Self Confidence: रोज की तरह माया आज भी औफिस 10 बजे समय पर ही पहुंची लेकिन रोज कि तरह कोई भी औफिस नहीं आया था. सभी लोग अकसर रोज ही लेट आते हैं. हर दिन ऐसा देख कर उस को ऐसा लगता मानो वो बेवकूफ है जो रोज समय पर औफिस आ जाती है. सो, उस ने सोचा कि चलो, आज मैं भी औफिस थोड़ा लेट जाती हूं और वह भी सभी की तरह 11 बजे औफिस पहुंची लेकिन शायद उस का समय खराब था क्योंकि ठीक उसी दिन बौस का राउंड हो गया और उस की एब्सेंट लग गई.
माया को मन ही मन बहुत पछतावा हो रहा था कि आखिर वह क्यों लेट आई क्योंकि उस की इस एब्सेंट ने उस के रोज समय पर आने के दावे को झूठा बना या कर दिया था जबकि हर जगह समय पर जाना या पहुंचना मानो माया की आदत का हिस्सा था.
माया की तरह कोई वक्त का पाबंद होता है तो कोई साफ़सफाई का आदी तो कोई रोज सुबह उठ कर मौर्निंग वाक पर जाता है. किसी की सुबह जल्दी उठने की आदत होती है तो किसी की देर रात सोने की. हमारी यही आदतें हमें दूसरों से अलग बनाती हैं. सो, आप जैसे हैं वैसे ही बने रहना एक अच्छी आदत है. लेकिन यदि आप किसी बुरी आदत के शिकार हैं तब आप दूसरों के लिए अपनी आदत में बदलाव करते हैं, तब यह एक अच्छी आदत बन सकती है.
क्या हमें दूसरों के अनुसार खुद के आदत को बदलना चाहिए या फिर जैसे हैं वैसे ही बने रहना चाहिए, जानने के लिए यह लेख पढना आप के लिए फायदेमंद हो सकता है. जो लोग 24 घंटे मोबाइल से चिपके रहते हैं उन के लिए यह बेकार है क्योंकि वे तो समाज के पिछड़े लोग हैं जो कुछ भी उत्पादक काम नहीं कर रहे. वे पैरासाइट हैं, परजीवी हैं.
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