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देवदूत बन जान भी बचाते हैं पंजाब के ये 400 टैक्सी वाले

पंजाब के ये 400 टैक्सी चालक यूं तो रोजी-रोटी के लिए टैक्सी चलाते हैं लेकिन जरूरतमंदों की मदद को तत्पर इनका जज्बा इन्हें औरों से कहीं बेहतर साबित करता है. अगर कोई किसी मुसीबत में है, अंधेरी रात में कहीं कोई हादसा हो गया है, मदद के लिए कोई नहीं है.. तो पंजाब टैक्सी यूनियन के वाट्सएप नंबर पर भेजा गया एक मैसेज जीवनदान दे सकता है. चंद मिनटों में ही यूनियन का कोई न कोई सदस्य देवदूत बन मदद को हाजिर हो जाएगा. घायल को अस्पताल पहुंचाने, खून मुहैया कराने के साथ ही ये अन्य मदद भी करते हैं.

पंजाब टैक्सी यूनियन के सदस्यों ने मोबाइल नंबर 78886-25800 पर वाट्सएप ग्रुप बनाया है. पंजाब के करीब 400 टैक्सी चालक इससे जुड़ चुके हैं. पंजाब टैक्सी यूनियन के जिला प्रधान सोहन सिंह नाभा बताते हैं कि जिला स्तर पर सदस्यीय और ब्लॉक स्तर पर पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है. ये कमेटियां राज्य के सभी 22 जिलों में गठित की जा चुकी हैं. अब इस मुहिम में हरियाणा के टैक्सी ड्राइवर भी शामिल होने लगे हैं.

सोहन सिंह ने बताया कि यूनियन के केवल कृष्ण बत्र, बलविंदर सिंह, अजीतपाल सिंह, जीवनजोत सिंह, संदीप सिंह भोला, गुरबख्श सिंह, परमजीत सिंह पम्मा, सुखदेव सिंह कलसी, जगदीश कुमार जग्गू, सुखदेव सिंह,इंद्रजीत सिंह, और रक्षपाल सिंह चीमा इस मुहिम के बेहतर प्रबंधन में जुटे हुए हैं. वे बताते हैं कि जरूरत जहां भी हो, कहीं न कहीं हमारा कोई न कोई टैक्सी चालक भाई आसपास होता है, जो संदेश मिलते ही जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने का प्रयास करता है.

हरनेक जैनपुरी, कपूरथला की संस्था द लाइफ हेल्पर्स भी इनका साथ दे रही है. बीमार अथवा घायल जरूरतमंदों को इलाज और रक्त मुहैया कराने में उन्हें इस संस्था की मदद मिलती है. अनेक रक्तदानी इस संस्था से जुड़े हुए हैं, जो वाट्सएप और फेसबुक के जरिये सूचना मिलते ही रक्तदान के लिए उपलब्ध रहते हैं. संस्था के अध्यक्ष शिक्षा विभाग में बतौर क्लर्क काम कर रहे सचिन अरोड़ा हैं. सचिन के साथ प्रिंसिपल बलविंदर सिंह,आशीष अरोड़ा, शिक्षक दविंदर सिंह वालिया इस मुहिम में सहयोग कर रहे हैं.

अब ससुराल जाने के बाद भी ‘पराए’ नहीं होंगे आपके मम्मी-पापा

ईस्ट दिल्ली में रहनेवाली श्यामा की मां को कैंसर से मरे हुए 4 साल हो गए, मगर आज तक वह डिप्रेशन का इलाज करवा रही है. अंतिम समय में मां की सेवा न कर पाने का अपराध बोध उसे नासूर की तरह सालता रहता है. वह रोते हुए कहती हैं, ‘काश, उस वक्त मैंने स्टैंड लिया होता. मैं भी क्या करती/ मेरे हसबैंड और सास ने कह दिया था कि मां की सेवा करनी है, तो घर से निकल जाओ. मैं क्या करती/ कैंसर से पीड़ित मां को कजिन के रहमों-करम पर रखना पड़ा. मां तो चली गई, मगर मैं आज तक खुद को माफ नहीं कर पाई.’

कमोबेश श्यामा जैसे दर्द से समाज की उन तमाम औरतों को गुजरना पड़ता है, जिन्हें बचपन से यही सिखाया-पढ़ाया जाता है कि शादी के बाद पति का घर ही उनका अपना है और अब अपने माता-पिता के बजाय उनकी सारी जिम्मेदारी ससुराल की तरफ है. ऐसे में कई बेटियां तो चाहते हुए भी अपने पैरंट्स के लिए कुछ कर पाने से लाचार रह जाती हैं, मगर बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल वुमन इक्वैलिटी को समाज में मजबूत करेगा, बल्कि बुजुर्गों की दयनीय हालत में भी सुधार आएगा.

दरअसल, हाई कोर्ट ने वसंत वर्सेज गोविंदराव उपासराव के केस में अपना जजमेंट सुनाते हुए कहा कि शादीशुदा लड़की को अपने पैरंट्स की जिम्मेदारी शेयर करनी होगी. अदालत ने इस पूर्व धारणा को खारिज कर दिया कि विवाहित बेटी के सारे फर्ज ससुराल की तरफ हैं. माता-पिता की ओर नहीं.

