ऐसा ही कुछ मामला है. जहीर टीम के साथ साल में करीब 25 दिन ही रहना चाहते हैं. आईपीएल सहित उनकी कई अन्य प्रतिबद्धताएं हैं. सदस्य ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि साल में 25 दिन के अनुबंध के लिए आप अन्य प्रतिबद्धताओं को छोड़ना चाहेंगे.'

रवि शास्त्री के सपोर्ट स्टाफ की घोषणा कर दी गई लेकिन टीम के साथ जहीर और द्रविड़ की भूमिका लेकर अब भी स्पष्टता का अभाव है. द्रविड़ फिलहाल इंडिया ए और अंडर-19 टीम के कोच हैं.

अरुण भगत एक बार फिर टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच बन गए हैं इसलिए हितों के टकराव के चलते अब वह आईपीएल टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और टीएनपीएल की टीम वीवी तिरुवल्लुर वीर के कोच नहीं बने रह पाएंगे. सपोर्ट स्टाफ में सहायक कोच संजय बांगड़ और फील्डिंग कोच आर. श्रीधर 2019 वर्ल्ड कप तक टीम इंडिया के कोच बने रहेंगे.

मैं ने अपने पति के साथ बिना कंडोम के 5 मिनट तक हमबिस्तरी की थी. कहीं मैं पेट से तो नहीं हो गई हूं.

सवाल

मैं ने अपने पति के साथ बिना कंडोम के 5 मिनट तक हमबिस्तरी की थी. कहीं मैं पेट से तो नहीं हो गई हूं?

जवाब

आजकल दवाओं की दुकानों पर अच्छी कंपनियों के प्रेग्नेंसी चैक करने वाले किट मिलते हैं. आप उस किट के जरीए पता लगा सकती हैं कि आप पेट से हैं या नहीं.

VIDEO : नेल आर्ट डिजाइन – टील ब्लू नेल आर्ट

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

 

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नताशा सिंह की वापसी

‘देख भाई देख’, ‘सात फेरे’, ‘वह हुए न हमारे’ सहित कई सीरियलों में अभिनय कर चुकी अदाकारा नताशा सिंह काफी लंबे समय बाद निर्देशक पाणिनी पंडित की लघु फिल्म ‘इश्क का रॉक्स’ से वापसी कर रही हैं.

इस वापसी की चर्चा करते हुए नताशा सिंह ने कहा, ‘‘पाणिनी की मां और मेरी मां खास सहेली हैं. इसलिए हम बचपन से एक दूसरे को जानते हैं. एक दिन उसने मुझे बुलाया और कहा कि वह एक लघु फिल्म बनाने जा रहा है. क्या मैं उसमें अभिनय करना पसंद करुंगी. मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ. फिर मैंने उससे पटकथा सुनी. मुझे कहानी पसंद आयी. तो मैंने हामी भर दी. मैं आगे भी फिल्में करना चाहूंगी, बशर्ते कहानी व किरदार मुझे भा जाए.’’

विश्व कप सेमीफाइनल : क्या होगी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की स्ट्रैटजी

आईसीसी महिला विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल में 20 जुलाई को भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें आमने-सामने होंगी. इस सेमीफाइनल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम इतिहास रच सकती है.

बेशक आंकड़ों के लिहाज से भारत, ऑस्ट्रेलिया से काफी पीछे है, लेकिन इस बार विश्व कप के पहले मैच में इंग्लैंड और पिछले मैच में न्यूजीलैंड पर उलटफेर करने के बाद भारत ने अपने अंदर छिपी सम्भावनाओं को उजागर किया है.

अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम यह मैच अपने झोली में डाल सकती है. जानें आखिर क्या है ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया की स्ट्रैटजी.

