उत्तर प्रदेश में युवा विकास पुरुष के रूप में प्रोजेक्ट किये जा रहे अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार और बिहार में सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार की सरकार विकास के तमाम दावे भले कर ले, पर विश्व बैंक की रिपोर्ट में बिहार और उत्तर प्रदेश झारखंड और उत्तराखंड से भी पीछे हैं. विश्व बैंक कारोबार में आसानी के लिहाज से एक रैकिंग सूची जारी करता है. यह सूची उन सुधारों को लेकर तैयार की जाती है, जिनसे प्रदेश में निजी निवेश के लिये रास्ता सरल बनाया जाता है. निवेश करने वाले बिजनेसमैन उन राज्यों में ही निवेश ज्यादा करते है जहां सहूलियतें मिलती है.

पिछले कुछ सालों से विश्वबैंक की रैंकिंग सूची में गुजरात पहले नम्बर पर होता था. अब गुजरात तीसरे नम्बर पर चला गया है. पहले और दूसरे नम्बर पर आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना का कब्जा हो गया है. बीमारू प्रदेश कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार तो अपने से अलग हुये उत्तराखंड और झारखंड से भी पीछे चले गये हैं. उत्तराखंड ने आर्थिक सुधार के बेहतर कानून बना कर निजी निवेशकों का दिल जीतने का काम किया है. जिस वजह से वह पिछले साल के 23 वें स्थान से छलांग लगाकर 9वें स्थान पर कब्जा जमा बैठा है. केवल नये राज्य ही नहीं, पुराने राज्यों ने भी अपनी हालत मे सुधार किया है. हरियाणा इसका उदाहरण है. हरियाणा पिछले साल 14 वें स्थान पर था अब वह  नम्बर 6 पर आ गया है.

तेलंगाना ने सबसे तेजी से सुधार किया. एक साल पहले वह 13 वें नम्बर पर था वहां से वह सीधे पहले नम्बर पर आन्ध्र प्रदेश के मुकाबले खड़ा हो गया. उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में निजी निवेशको को मंत्रियों और असफरों के इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि लोग यहां पैसा लगाने से बचना चाहते हैं. यह सच है कि निजी निवेशक इन राज्यों में पैसा लगाने के लिये तैयार हैं पर यहां की व्यवस्था से वह पीछे हट जाते हैं. यही वजह है कि यह दोनों बड़े राज्य विश्वबैंक की रैकिंग सूची में नम्बर 10 तक कोई जगह बनाने में सफल नहीं हो पाये हैं.

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