सीनियर सिटीजंस और उनके परिवारों के वेलफेयर के लिए काम करनेवाली ‘सिल्वर इनिंग्ज’ नामक फाउंडेशन के संस्थापक शैलेश मिश्रा के अनुसार, ‘हमारी संस्कृति ऐसी है कि मां-बाप की जिम्मेदारी बेटा ही उठाएगा. हमारे पास कई ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जो अकेलेपन, बीमारी और लाचारी का शिकार होते हैं. बेटियों को उनके देखभाल की जिम्मेदारी देकर अदालत ने सकारात्मक पहल की है, मगर हम चाहते हैं सरकार ऐसे बुजुर्गों की जिम्मेदारी ले, जिनका कोई नहीं.

हिमाचल के कांगड़ा में एक 87 महिला कौशल्या देवी अकेली रहने पर मजबूर है. उसका कोई नहीं है. वह रोज सुबह उठकर अपने घर पर पर्ची लगाकर लिखती है, ‘मैं जिंदा हूं’, वहीं महिलाओं और सामाजिक सरोकारों के लिए काम करनेवाली संस्था मजलिस की ऑड्रे एग्निस कहती हैं, ‘बेटी पराया धन होती है’ यह कॉन्सेप्ट हमारे देश में इतना प्रबल है कि उस सोच को तोड़ पाना बहुत मुश्किल है. कई जगहों पर तो बेटी के घर का खाना भी बुरा समझा जाता है. माता-पिता यही सोचकर बेटी को ज्यादा पढ़ाते-लिखाते नहीं कि उसने तो पराए घर जाना है, मगर अब कानून का सहारा मिलने पर उसे मायके में महत्व मिलेगा.’

बूढ़े पिता को मारते थे पोता और बहू

बूढ़े-बुजुर्गों के लिए सालों से कार्यरत हेल्पेज इंडिया के डायरेक्टर प्रकाश बोरगांवकर कहते हैं, ‘मैं आपको बता दूं कि मेंटेनेंस एंड वेल्फेयर ऑफ पैरंट्स एंड सीनियर सिटिजन ऐक्ट, 2007 के अंतर्गत कानून है कि बेटा हो या बेटी, दोनों को अपने माता-पिता का खयाल रखना है, वरना शिकायत होने पर उन्हें 3 महीने की सजा हो सकती है. हालांकि, इस कानून के तहत कोर्ट-कचहरी नहीं होती, ये केस ट्रिब्यूनल में लाए जाते हैं और इनकी सुनवाई और फैसला 4 महीने के भीतर किया जाता है, मगर सच यह है कि कई बार कानून सामजिक और नैतिक जिम्मेदारी के लिए मददगार नहीं हो पाता.

हाल ही में मैं एक केस डील कर रहा हूं, जहां तीन बेटों के बावजूद पिता को बेटी के पास रहना पड़ा. पिता की शिकायत थी बहू और पोता उन्हें मारते थे. बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले से महिलाओं को अपने माता-पिता की देखरेख अधिकार मिलेगा ही, साथ ही बुजुर्गों को भी सम्मान मिलेगा.’

सेवा की जिम्मेदारी भी लें

हाईकोर्ट के इस फैसले के बारे में बात करने पर वकील आभा सिंह कहती हैं, ‘जब कानून शादीशुदा बेटी को पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार देता है और तो और पहले हमारे कानून के हिसाब से बड़ा बेटा कर्ता हुआ करता था, अब बेटी भी कानूनन कर्ता हो सकती है.

वह अपने माता-पिता की प्रॉपर्टी हैंडल कर सकती है, टैक्स भर सकती है. अगर उसे संविधान यह सारे अधिकार देता है, तो फिर पैरंट्स की सेवा करने की जिम्मेदारी भी उसे भी उठानी होगी.’

 

व्हाट्सऐप अकाउंट भी हो रहे हैं हैक, फ्रौड करने वालों से हो जाएं सतर्क

फेसबुक द्वारा निजी जानकारी साझा करने की खबरों के बाद अब मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप के भी हैक होने की आशंका सामने आयी है. दरअसल इजरायल की नेशनल साइबर सिक्योरिटी अथौरिटी ने इस बात का खुलासा किया है कि व्हाट्सऐप अकाउंट को भी हैक किया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार, व्हाट्सऐप अकाउंट हैक होने का खतरा उन यूजर्स को ज्यादा है, जिनका वौयसमेल पर अकाउंट है. विशेषज्ञों का कहना है कि यूजर्स के वौयसमेल खाते का पासवर्ड बदलते रहना चाहिए और इसे थोड़ा कठिन बनाना चाहिए. विशषज्ञों का कहना है कि हैकर्स आपके मोबाइल नंबर को अलग स्मार्टफोन पर एक नए अकाउंट में एड कर सकते हैं.