इसलिए जीत सकती है टीम इंडिया

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच यह मुकाबला आज काउंटी ग्राउंड में खेला जाएगा. भारत ने 2009 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया को आक्रामक खेल की बदौलत उसे उसी के घर में दो बार हराया था. इस बार भारत के तरकश में कई तीर हैं. महाराष्ट्र के सांगली की रहने वाली स्मृति मंधाना भारत की पहली ट्रम्प कार्ड हैं.

क्या होगी स्ट्रैटजी

भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की धार एकता बिष्ट हैं. उनकी जगह शामिल राजेश्वरी गायकवाड़ भी पिछले मैच में कारगर रही थीं. कोच तुषार अरोठे रनों पर अंकुश लगाने के लिए लेग स्पिनर पूनम यादव के साथ बाएं हाथ की इन दोनों स्पिनरों को एक साथ उतार सकते हैं.

ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ की तीन खिलाड़ियों को ध्यान में रखते हुए टीम में दीप्ति शर्मा और हरमनप्रीत कौर के रूप में दो ऑफ स्पिनर हैं. विकेट के पीछे सुषमा वर्मा को पहले सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इंग्लैंड की विकेटकीपर सारा टेलर से सबक सीखने की जरूरत है. उनकी तेजतर्रार स्टम्पिंग से तृषा चेट्टी का स्टम्प होना मैच का बड़ा अंतर साबित हुआ था.

ये करना होगा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ

अगर टीम को लॉर्डस में फाइनल खेलना है तो इसके लिए उन्हें पिछले कुछ मैचों की अपनी फॉर्म से सबक सीखते हुए कम से कम पहले सात ओवर विकेट पर टिकना होगा, क्योंकि इतने ओवर टिकने के बाद उन्होंने बड़े-बड़े स्कोर बनाए हैं. पिछले साल हॉबर्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक भी इसका एक उदाहरण है.

शीर्ष बल्लेबाजों पर दारोमदार

भारत के पांच शीर्ष बल्लेबाजों को 40 ओवर तक टिकना होगा. मंधाना, पूनम राउत, मिताली राज, हरमनप्रीत और दीप्ति शर्मा को विकेट बचाने के साथ ही रन गति को भी बनाए रखना होगा. पिछले मैच में वेदा कृष्णामूर्ति ने अंत में अच्छी आक्रामक बल्लेबाजी करके भारत की सेमीफाइनल में पहुंचाने की राह तैयार की थी. वहीं मिताली ने अपने करियर के आखिरी एक हजार रन पिछले पांच हजार रनों की तुलना में सबसे तेज बनाए हैं.

भारत के लिए वरदान है काउंटी ग्राउंड

काउंटी ग्राउंड, भारत के लिए इस विश्व कप में अभी तक अच्छा साबित हुआ है. यहां भारत ने शुरुआती मैचों के बाद न्यूजीलैंड को 186 रन से हराकर किवी टीम के बढ़ते कदमों पर लगाम लगा दी थी. यह उस भारतीय टीम की शानदार वापसी थी जो पिछले विश्व कप में सातवें स्थान पर रही थी.

भारतीय टीम की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा को भरोसा है कि टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया को हरा सकती है. अंजुम का मानना है कि दोनों टीमों के मैच जीतने की संभावना 50-50 फीसदी है.

अंजुम ने कहा, “हां, मेरा मानना है कि भारत ऑस्ट्रेलिया को हरा सकता है. मुझे भरोसा है कि भारतीय टीम फाइनल में पहुंच सकती है.”

भारतीय कप्तान मिताली राज ने उम्मीद जताई कि उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया को हराने में जरूर कामयाब होगी. मिताली ने कहा, ‘‘हमने ग्रुप चरण के चार मैच इसी मैदान पर खेलें हैं, इसलिए हम हालात से वाकिफ हैं और ये हमारी टीम के लिए काफी अच्छा है.’’

