भाजपा ने पीएम पद के लिए अपने नेता की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है मगर भाजपा नेताओं के बीच मल्लयुद्ध छिड़ गया है. एक खेमा नरेंद्र मोदी की वकालत कर रहा है तो दूसरा शिवराज सिंह चौहान के कसीदे काढ़ने में जुटा है. पीएम पद के लिए इन दोनों में कौन बेहतर है, और किसे देश की जनता स्वीकार कर सकती है, बता रहे हैं भारत भूषण श्रीवास्तव.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब 22 जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर में पूजा अर्चना कर अपनी चुनावी जन आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की थी तो प्रचार सामग्री से नरेंद्र मोदी को गायब देख आम लोग भी चौंके थे. शिवराज के पोस्टर्स पर सिर्फ अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह ही थे. इस से एक ?ाटके में देशभर में यह संदेश गया कि नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के सर्वमान्य नेता नहीं हैं और उन के प्रधानमंत्री घोषित किए जाने की अभी चर्चा भर है, इस पर पार्टी ने आधिकारिक मोहर नहीं लगाई है.

दोटूक शब्दों में कहा जाए तो शिवराज सिंह ने कई बातें एकसाथ स्पष्ट कर दी हैं. पहली यह कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उन्हें नरेंद्र मोदी की फोटो की जरूरत नहीं. दूसरी यह कि वे खुद इतने बड़े नेता हैं कि पार्टी नरेंद्र मोदी की फोटो लगाने को उन्हें विवश नहीं कर सकती और तीसरी जो इन सब से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, वह यह कि शिवराज सिंह भी नरेंद्र मोदी की बराबरी से प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं और प्रदेश विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को उन की कट्टरवादी छवि के चलते जगह दे कर अपनी 8 सालों की मेहनत पर पानी नहीं फेरना चाहते.

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