कैसे हो सकती है व्हाट्सऐप की हैकिंगः सिक्योरिटी प्रोटोकौल के तहत व्हाट्सऐप नंबर वेरीफिकेशन के लिए नए यूजर को एक एसएमएस कोड भेजता है. एक इजरायली वेब डेवलेपर के अनुसार, यदि यूजर अपने स्मार्टफोन के नजदीक नहीं है तो इस प्रोसेस को स्किप भी किया जा सकता है. कई प्रयासों के बाद भी जब नंबर वेरीफिकेशन नहीं होता है तो व्हाट्सऐप वौइस वेरीफिकेशन के जरिए अकाउंट को वेरीफाई करने की सुविधा दे देता है. इसमें व्हाट्सऐप, यूजर के नंबर पर कौल करता है और वन टाइम पासवर्ड बताता है. यदि यूजर कौल अटेंड नहीं कर पाता है तो व्हाट्सऐप वौयसमेल पर कोड भेज देता है. ऐसे में हैकर को इस कोड को पाने के लिए सिर्फ वौयसमेल का करेक्ट पिन डालना होता है और इस तरह व्हाट्सऐप अकाउंट हैक किया जा सकता है और आसानी से आपके नंबर पर दूसरे स्मार्टफोन पर औपरेट किया जा सकता है.

इसके समाधान की बात करें तो इसे अपने वौयसमेल का पासवर्ड बदलकर और थोड़ा कठिन बनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है. इसके अलावा व्हाट्सऐप में वेरीफिकेशन सिस्टम स्टार्ट करके भी हैकिंग से बचा जा सकता है.

बड़ा सवाल : सीबीआई की जंग में उड़ न जाएं करप्शन के केस

सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल पहले सीबीआई को पिंजरे में बंद तोता बताया था. अब इसी तोते की आपसी लड़ाई से मोदी सरकार मुश्किल में है. जांच एजेंसी के ताजा हालात के कारण भ्रष्टाचार के कई केस पर असर पड़ना तय है. अगर एजेंसी में कामों के बंटवारे को देखें तो राजनीतिक रूप से संवेदनशील लगभग सभी मामलों की जांच का जिम्मा राकेश अस्थाना के नेतृत्व वाली टीम के पास था. इनमें से कई केस वे हैं, जिन्हें बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाया था. अब इन केस पर असर पड़ना तय है.

सूत्रों के अनुसार, अगर राकेश अस्थाना के बाद दूसरी टीम बनाई जाती है तो कुछ देर लगना लाजिमी है. दूसरी ओर विपक्ष को भी सरकार पर हमले का मौका मिल गया है. बिहार में तेजस्वी यादव ने तो लालू प्रसाद यादव की जेल को राजनीतिक साजिश तक बता दिया है. अस्थाना ने ही लालू से जुड़े केस की जांच की थी.

राकेश अस्थाना को ईमानदार बताने वाला विडियो वायरल

इस बीच सोशल मीडिया पर राकेश अस्थाना से जुड़ा एक विडियो वायरल हुआ, जिसमें गुजरात कॉडर के इस आईपीएस अधिकारी को सरदार पटेल, स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित ईमानदार पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है.

ईडी पर सचेत सरकार

केंद्र सरकार दूसरी जांच एजेंसी ईडी के अंदर चल रही खींचतान को जल्द से जल्द समाप्त करने में जुट गई है. सूत्रों के अनुसार, सरकार ईडी में नए डायरेक्टर की नियुक्ति भी जल्द कर सकती है.

CBI में मचे संग्राम के ये हैं मुख्य किरदार

आलोक वर्मा

UT काडर के 1979 बैच के IPS अफसर हैं. वह 1 फरवरी 2017 से सीबीआई के चीफ हैं. उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से पढ़ाई की है.

राकेश अस्थाना

1984 बैच के गुजरात आईपीएस अफसर इस समय सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर हैं. JNU के छात्र रहे अस्थाना ने चर्चित चारा घोटाला और गोधरा ट्रेन में आगजनी मामलों की जांच की थी. स्टर्लिंग बायोटेक में कथित भूमिका के लिए एक याचिका भी दाखिल की गई थी. आरोप लगाए गए थे कि उन्हें 3.8 करोड़ रुपये घूस के तौर पर मिले थे.

ए. के. शर्मा

गुजरात काडर के 1987 बैच के IPS अफसर हैं. जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर वह 2015 में सीबीआई में आए. इस साल की शुरुआत में वर्मा के द्वारा उन्हें प्रमोशन देकर अतिरिक्त निदेशक बना दिया गया. इसके साथ ही अस्थाना द्वारा देखे जा रहे सभी मामलों को उन्हें दे दिया गया. वह कथित तौर पर ज्यादातर मामलों में वर्मा को सलाह देते हैं.

मोइन कुरैशी

दून स्कूल और सेंट स्टीफेंस कॉलेज से पढ़ाई की. यूपी के रामपुर में एक बूचड़खाना खोला और देश के सबसे बड़े मांस निर्यातक बन गए. आरोप है कि वह पूर्व सीबीआई प्रमुखों एपी सिंह और रंजीत सिन्हा के काफी करीबी थे.

सतीश बाबू सना

हैदराबाद के बिजनसमैन हैं. उन्हें तमाम पार्टियों से जुड़े बड़े नेताओं का करीबी भी माना जाता है. 2015 में कुरैशी के खिलाफ एक ED केस में सबसे पहले उनका नाम सामने आया. अस्थाना की टीम ने केस की जांच की थी.

