‘बेटी और बहू में कोई फर्क नहीं होता. शादी के बाद बेटी घर से विदा होती है तो घर में बहू के रूप में बेटी आ जाती है.’ यह एक आदर्श परिवार की आदर्श सोच है. पर ऐसा कितने घरों में होता है, यह देखने की बात है, क्योंकि जब कोई लड़की किसी घर में बहू बन कर जाती है तो यह पाया गया है कि वहां सासससुर, ननददेवर, जेठजेठानी उस पर हुक्म बजाते नजर आते हैं. गीता के साथ भी ऐसा हुआ. उस की शादी मुकेश के साथ कुछ दिन पहले ही हुई थी. एक शाम को जब मुकेश घर लौटा तो देखा कि गीता का मूड उखड़ा हुआ था.

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