हर पल यहां जी भर जियो

कल के लिए आज को न खोना

विद्या बालन की बहुचर्चित फिल्म ‘कहानी’ की कहानी तो सब को याद होगी. एक गर्भवती महिला कोलकाता के गलीकूचों में अपने लापता पति को तलाशती फिरती है. दर्शकों को उस से हमदर्दी हो जाती है. उस की बेबसी पर दर्शकों को तरस आता है. एक तो उस की अवस्था ऐसी, उस पर पति कहीं लापता है लेकिन फिल्म के अंत में पता चलता है कि वह महिला गर्भवती नहीं है और उस का पति 2 साल पहले ही मर चुका है. वह तो अपने पति की मौत का बदला लेने आई थी और ये सब उस के नाटक का हिस्सा था. अजीब सी स्थिति बनती है. वह महिला इस बात को स्वीकार भी करती है कि उसे भी गर्भवती होने वाला स्वांग असली लगने लगा था. काश, यही सच होता. हमदर्दी रखने वाले दर्शकों को भी लगता है जिसे वह जीवन का दुख समझ रहे थे वह उतनी भयावह स्थिति नहीं थी. महिला मां बनने वाली थी और अपने पति को तलाश रही थी. उस के जीवन में एक उम्मीद तो बाकी थी. लेकिन वास्तविकता कितनी भयानक है कि वह अब कभी मां नहीं बन सकती क्योंकि उस का पति मर चुका है.

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इत्ती सी हंसी ढेर सारी खुशी

लाफ्टर थैरेपी बनाएं खुशियों का जरिया.

ललिता गोयल | February 22, 2015

दांत चमका तो लिए पर दिखाए नहीं, तो क्या फायदा? यहां दांत दिखाने से मतलब दिल खोल कर ठहाके लगा कर हंसने से है. रोजमर्रा की भागदौड़भरी स्ट्रैसफुल लाइफ में जहां लोगों पर तनाव व डिप्रैशन का साया है वहां लोग खुल कर हंसनाखिलखिलाना शायद भूल ही गए हैं. जिधर देखिए हैरानपरेशान, मायूस चेहरे दिखाई देते हैं. लेकिन आप शायद नहीं जानते सौ दर्दों की एक दवा है हंसना और खुल कर हंसना. जिस तरह चाय चीनी के बिना और समोसा आलू के बिना अधूरा है, उसी तरह हंसी के बिना जीवन अधूरा है. शायर जफर गोरखपुरी ने भी यह सही कहा है :

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सूक्तियां

ऐसी सीख जो सिखाए जीवन जीने की राह.

February 3, 2015

गलती

जीवन में ज्यादातर गलतियां केवल इसलिए होती हैं कि जहां हमें विचार से काम लेना चाहिए वहां हम भावुक हो जाते हैं और जहां भावुकता की आवश्यकता होती है वहां विचारों को अपनाते हैं.

दुर्बलता

यद्यपि शहद की मक्खियां निर्बल होती हैं, फिर भी वे सब मिल कर मधु निकालने वाले के प्राण तक ले लेती हैं, वैसे ही निर्बल पुरुष भी इकट्ठे हो कर बलवान शत्रु को नष्ट कर सकते हैं.

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जीवन एक कला करते रहें कुछ नया

जीवन को खुशहाली से जीने का क्या है फंडा?

कुशलता से कोई भी किया गया कार्य सफलता का मूलमंत्र होता है. हम और हमारा मन दोनों एक हो जाते हैं, तब जो कार्य होता है वह गुणात्मक दृष्टि से बेहतर होता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम अपने प्रति वफादार होते हैं. सिगरेट के पैकेट पर लिखा होता है, धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, हम उसे पढ़ते हैं, फिर भी सिगरेट जला लेते हैं. सूचना का भंडार ज्ञान नहीं होता है. ज्ञान का जन्म अनुभव की जमीन पर होता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम अपनेआप से प्यार नहीं करते हैं. अपनेआप के प्रति, अपने शरीर के प्रति, अपने मन के प्रति जिम्मेदार नहीं होते हैं. शरीर के प्रति सजगता ही सकारात्मक सोच के प्रति उत्साह जगाती है.

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