मनोज और सोमेश प्रसाद

मनोज दुबई से काम करने वाला बिचौलिया है, जिसे सीबीआई ने पकड़ा है. उसे इन्वेस्टमेंट बैंकर कहा जाता है और अपने भाई सोमेश के साथ एक दशक से विदेश में हैं. सना ने दावा किया है कि मनोज ने उसका नाम क्लियर कराने के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे थे, जो अस्थाना को दिया जाना था.

देवेंद्र कुमार

सीबीआई में DSP कुमार कुरैशी के खिलाफ केस में जांच अधिकारी थे. सीबीआई ने दावा किया है कि उन्होंने सना का फर्जी बयान तैयार किया, जिसने केस में राहत के लिए घूस दी.

कब, कैसे और क्यों शुरू हुई महाभारत

  1. 1.आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच तकरार अक्टूबर 2017 में शुरू हुई जब वर्मा नेCVC के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किए जाने पर आपत्ति जताई.
  2. 2.वर्मा का मानना था कि अधिकारियों के इंडक्शन को लेकर उनके द्वारा की गई सिफारिश को अस्थाना ने बिगाड़ दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका के कारणCBI भी घेरे में आ गई. हालांकि पैनल ने आपत्ति को खारिज करते हुए अस्थाना को प्रमोट कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने भी अस्थाना को क्लीन चिट दे दी.
  3. 3.12 जुलाई को जब वर्मा विदेश में थे, CVCने सीबीआई में प्रमोशन को लेकर चर्चा करने के लिए मीटिंग बुलाई जिसमें अस्थाना को एजेंसी में नंबर 2 की हैसियत से बुलाया गया. इस पर वर्मा ने CVC को लिखा कि उन्होंने अपनी तरफ से मीटिंग में शामिल होने के लिए अस्थाना को अधिकृत नहीं किया है.
  4. 4.24 अगस्त को अस्थाना नेCVC और कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा, जिसमें वर्मा, उनके करीबी अतिरिक्त निदेशक एके शर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की डिटेल दी. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कई आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई. अस्थाना ने दावा किया कि सना ने वर्मा को 2 करोड़ रुपये दिए थे जिससे वह कुरैशी केस में बच जाए.
  5. 5.पिछले हफ्ते अस्थाना ने फिर सेCVC और कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा और कहा कि वह पिछले महीने सना को गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन वर्मा ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया. उन्होंने यह भी दावा किया कि फरवरी में जब उनकी टीम ने सना से पूछताछ की कोशिश की थी, तो वर्मा ने फोन कर रोक दिया.
  6. 6.उधर,वर्मा ने अस्थाना द्वारा जांच किए जा रहे कई महत्वपूर्ण मामले वापस लेकर शर्मा को सौंप दिया. अस्थाना के स्टाफ का भी तबादला कर दिया गया.
  7. 7.4 अक्टूबर को सीबीआई ने सना को पकड़ा और उसने अस्थाना के खिलाफ मैजिस्ट्रेट के सामने बयान दे दिया. सना ने दावा किया कि 10 महीने में उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपये दिए हैं.

आगे क्या…

हाई कोर्ट ने मामले के अगली सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की है. कोर्ट ने कहा है कि 29 अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर द्वारा राकेश अस्थाना पर लगाए गए आरोपों पर जवाब देंगे. कोर्ट ने अस्थाना की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है और मामले में यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा है.

लखनऊ का हाई प्रोफाइल मर्डर केस, नये खुलासों की प्रतीक्षा

लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति रमेश बाबू यादव के बेटे अभिजीत की हत्या में मां मीरा यादव की गिरतारी के बाद भी हत्या गुत्थी सुलझी नहीं है. सवाल उठता है कि 55 साल की मां 22 साल के बेटे की हत्या अकेले कर सकती है. ऐसे में पुलिस की नजर कुछ दूसरे परिवारजनों पर भी है.

लखनऊ के दारुलशफा स्थित विधायक निवास के फ्लैट नम्बर बी-137 में एटा के एमएलसी व उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा अपने दो बेटों 27 साल के अभिषेक और 22 साल के अभिजीत यादव उर्फ विवेक के साथ रहती थी. दारुलशफा लखनऊ का सबसे पौश एरिया है.

यहां पर ज्यादातर विधायक ही रहते हैं. यह उत्तर प्रदेश की विधानसभा के नये लोकभवन के पीछे का इलाका है. दारूलशपफा की दूसरी तरपफ लखनऊ का सबसे पौश हजरतगंज का जनपथ मार्केट बना है.

रविवार की सुबह सभापति रमेश यादव की दूसरी पत्नी मीरा सो कर उठती है तो अपने बेटे अभिजीत को बेहोश पाती है. यह देखकर वह अपने दूसरे बेटे अभिषेक को फोन करती है. अभिषेक यादव दारूलशफा से कुछ दूरी पर ही नरही में स्थित दूसरे पलैट में रहता था. वह मां के पास आया और अपने भाई के कमरे में गया. जब उसने भाई का हाथ पकड़ा तो उसकी नब्ज गायब थी. उसे लगा कि यह तो मर गया है.

