रात को सोती महिलाओं की चोटियां किसी परलौकिकता के कारण काट लेने पर कुछ लिखना व कहना बेकार है. 21वीं सदी में भी यह देश उलटा जा रहा है और तर्क, वैज्ञानिकता, स्वाभाविकता, संभव के सत्य को गहरे गड्ढे में फेंक कर छद्म इतिहास, चमत्कारों, अंधविश्वासों, पूजापाठों, हवनों, दानपुण्य में भारी विश्वास कर रहा है.

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