अपने मुख्यमंत्रित्व काल के 11 साल पूरा होने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के जम्बूरी मैदान से ताबड़तोड़ घोषणाएं, कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर डालीं, इनमें से अधिकांश गरीबों के लिए हैं. इन घोषणाओं पर यकीन करें तो सूबे में अब कोई बेघर और बेजमीन नहीं होगा, गरीबों को मुफ्त इलाज मिलेगा और सरकारी योजना के तहत शादी करने वालों को तोहफे में स्मार्ट फोन दिया जाएगा.

घोषणावीर होते जा रहे शिवराज सिंह चौहान ने एक घोषणा यह भी कि जल्द ही सरकार गरीबों को पांच रुपये थाली के हिसाब से भरपेट खाना मुहैया कराएगी. इस योजना का नाम दीनदयाल रसोई रखा गया है, जिसकी शुरुआत भोपाल से होगी. चूंकि शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश में मामा कहा जाता है, इसलिए आम लोगों ने ही इसे मामा थाली खाना नाम दे दिया है.

गरीबों को मुफ्त या सस्ता खाना खिलाने से पुण्य के साथ साथ शोहरत भी मिलती है, इसलिए शिवराज सिंह चौहान पुण्य कमाने का यह मौका भी नहीं छोडऩा चाह रहे. मुफ्त के भाव के खाने की शुरुआत तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने की थी, जिनके नाम पर अम्मा थाली 15 रुपये में तमिलनाडु में मिलती है, जयललिता जिन वजहों के चलते याद की जाएंगी, अम्मा थाली उनमें से एक है.

शिवराज सिंह चौहान के भाषण को समझें तो उनका इशारा बेहद साफ है कि अब भाजपा बजाए धर्म और राम के समाजवाद की राजनीति करेगी और गरीबों को अमीर और अमीरों को गरीब बनाने की कोशिश जारी रखेगी. 11 साल में हुआ इतना है कि भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया है, जिस तरह दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री रहते सोनिया जी सोनिया जी करते रहते थे, उसी तरह शिवराज सिंह अपने भाषणों में मोदी मोदी भजते रहते हैं. दिग्विजय दलितों के भले के लिए दलित एजेंडा लाए थे, तो शिवराज सिंह ने तो दलितों को कुम्भ में नहलाकर उन्हें हिन्दू मान लिया.

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