सुबह करीब 7 बजे मीरा के फ्लैट पर नौकर गया था. उसने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया इसके बाद भी मीरा ने दरवाजा नहीं खोला तो नौकर चला गया. इसके बाद ही मीरा ने बड़े बेटे अभिषेक को फोन किया. अभिषेक के आने के बाद सभी को यह पता चला कि हार्ट अटैक से ही अभिजीत की मौत हुई है.

रविवार की सुबह आनन फानन में मीरा और उसके परिवार के लोगों ने अभिजीत के दाह संस्कार करने की योजना बना ली. मामले की सूचना दारूलशफा पुलिस चौकी के पुलिसवालों से हजरतगंज थाने पहुंचती है. वहां पहुंची पुलिस को मीरा ने बताया कि अभिजीत की स्वाभाविक मौत है. परिजनों को कोई आपत्ति न होने के कारण पुलिस ने भी पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं समझी.

मीरा ने पुलिस को बताया कि देर रात अभिजीत घर वापस आया तो उसने सीने में दर्द की बात कही तो उसे लगा कि पेट में गैस बन गई होगी. तब उसने सीने पर दवा लगा दी. इसके बाद वह सो गया तो वह भी सो गई. सुबह जब वह नहीं उठा तो मीरा ने बड़े बेटे अभिषेक को बुलाया. अभिषेक के आने के बाद पता चला कि अभिजीत की मौत हो चुकी है. पुलिस को मीरा और परिजनों ने स्वाभविक मौत की बात बताई और दाह संस्कार से पहले किसी भी तरह के पोस्टमार्टम से मना कर दिया. इसके बाद परिजन शव लेकर दाह संस्कार के लिये बैकुंठधाम के लिये निकल गये. अभी वह घर से 1 किलोमीटर दूर सिकदंर बाग चौराहे ही पहुंचे होंगे कि पुलिस ने उनको रोक दिया.

इस बीच पुलिस के बड़े अफसरों को शिकायत मिलती है कि अभिजीत की मौत संदिग्ध् है. इसमें उसकी हत्या की शंका जाहिर की गई. तब बड़े अफसरों और लखनऊ के एसएसपी कलानिधि् नैथानी ने शव को दाह संस्कार करने से पहले रोक दिया. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिये मेडिकल कालेज भेज दिया जाता है. रविवार की देर शाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा होता है कि अभिजीत की हत्या गला दबा कर की गई थी. इस रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस ने अभिजीत के बड़े भाई अभिषेक की तहरीर के आधार पर धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा कायम कर मामले की पड़ताल शुरू की.

इसमें सबसे अधिक संदिग्ध् अभिजीत की मां मीरा दिख रही थी. पुलिस पूछताछ में मीरा अलग अलग बयान देने लगी. अपने बयान की पुष्टि के लिये मीरा कोई भी सबूत नहीं पेश कर पाती थी. ऐसे में पुलिस का शक पूरी तरह से पुष्ट हो जाता था. लखनऊ पुलिस ने घटना के 24 घंटे के अंदर ही बेटे की हत्या के आरोप में मां मीरा को पकड़ कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया वहां से मीरा को 14 दिन कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. मीरा ने पुलिस के सामने अपने गुनाह को कबूल कर लिया.

मीरा यादव और रमेश यादव की पहली मुलाकात 1984 में हुई थी. उस समय रमेश यादव एमएलसी थे. मुलाकात के बाद दोनों करीब आ गये और तब रमेश यादव ने मीरा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा. मीरा के पिता बैंक में मैनेजर थे. मीरा ने एमए और एलएलबी की पढाई की थी. 1986 में दोनो ने शादी कर ली. इसके बाद रमेश यादव ने उसको दारूलशफा स्थित अपना आवास उसको रहने के लिये दे दिया था.

इसके बाद उसके दो बच्चे अभिषेक और अभिजीत हुये. वह पर्यटन विभाग में क्लर्क के रूप में काम करती थी. साल 2012 में रमेश यादव ने उसकी नौकरी छुड़वा दी थी. समय के साथ साथ मीरा के साथ उनकी दूरियां बढने लगीं. वह मीरा को खर्च के लिये पैसे भी कम देते थे.

रमेश यादव खुद 12 कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास में रहते थे. दारूलशफा स्थित आवास में उनका आनाजाना नहीं होता था. रमेश यादव मूल रूप से एटा के रहने वाले थे. वह ज्यादातर समय वहीं गुजारते थे. मीरा का बड़ा बेटा अभिषेक कन्स्ट्रक्शन का काम करता था. उसने सिविल इंजीनियरिंग की पढाई की थी. छोटा बेटा अभिजीत अपनी पढाई के साथ दूसरे काम करता था. पर वह किसी काम में सफल नहीं हुआ था. ऐसे में वह नशे का शिकार भी हो गया था. अभिजीत को यह लगता था कि उसे जितना पैसा मिलना चाहिये वह नहीं मिल रहा है. ऐसे में उसका मां के साथ झगडा होता था. मां के साथ झगडे में अभिजीत रमेश यादव के साथ की गई शादी को लेकर भी ताना मारता और उनके चरित्र को लेकर भी सवाल उठाता था. ऐसे में मीरा को यह बातें बुरी लगती थीं.

