Kerala Politics: केरल विधानसभा चुनाव में आरजेडी का खाता खुलना राजनीतिक धुरंधरों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. केरल में आरजेडी का खाता खोलने वाले व्यक्ति का नाम है पी के प्रवीन. सवाल यह है कि जो पार्टी बिहार में पकड़ नहीं बना पाई वो केरल में यह कमाल कैसे कर गई? बिहार की पार्टी को केरल में जनाधार कैसे मिला?

पी के प्रवीन, कन्नूर जिले की कूथुपरम्बा सीट से आरजेडी के विधायक बने हैं. 2026 केरल विधानसभा चुनाव में इन्होंने 70,448 वोट पा कर आईयूएमएल की जयंती राजन को 1,286 वोट से हराया. केरल में आरजेडी की यह पहली जीत है. पी के प्रवीन केरल की पानूर नगरपालिका के पार्षद रह चुके हैं और पानूर पंचायत के 2 बार सदस्य रहे. वे 4 साल युवा जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष रहे. 2021 में ये सीट एलजेडी के के पी मोहनन ने जीती थी. 2023 में एलजेडी का आरजेडी में विलय हो गया, इसलिए अब वे आरजेडी के टिकट पर लड़े और जीत दर्ज की.

सच्चाई तो यह है कि आरजेडी केरल में अकेले कुछ नहीं है. वह सीपीएम की अगुआई वाले एलडीएफ गठबंधन का हिस्सा है. केरल में लोग सीपीएम को वोट देते हैं. आरजेडी को यह सीट एलडीएफ के कोटे से मिली है. कूथुपरम्बा कन्नूर में है. यहां आईयूएमएल बनाम एलडीएफ की सीधी लड़ाई थी. बीजेपी 22,195 वोट ले कर तीसरे नंबर पर रही. मुसलिम और पिछड़ा वोट एलडीएफ के साथ गया. आरजेडी का समाजवादी टैग और स्थानीय उम्मीदवार पी के प्रवीन की ईमानदार छवि की वजह से आरजेडी जीती.

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