आपको बता दें कि अब तक दोनों टीमों ने 42 मैच खेले हैं, जिसमें से ऑस्ट्रेलिया ने 34 और भारत ने सिर्फ आठ जीते हैं. भारत आज तक बस एक बार विश्व कप के फाइनल में पहुंचा है. दक्षिण अफ्रीका (2005) में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया से 98 रन से शिकस्त मिली थी.

सेमीफाइनल में खेलने वाली दोनों देशों की टीम.

भारत

मिताली राज (कप्तान ), एकता बिष्ट, राजेश्वरी गायकवाड़, झूलन गोस्वामी, मानसी जोशी, हरमनप्रीत कौर, वेदा कृष्णामूर्ति, स्मृति मंधाना, मोना मेशराम, शिखा पांडे, पूनम यादव, नुजहत परवीन, पूनम राउत, दीप्ति शर्मा, सुषमा वर्मा, स्मृति मंधाना

ऑस्ट्रेलिया

मेग लेनिंग (कप्तान), सारा एले, क्रिस्टीन बीम्स, एलेक्स ब्लैकवेल, निकोल बोल्टन, एशले गार्डनर, रशेल हेंस, एलिसा हीली, जेस जोनासेन, बेथ मूनी, एलिसे पेरी, मेगान शट, बेलिंडा वेकारेवा, एलिसे विलानी, अमांडा जेड वेलिंगटन

फैशन मेरे खून में था : लीना टिपनिस

फैशन डिजाइनर लीना टिपनिस ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि मन में लगन और जज्बा हो तो कोई भी राह मुश्किल नहीं. रिटेल के क्षेत्र में व्यवसाय की शुरुआत करने वाली लीना 5 साल तक काम करने के बाद मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उतरीं. उन के सेमी फौर्मल और फ्यूजन वाले परिधान देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी लोकप्रिय हुए. उन्होंने अपनी ब्रैंड ‘लिनारिका’ 1996 में खोली, जिस के 30 स्टोर्स देशविदेश में हैं. ‘लेस इज मोर’ इस कौंसैप्ट से प्रभावित हो कर बने उन के कपड़े अधिकतर शहरी महिलाओं के लिए होते हैं. अपनी पोशाकों में उन्होंने हमेशा नैचुरल फाइबर्स को अधिक महत्त्व दिया है. उन के पिता की इच्छा थी कि वे मैडिकल की पढ़ाई करें और डाक्टर बनें, लेकिन लीना का मन मैडिकल की पढ़ाई में नहीं लगा और उसे अधूरी छोड़ कर वे फैशन के क्षेत्र में उतर गईं.

उन्होंने किसी प्रकार की ट्रैनिंग नहीं ली है. सालों की मेहनत, लगन और लोगों का उन के ब्रैंड के प्रति प्यार ही उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है. उन से बात करना दिलचस्प था. पेश हैं, बातचीत के खास अंश:

फैशन के क्षेत्र में आने की प्रेरणा कैसे मिली?

फैशन मेरे खून में था. जब मैं 10वीं कक्षा में थी, तो मैं ने एक किताब के बीच में गारमैंट के कई ‘स्कैचैस’ बनाए थे. पिता ने जब देखा तो उन्होंने उसे उठा कर फेंक दिया. मुझे बहुत दुख हुआ, क्योंकि मैं ने बड़ी मेहनत से उसे बनाया था. वे चाहते थे कि मैं डाक्टर बनूं. मुझे मैडिकल कालेज में ऐडमिशन भी मिला, पर मैं वहां से पढ़ाई अधूरी छोड़ कर मुंबई आ गई. यहां मैं ने अपने एक दोस्त के लिए पोर्टफोलियो बनाने में हैल्प किया.