Crime story Lucknow abhijeet Murder case

मीरा ने अपने गहने बेचकर बेटे को कुछ बिजनेस शुरू कराया पर वह उसमें सफल नहीं हो सका. दशहरे के दिन भी अभिजीत ने अपनी मां से पैसे मांगे और न मिलने पर झगड़ा किया. मां को मारा पीटा था. बारबार पैसे दे कर मीरा भी थक चुकी थी. लखनऊ के एएसपी पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि पुलिस को दिये गये अपने बयान में मीरा ने कहा कि ‘अभिजीत शराब पीने का आदी था. आये दिन शराब पीकर हंगामा करता था. वह रोज रोज के झगड़े से तंग आ चुकी थी. शनिवार की रात करीब 11 बजे अभिजीत शराब के नशे में धुत होकर आया और आते ही गाली गलौच करने लगा. मीरा को लगा कि दशहरे वाले दिन की तरह से वह फिर से मारपीट करेगा. जिससे डरी मीरा ने आज पहले ही अभिजीत को थप्पड़ मारते हुये धक्का दे दिया.

अभिजीत दरवाजे से टकराकर नीचे गिर गया. उसके बाद वह दोबारा उठा और हाथापाई करने लगा. इसके बाद गुस्से में आकर मीरा ने उसका दीवार पर धक्का दे दिया. जिससे वह गिर कर बेहोश हो गया. मीरा को लगा कि वह अभी फिर उठेगा और मारपीट शुरू कर देगा. ऐसे में उसने अभिजीत के गिरने के बाद दुपट्टे को लेकर उसके गले में कसा और मार दिया. मीरा ने हत्या का समय रात करीब 2 बजे का बताया था. यही वक्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आया था. इसके बाद वह सोने चली गई. रविवार की सुबह जब अभिजीत के शरीर में कोई हचलच नहीं दिखी तो मीरा ने समझ लिया कि वह मर गया है. इसके बाद उसने अपने अपराध को छिपाने के लिये कोशिश शुरू की.

इस क्रम में मीरा ने सबसे पहले अपने दुपट्टे को गैस के चूल्हे पर रखकर जला दिया. अभिजीत की गरदन पर बने निशान को मिटाने के लिये सोफ्रामयिसिन क्रीम लगाई. इंसपेक्टर हजरतगंज राधरमण सिंह बताया कि क्रीम और जले हुये दुपटटे को बरामद किया गया. मां के द्वारा बेटे की हत्या किये जाने पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था. विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. एटा में भी रमेश यादव के परिवार से किसी ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया. उनके भाई नरेश यादव ने कहा कि मीरा और उनके बेटों के बारे में वह जानते थे. यह भरोसा नहीं कर सकते कि कोई सगी मां अपने बेटे की हत्या कर दे और सबूत भी मिटाने का प्रयास करे.

पुलिस के सामने बेटे की हत्या को कबूल करने वाली मां मीरा ने मीडिया के सामने अपने जुर्म कबूलने की बात को गलत बताया. मीरा ने बताया कि अभिजीत ने खुदकशी की. जिससे उसके गले पर निशान आया. मीरा ने अपने पति और पुलिस पर खुद को हत्या के आरोप में फंसाने का आरोप लगाया. मीरा ने कहा कि उसने अभिजीत को नहीं मारा. उससे उसका झगड़ा हुआ था जिसमें उसे चोट लग गई थी. पुलिस ने मीरा को सोमवार 22 अक्टूबर की दोपहर को सीजीएम कोर्ट में पेश किया. इसके बाद मुख्य न्यायिक अध्किरी आनंद प्रकाश सिंह ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत मे जेल भेज दिया.

नकली उत्पाद बेचने पर अमेजन और फ्लिपकार्ट को नोटिस

ड्रग कंट्रोलर जनरल औफ इंडिया (डीसीजीआई) ने देश विदेश के कई नामी कास्मेटिक्स उत्पादों के नाम पर नकली और मिलावटी माल बेचने के आरोप में अमेजन सहित कई ई-कामर्स कंपनियों को नोटिस भेजा है. डीसीजीआई ने जांच में पाया कि इन वेबसाइट पर कई ऐसे भी आयातित उत्पाद बिक रहे हैं, जिन्हें भारत में बेचने की अनुमति नहीं है. कंपनियों को दस दिन में जवाब देने को कहा है. जवाब नहीं मिलने पर डीसीजीआई ने कंपनियों को कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.

डीसीजीआई के ड्रग इंस्पेक्टर ने देश के विभिन्न हिस्सो में 5 और 6 अक्टूबर को छापा मारा था, जिसमें पता चला कि ई-कामर्स वेबसाइट पर बिना पंजीकरण वाले कुछ स्वदेशी कास्मेटिक और बिना वैध लाइसेंस के आयातित ब्रांड्स बेचे जा रहे हैं. इसके बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट और इंडियामार्ट जैसी कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है. बिना मंजूरी के ऐसे उत्पादों की बिक्री पर मौद्रिक जुर्माना से लेकर जेल की सजा का प्रावधान है.

इस बारे में जब अमेजन इंडिया से संपर्क किया गया तो कंपनी ने कहा कि अमेजन ग्राहकों का ध्यान रखती है और उच्च मानदंडों का अनुपालन करती है. और जब भी ऐसा कोई मामला कंपनी के समक्ष आता है तो अवैध और नकली उत्पाद बेचने वाले विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई की जाती है.

