देश की सर्वोच्च राजनीतिक कुरसी की दौड़ में एक तरफ कांग्रेस के अघोषित उम्मीदवार राहुल गांधी हैं तो दूसरी तरफ भाजपा के नरेंद्र मोदी. वहीं, सियासत में तेजी से उभरे अरविंद केजरीवाल भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. सवाल यह है कि काबिलीयत और जनसमर्थन के आधार पर हो रही इस चुनावी जंग में अपरिपक्व राहुल का झंडा बुलंद होगा या भगवे में लिपटे नरेंद्र मोदी का सपना साकार होगा या फिर दोनों के अरमानों पर अरविंद केजरीवाल झाड़ू फेरेंगे? पढि़ए यह विश्लेषणात्मक लेख.

राहुल गांधी--उपाध्यक्ष, कांग्रेस

काबिलीयत पर सवाल

देश की सब से बड़ी व पुरानी कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार राहुल गांधी मीडिया को दिए अपने राजनीतिक कैरियर के पहले इंटरव्यू में कोई छाप नहीं छोड़ पाए. उलटा उन की राजनीतिक अपरिपक्वता और अधकचरा ज्ञान उभर कर लोगों के सामने आया. वह सूझबूझ नहीं दिखी जो देश के शीर्ष पद के दावेदार में होनी चाहिए. राहुल गांधी कोई नई सोच, देश की समस्याओं पर नया दृष्टिकोण पेश नहीं कर पाए.

राहुल गांधी ही क्यों, भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की ‘समझ’ भी देश के सामने समयसमय पर आती रही है. मोदी के आर्थिक, इतिहास, भूगोल और संवैधानिक ज्ञान पर सवाल उठते रहे हैं. मोदी को हवाईर् बातें बनाने में माहिर माना जाता है तो राहुल गांधी को अपरिपक्व, अज्ञानी.

इसीलिए सोशल मीडिया में पढ़ेलिखे खासतौर से युवाओं द्वारा मोदी को ‘फेंकू’ और राहुल गांधी को  ‘पप्पू’ कहा जाता है.

युवा भारत यानी सोशल मीडिया में दोनों दावेदारों की काबिलीयत को ले कर एक मजेदार मगर गंभीर टिप्पणी मौजूं है. टिप्पणी राहुल के इंटरव्यू और मोदी को ले कर है जिस में कहा गया है, ‘एक बेवकूफ और दूसरा हत्यारा, भारत का क्या होगा’. हालांकि इस टिप्पणी को ले कर विवाद पैदा हो गया क्योंकि इसे आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रिट्वीट कर दिया था जो कि उन्हीं की पार्टी के समर्थक व संगीतकार विशाल डडलानी की थी.

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