छोटी-मोटी तकरार से भी रिश्तों में बढ़ता है प्यार

किसी भी रिश्ते में प्यार के साथ-साथ विश्वास होना बहुत जरूरी है, तभी यह रिश्ता और गहरा हो पाता है.

June 15, 2019
किसी भी रिश्ते में प्यार के साथ-साथ विश्वास होना बहुत जरूरी है, तभी यह रिश्ता और गहरा हो पाता है. लेकिन अगर आपके रिलेशनशिप में झगड़े होते हैं, तो इसके फायदे बहुत हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे शोधकर्ता अमेरिकी लेखक जोसफ ग्रेनी की मानें, तो छोटी-मोटी तकरारों से रिलेशनशिप में आत्मीयता और विश्वास बढ़ता है.
इकालजिस्ट आरती श्राफ भी इस बात को स्वीकार करती हैं. वे कहती हैं कि प्यार में होने वाले बहस इस बात की ओर इशारा करती हैं कि रिलेशनशिप हेल्दी है और मैच्योरिटी की ओर बढ़ रहा है. लेकिन ये तकरार सही तरीके से होनी चाहिए, कहने का मतलब ये है कि अपने पार्टनर के प्रति रिस्पेक्टफुल होते हुए अपनी नाराजगी या गुस्सा जाहिर करना चाहिए. यहां हम कुछ ऐसे ही लोगों के एक्सपीरियंश और हमारे एक्सपर्ट जसलीन कौर सचदेव और विहान सान्याल के व्यू को शेयर कर रहे हैं.

पौजिटिव चीजों को न भूलें

कौमेडियन अमित टंडन की पत्नी सोनल एक प्रोफेशनल एचआर हैं. अमित कहते हैं कि रिलेशनशिप में लड़ाई-झगड़ों की अच्छी हिस्सेदारी होती है. शुरू में हम दोनों एक-दूसरे के अनुकूल खुद को बदलने की कोशिश करते थे, लेकिन समय के साथ हमें ये अहसास हुआ कि एक सीमा के बाद हम खुद को नहीं बदल सकते हैं, अत: असहमति तय हैं. इसलिए अमित और सोनल ने लड़ाई के कुछ बेसिक नियम बनाए हैं. जैसे कि कोई भी तेज आवाज में बात नहीं करेगा और पुरानी बातों को नए झगड़े में शामिल नहीं किया जाएगा. जब हम लड़ते हैं, तो हम ये नहीं भूलते हैं कि हमने अपने रिलेशनशिप में कितनी सारी पॉजिटिव चीजें अचीव की हैं.

एक्सपर्ट व्यू: सायकोथैरपिस्ट विहान सान्याल अपने पार्टनर के पॉइंट ऑफ व्यू को सुनने के फायदे बताते हुए कहते हैं कि आपको इस बात को समझना चाहिए कि आपका पार्टनर आपसे कहना क्या चाहता है. उसकी गलतियों को ढूंढ़कर उससे झगड़ा करने के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कैसे समस्या को हल किया जा सकता है.

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अपनी जिम्मेदारी समझें

लायर टीना शाह कहती हैं कि वे अपने पार्टनर जमील खान, जो कि जिम इंस्ट्रक्टर हैं, के साथ बहस के दौरान बहुत जल्दी अपना आपा खो देती थीं, लेकिन समय के साथ उनको इस बात का अहसास हुआ कि लड़ाई को लंबा खींचने का कोई फायदा नहीं है. एक बार जब मैं किसी बात पर अपनी असहमति अपने पार्टनर से जता देती हूं, तो फिर उसे बार-बार नहीं दोहराती हूं. बल्कि उसे समझ कर दूर करने के लिए पर्याप्त समय देती हूं. साथ ही साथ मैंने ये भी सीखा है कि अपनी गलतियों को स्वीकारने की जिम्मेदारी भी मेरी ही है. नाम लेकर आरोप लगाना और सामान इधर-उधर फेंकना इस बात की ओर इशारा करता है कि आप अपने पार्टनर का रिस्पेक्ट नहीं करते हैं.

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एक्सपर्ट व्यू: क्लीनिकल साइकालजिस्ट जसलीन कौर सचदेव कहती हैं कि लड़ाई की शुरुआत जिस प्रकार से होता है उसी से ये तय होता है कि लड़ाई का अंत किस प्रकार होगा. अपने पार्टनर को उसी की भाषा में जवाब देने की बजाय उसे इस बात का अहसास दिलाने की कोशिश करें कि उसकी बातों का आप को क्या फील हो रहा है. तुम या तुम हमेशा से जैसी लाइनों से बात शुरू करने पर आपका पार्टनर डिफेंसिव हो सकता है.

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