बता दें कि डीसीजीआई एस ई रेड्डी ने नोटिस में कहा, ‘अगर आप निर्धारित समय में नोटिस का जवाब देने में विफल रहते हैं तो यह माना जाएगा कि आपके पास कोई जवाब नहीं है और जो भी उचित कार्रवाई होगी, की जाएगी.’ रेड्डी के अनुसार इसी प्रकार का नोटिस इंडियामार्ट को भी दिया गया है. फ्लिपकार्ट और इंडियामार्ट से इस बारे में फिलहाल बयान नहीं मिल पाए हैं.

बस दो छक्के और सचिन का ये नायाब रिकौर्ड तोड़ देंगे रोहित शर्मा

वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच में तूफानी बल्लेबाजी करने वाले ओपनर रोहित शर्मा अब सचिन का रिकार्ड तोड़ने के करीब हैं. पहले मैच में 15 चौके और 8 छक्कों की ताबड़तोड़ पारी से 152 रनों की पारी खेल कर रोहित ने दर्शकों का दिल जीत लिया.

इस मैच के बाद सबसे ज्यादा छक्का लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में वो तीसरे नंबर पर आ चुके हैं. रोहित के नाम वनडे में अब तक कुल 194 छक्के दर्ज हैं. वहीं पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदूलकर ने अपने वनडे करियर में 194 छक्के लगाएं.

अब अगर रोहित विशाखापत्तनम में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो छक्के और जड़ देते हैं तो वो सचिन को पीछे छोड़ते हुए भारत की तरफ से वनडे में सबसे ज्यादा छक्का लगाने के मामले में दूसरे नंबर पर आ जाएंगे.

भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकौर्ड फिलहाल महेंद्र सिंह धौनी के नाम पर है। आपको बता दे कि पहले वनडे में रोहित ने पूर्व कप्तान गांगुली को पीछे छोड़ा था जिन्होंने वनडे क्रिकेट में 190 छक्के लगाए थे.

रोहित शर्मा ने भारत के लिए अब तक 189 वनडे मैचों में 194 छक्के लगाए हैं जबकि सचिन ने 463 वनडे मैचों में 195 छक्के लगाए थे। धौनी ने अब तक खेले 328 वनडे मैचों में 217 छक्कों का रिकार्ड है.

सैमसंग फोल्डेबल स्मार्टफोन को अगले महीने किया जा सकता है पेश

पिछले काफी समय से मोबाइल कंपनी सैमसंग अपने पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन को लेकर चर्चा में है. आपके बता दें, हाल ही में, सैमसंग मोबाइल कंपनी ने अपने  ट्विटर हैंडल से एक टीजर वीडियो जारी किया है.

यह टीजर वीडियो अगले महीने 7-8 नवंबर को आयोजित सैमसंग डेवलेपर कॉन्फ्रेंस की ओर इशारा कर रहा है. यह आयोजन कैलिफोर्निया के फ्रांसिस्को शहर में होगा.

इसके पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन को अगले महीने पेश किया जा सकता है.  जबकि टीजर वीडियो से कुछ समय पहले हीं सैमसंग के सीईओ DJ Koh ने इस बात को कंफर्म किया था कि कंपनी ऐसा टैबलेट लॉन्च करेगी जो फोल्ड होकर स्मार्टफोन के साइज जितना बन जाएगा और यूजर इसे आसानी से पौकेट में रख सकेंगे.

आइए इस फोन के बारे में आपको बता दें, यह डिवाइस 7 इंच का डिस्प्ले के साथ आएगा, जिसे आसानी से फोल्ड किया जाना संभव होगा. कुछ रिपोर्ट में तो यह भी कहा गया है कि सैमसंग ब्रांड का यह फोन गैलेक्सीX  होगा और इसकी कीमत 1,850 डौलर (1,36,500 रुपये) हो सकती है.

सैमसंग के पहले फोल्डेबल फोन से संबंधित फिलहाल कोई भी वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आई है. सैमसंग डेवलेपर कॉन्फ्रेंस 2018 के दौरान केवल फोल्डेबल फोन की झलक देखने को मिलेगी. हालांकि, कहा जा रहा है कि कंपनी अगले साल इस फोन को लौन्च करेगी.

कभी-कभी लगता ही नहीं कि कोहली इंसान हैं : तमीम इकबाल

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली की बल्लेबाजी के कायल बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल ने उनकी जमकर तारीफ की है. तमीम का कहना है कि, कभी-कभी मुझे लगता ही नहीं कि भारतीय कप्तान इंसान हैं, ऐसा उसके प्रदर्शन के तरीके के कारण है. जैसे ही वह बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं तो लगता है कि वह प्रत्येक मैच में शतक बनाएंगे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह जिस तरह खुद को फिट रखते हैं, जिस तरह अपने खेल पर काम करते हैं, वह अविश्वसनीय है. वह संभवत: तीनों प्रारूपों में नंबर एक हैं. वह ऐसे व्यक्ति हैं जिसे देखकर सराहा जा सकता है और बहुत कुछ सीखा जा सकता है. मुझे लगता है कि वह शानदार है.’’ कोहली टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज हैं और सबसे कम पारियों में 10000 वनडे रन पूरे करने से सिर्फ 81 रन दूर हैं.’

