घर जरूरत की हर सुखसुविधा से युक्त होना चाहिए और यह तब ज्यादा जरूरी हो जाता है जब आप सीनियर सिटिजन की श्रेणी में आ जाएं क्योंकि स्वयं की सुरक्षा आप के लिए प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए. जीवन चलने का नाम है - बाल्यावस्था, युवावस्था और फिर वृद्धावस्था. इसी प्रकार विवाह, बच्चे और फिर मम्मीपापा से दादीदादा बनने का सफर. जीवन अपनी निर्बाध गति से चलता ही रहता है. युवावस्था में हम घर बनवाते हैं अपने परिवार और बच्चों की जरूरत के मुताबिक. परंतु एक दौर ऐसा आता है जब बच्चे अपनी जिंदगी में सैट हो जाते हैं और घर में रह जाते हैं केवल बुजुर्ग पति व पत्नी.

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