हम लोग एक बार उदयपुर घूमने गए. रास्ते में एक दिन के लिए हम अपने एक परिचित के यहां रुक गए. चलते समय उन परिचित ने रास्ते के लिए डब्बे में पैक कर के खाना दिया. भूख लगने पर जब हम ने डब्बा खोला तो पाया कि जिस मिठाई के डब्बे में उन्होंने खाना रख कर दिया था उस में चारों ओर से फफूंद लगी थी. सारा खाना फेंकना पड़ा. इन सब घटनाओं के विपरीत, मेरी एक भाभी खाना इतनी अच्छी तरह से पैक करती हैं कि भूख न होने पर भी खाना खाने की इच्छा हो जाती है. वे साफसुथरे डब्बे में खाने के साथसाथ अचार, सलाद और मिठाई सब अलगअलग सिल्वर फौइल में पैक कर के रखती हैं. साथ ही जिस बैग में खाना होता है उस में डिस्पोजल प्लेट, गिलास, चम्मच, पेपर नैपकिन और बिछाने के लिए पेपर भी मौजूद होता है.

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