हाल ही में सुदीप की शादी हुई. सब को लड़की बहुत पसंद आई. अच्छे होटल में दावत... सबकुछ लड़के वालों के स्तर के अनुरूप ही था. पर ज्यादातर लोग दबी जबान से कह रहे थे, डाक्टर साहब (लड़के के पिता) ने रिश्ता बराबरी में नहीं किया. लड़की के पिता की फोटोग्राफी की दुकान थी और वे गूंगेबहरे भी थे. डाक्टर साहब ने कहा कि लड़की उन्हें पसंद आई और लड़की वालों ने हमारे स्तर के अनुरूप शादी कर दी, इस से ज्यादा हमें कुछ नहीं चाहिए. लोगों को जो कहना है, कहते रहें. उन्होंने घर वालों और कुछ समय बाद प्यार से बहू को भी यह बात समझा दी. बहू बहुत खुश हुई.

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