मोदी मंत्रिमंडल के जो दो चार सदस्य तुक की बात बोल पाते हैं गृह मंत्री राजनाथ सिंह उनमे से एक हैं, जिन्हें कुछ बोलने के पहले मोदी की इजाजत या रजामंदी की जरूरत नहीं पड़ती. नक्सल प्रभावित दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में राजनाथ सिंह की यह स्वीकारोक्ति कोई राजनैतिक मजबूरी नहीं थी कि नक्सली हिंसा का हल गोलियां नहीं हैं. यह जरूर उनकी सच से मुंह मोड़ने की कवायद थी कि वे बजाय कोई ठोस हल पेश करने के नक्सली समस्या से निबटने के अव्यवहारिक सुझाव देते रहे, मसलन सरकार के खुफिया तंत्र का कमजोर होना और नक्सलियों की फंडिंग के स्त्रोत रोकना वगैरह वगैरह.

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