यह रिकार्ड फिलहाल महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम है जिन्होंने 259 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी जबकि कोहली ने अब तक 204 पारियां खेली हैं. तमीम ने कहा, ‘‘पिछले 12 साल में खेलने वाले मैंने सभी महान खिलाड़ियों को देखा है. उनके अपने मजबूत पक्ष हैं लेकिन मैंने ऐसा व्यक्ति नहीं देखा जिसने विराट जैसा दबदबा बनाया हो.’’

तमीम ने पिछले महीने एशिया कप के दौरान काफी वाहवाही बटोरी थी जब वह कलाई के फ्रैक्चर के बावजूद बल्लेबाजी के लिए उतरे थे. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है. बता दें कि वेस्टइंडीज के खिलाफ बुधवार को होने वाले दूसरे वनडे मैच में भारतीय टीम 2-0 की बढ़त हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.

बदमाशों ने निकाली जौब की वैकेंसी

लगता है सोशल मीडिया अब क्राइम का नया ठिकाना बन चुका है. आएदिन आपराधिक चरित्र के लोग  कभी व्हाट्सएप ग्रुप बना कर तो कभी फेसबुक पर विज्ञापन दे कर कानून व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं.

ताजा और एक अजीबोगरीब मामला बिहार के पटना का है जहां के बाइकर्स गैंग ने फेसबुक पर विज्ञापन पोस्ट कर पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है.

खौफ फैलाना चाहते हैं

इस विज्ञापन में आपराधिक किस्म के लोगों से अपराध की दुनिया में जुड़ने के लिए बजाप्ते योग्यता भी रखी है. विज्ञापन में कहा गया है कि विज्ञापन में कहा गया है कि जिन लोगों की अपराध में रूचि है और वे खौफ फैलाना चाहते हैं वे बाइकर्स गैंग में शामिल हो सकते हैं.

वैकेंसी में यह कहा गया है कि उन्हें ऐसे बाइकर्स की तलाश है जो उन के गैंग में शामिल हो कर अपराध कर सकें.

खुलेआम प्रचार

वैकेंसी में कहा गया है कि पटना में एक बार फिर से खौफ वापस लौटेगा इसलिए  बाइकर्स की तलाश की जा रही है. सोशल मीडिया पर यह भी कहा गया है कि जो लोग इस गैंग में शामिल होना चाहते हैं वे इसे लाइक करें और इनबौक्स में मैसेज करें.

हैरत की बात यह है कि इस पोस्ट को कईयों ने लाइक भी किया है और एक लड़के ने यहां तक लिख दिया,”हां हमें करना है…”

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पुलिस के लिए चुनौती पर निबटने के लिए तैयार

बाइकर्स गैंग की वैकेंसी जब सोशल मीडिया पर निकली तो पटना के एसएसपी मनु महाराज ने मीडिया से बातचीत में बताया की, “पुलिस मामले की जांच कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह विज्ञापन किस ने दिया है?”

उन्होंने आगे कहा, “पुलिस ऐसे लोगों को चिन्हित कर कड़ी काररवाई करेगी.”

इस से पहले पटना में मोबाइल, चेन स्नेचिंग के अपराध में भारी इजाफा हुआ था. दिनदहाड़े इस लूट से राजधानी में भय का माहौल था. इस अपराध में पुलिस को कई बाइकर्स गैंग्स द्वारा वारदात को अंजाम देने की सूचना मिली थी, तब पुलिस ने दबिश दे कर कई बदमाशों को पकड़ा था और इन्हें जेल भी हुई थी. पुलिस ने तब लगभग 2 दर्जन से अधिक बाइकर्स गैंग्स को पकड़ा था.

महज शौक के लिए अपराध

आश्चर्य की बात यह भी कि इन गैंग्स में खातेपीते घरों के लड़के शामिल थे जो महज शौक पूरा करने के लिए घटनाओं को अंजाम दे रहे थे.

ये बदमाश महंगी बाइक चलाते हैं और लूट, मोबाइल, चेन स्नेचिंग  करने के साथसाथ लड़कियों महिलाओं के साथ छेड़खानी भी करते हैं.

कमजोर पड़े बाइकर्स गैंग्स एक बार फिर से राजधानी की सड़कों पर दहशत फैलाने की फिराक में हैं  इसलिए जरूरी है कि आम लोग सावधानी बरतें.

क्या करें

सोशल मीडिया और खासकर फेसबुक फ्रैंड लिस्ट पर ध्यान रखें और ऐसा कोई पोस्ट जो अपराध को बढ़ावा देने वाला हो भूल कर भी उस पर न तो कमेंट करें और न ही उसे लाइक करें, अन्यथा पुलिस आप से पूछताछ कर सकती है. संदिग्ध लोगों को तुरंत अनफ्रैंड कर ब्लौक कर दें.

अपना पर्सनल नंबर भूल कर भी सोशल मीडिया पर शेयर न करें और न ही किसी से अनावश्यक चैटिंग करें. विशेष परिस्थिति में तुरंत पुलिस की सहायता लें.

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