एक दिन मुंबई के पेढर रोड पर खड़ी हो कर गाड़ी की तलाश कर रही थी, तभी एक जानकार व्यक्ति ने प्राइवेट कार में मुझे और मेरे दोस्त को लिफ्ट दिया. उन्हें मेरी दोस्त के लिए किया गया मेरा काम बेहद पसंद आया और उन्होंने मुझे अपने औफिस में बुलाया. जब मैं वहां गई, तो उन्होंने मुझे उन के कंपनी की लैडीज विंग के गारमैंट का भार दिया, जो करीब बंद हो चुकी थी. मेरे काम से उन की कंपनी को एक बार फिर से आगे बढ़ने में मदद मिली. इस के बाद मैं मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उतर गई. यहीं से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैं आगे बढ़ती गई.

पिता का सपोर्ट कैसे और कब मिला?

जब पिता ने मेरे काम और पौपुलैरिटी को देखा तो उन्हें समझ में आ गया था कि मैं अच्छा काम कर रही हूं. चूंकि वे चैंबर्स औफ कौमर्स के अध्यक्ष थे, तो उन्होंने ट्रैड में काफी सहयोग किया. जिस से मेरी कंपनी को विदेशों में भी पहचान मिलने लगी. यूके, साउथ ईस्ट अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका आदि सभी देशों में मेरे डिजाइन किए कपड़े लोगों ने पसंद किए. इस के अलावा जब भी किसी सलाह की जरूरत पड़ती मैं अपने पिता से बातचीत करती थी.

आप की कपड़ों की खासीयत क्या है?

मैं केवल पोशाक ही डिजाइन नहीं करती. शुरूशुरू में मेरे कपड़े बड़ेबड़े ब्रैंड में जाते थे, लेकिन कपड़ों की पौपुलैरिटी को देख कर मैं ने अपनी कंपनी खोली. इस में मैं हमेशा कुछ नया देने की सोचती हूं. इंडोवैस्टर्न मेरा स्टाइल है. इस के अलावा मैं लुक को कस्टोमाइज कर व्यक्तित्व को विकसित कर स्टाइल देती हूं, जिस से व्यक्ति अच्छा दिखे.

आप के सामने तो चुनौतियां भी कम नहीं होती होंगी?

देखिए, चुनौती टाइम मैनेजमैंट की होती है. सैंपलिंग से ले कर प्रौडक्ट को बनाने तक पूरा बैकअप रखना काफी कठिन होता है. इस के अलावा कपड़ों की क्वालिटी को बनाए रखना, ग्राहकों को संतुष्ट करना आदि सब कुछ बहुत मुश्किल होता है. पहले मैं 13 से 14 घंटे काम करती थी, लेकिन अब 7 घंटे काफी होते हैं.

आप के कपड़े किनकिन सैलिब्रिटीज ने पहने हैं?

वैसे तो मैं किसी खास सैलिब्रिटीज के कपड़े डिजाइन नहीं करती, पर क्विन औफ जौर्डन ने मेरे कपड़े पहने हैं. इस के अलावा ‘आयशा’ फिल्म के लिए भी मैं ने कपड़े डिजाइन किए थे. सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने भी मेरे डिजाइन किए कपड़े पहने थे.

आप की नजर में सफलता क्या है?

शुरू से ले कर अब तक करीब 20 साल तक मेरी पूरी टीम मेरे साथ काम कर रही है और मैं इसे ही अपनी सफलता मानती हूं, क्योंकि उन का मेरे साथ काम करने की चाहत अभी तक बनी हुई है. यही मेरी उपलब्धि है.            

पिता के भरोसे पर खरी उतरी लीना

पिता सुरेश रावटे हमेशा अपनी बेटी को कुछ अलग और अच्छा करने की सलाह देते थे. वे महाराष्ट्र चैंबर्स औफ कौमर्स के अध्यक्ष थे और ट्रैड में होने की वजह से लीना को ट्रैड की सारी जानकारियां देते थे. पिता की वजह से ही लीना को कभी व्यवसाय में किसी मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा. लीना के पिता जानते थे कि लीना ने अगर मैडिकल की पढ़ाई छोड़ी है तो वह फैशन डिजाइनिंग में अच्छा ही करेगी, क्योंकि वह मेहनती है

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