एक था राजा एक थी रानी चलो भई शुरू हो गई एक नई कहानी. जी हां बचपन की कुछ खट्टी  कुछ मीठी यादें ही हैं कहानियां. जो कभी सुना  करते  थे.  दादी और नानी की जुबानी. पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे तो शाम ढलते ही सबकी  एक जुट हो कर जमा करती थी. कहानियों की मंडली और बच्चे सब भूल कर रम जाते थे इन कहानियों में,कभी कभी तो बड़े भी  इस मंडली का हिस्सा बन जाया करते थे. लेकिन आज कल  टीवी और इंटरनेट की दुनिया ने बचपन को तो छिना ही है, साथ ही कहानियों को भी गुम  कर दिया है . बचपन भले ही बेफिक्र होता है पर जाने अनजाने उलझ सा जाता है. कहानियां एक सहारा है उस उलझन से निकलने का.

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