लंबा कद, मुसकुराती आंखों में कहीं छिपा हुआ सा दर्द, दिल में कुछ करने की ललक पर जमाने की बेरुखी से परेशान मन लिए 27 साल की अनुभा (बदला हुआ नाम ) बताती  हैं,  “ मैं आगरे की रहने वाली हूं. ग्रैजुएशन के बाद दिल्ली आ कर मैं ने  फैशन डिजाइनिंग कोर्स ज्वाइन किया. जब मैं यह कोर्स कर रही थी तभी मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटी जिस से मेरी जिंदगी  का रुख बदल गया.

“दरअसल एक लड़के अमित (बदला हुआ नाम) के साथ मेरी फ्रेंडशिप थी. हम एकदूसरे को पसंद करते थे. समय के साथ हम  दोनों को लगा कि अब हमें शादी कर लेनी चाहिए. मगर हमारे घर वाले इस के लिए  तैयार नहीं हुए.  मैं ने अमित से कहा कि हमें शांति से अलग हो जाना चाहिए. वह इस के लिए तैयार नहीं था. वह चाहता था कि हम भले ही दूसरी जगह शादी कर ले फिर भी एकदूसरे से कनेक्टेड रहे. मगर यह बात मुझे मंजूर नहीं थी. उस ने मुझे धमकी दी कि अगर तुम मेरी नहीं हुई तो मैं तुम्हें किसी और की भी  नहीं होने दूंगा. उस ने एक साइको की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया. मेरी   मम्मी का फोन ट्रेक कर लिया. मम्मी के नंबर से कई कई बार मेरे पास कौल आने  लगे. जब कि वे कौल मम्मी नहीं बल्कि अमित करता था. उस ने मुझे धमकी दी कि बात न मानने पर फोटो एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा ताकि मैं बदनाम हो जाऊं.

जब पत्नी का हो अफेयर

“मैं डर गई थी फिर भी मैं ने उस की बात नहीं मानी. एक दिन  जब मैं लौट रही थी तो उस ने मुझे जबरदस्ती अपनी गाड़ी में बिठा लिया. फिर   हमारी कॉमन फ्रेंड के जरिए मेरे घर यह सन्देश भिजवा दिया कि मुझे 3 -4  लड़के पकड़ कर ले गए हैं. बदहवास से मेरे पैरेंट्स मुझे बचाने दिल्ली दौड़े आये.  जाहिर है आसपास वालों को भी यह खबर मिल गई.

इधर अमित मुझे गाड़ी में बिठा  कर अपनी खुन्नस निकालने लगा. मुझे डराने धमकाने लगा. उस ने मेरे बाल भी  नोचे. वह इस बात पर क्रोधित था कि उस के बगैर में खुश कैसे रह सकती हूं. मैं ने उसे समझाना चाहा कि मेरा करियर अभी पीक पर चल रहा है और मैं अपना  पूरा ध्यान पढ़ाई और करियर पर देना चाहती हूं. पर वह मुझ से लड़ता रहा. तभी उस के पेरेंट्स का फोन आ गया तो उस ने मुझे छोड़ दिया.

सिर्फ  इतना ही नहीं मुझे बदनाम करने के लिए उस ने मेरी एक साड़ी वाली फोटो को  फोटोशौप में एडिट कर मेरी मांग  में सिंदूर भर दिया और मेरे आसपड़ोस के घरों  में फिंकवा दिया. उस ने यह अफवाह फैला दी कि मैं ने किसी दलित लड़के के  साथ भाग कर शादी कर ली है और मेरे घर वालों ने मुझे छुड़ाने के लिए उस के  मांबाप को 50 -60  हजार रूपए भी दिए हैं. उस ने मेरे मैसेजेस के साथ भी  छेड़छाड़ कर उन्हें इस तरह रीराइट किया जैसे मैं उस के पीछे पड़ी हूं और मैं ने ही उसे मिलने को दिल्ली बुलाया था.

“झूठी अफवाहों को उस ने  इतनी हवा दी कि आज लोग मुझे सही होने पर भी गलत समझते हैं. जहां कहीं भी   मेरी शादी की बात चलती है तो यह अफवाह अपना असर दिखाने लगती है, लड़के वाले कोई स्पष्ट कारण बताए बिना शादी करने से इंकार कर देते हैं. 2  साल पहले अमित की शादी हो गई पर मैं आज तक उस की वजह से खुली हवा में सांस नहीं ले  पा रही हूं. मेरी शादी भी नहीं हो पा रही है और मैं स्ट्रैस की वजह से अपने   करियर पर भी ध्यान नहीं दे पा रही. मैं ने कोई गलती नहीं की  पर उस ने  मेरी जिंदगी में इतने तूफान भर दिए हैं कि स्ट्रैस से पापा बीमार रहने लगे हैं. मेरे करियर पर भी बुरा असर पड़ रहा है. मेरा सवाल यह है कि सिर्फ लड़कियों को ही जज क्यों किया जाता है. सच्चाई जाने बगैर बड़ी आसानी से मान  लिया जाता है कि लड़की का चरित्र ही खराब होगा. अफवाहें  फैला कर लड़कियों की  जिंदगी खराब कर दी जाती है पर लड़के मजे से जीते हैं.”

कौन फैलाते हैं अफवाह

अफवाहें अक्सर जलन और क्रोध का नतीजा  होती हैं. किसी से बदला लेने या उसे नीचा दिखाने के मकसद से कुछ लोग ऐसी  हरकतों को अंजाम देते हैं. लोग  अफवाहों को  जैसे का तैसा स्वीकार कर लेते  हैं. असलियत पता लगाने का प्रयास भी नहीं करते.

जिस व्यक्ति के बारे  में ऐसी अफवाहें उड़ाई जाती है उसे गलती किए बिना भी बहुत कुछ सहना पड़ता है. अफवाहें उस की जिंदगी में तूफान ला सकती हैं. उस की मानसिक सेहत पर असर डाल सकती हैं. उस का जॉब करना दूभर हो सकता है. पुरानेनए रिश्ते टूट सकते हैं. दूसरों की नजरों में उस की अहमियत घट सकती है. उस के करीब उस से  दूर हो सकते हैं. वह किसी भी काम में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता. इस  की वजह से वह एंजायटी, डिप्रेशन ,स्ट्रैस आदि का शिकार हो सकता है. परेशान  हो कर सुसाइड भी कर सकता है.

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अफसोस की बात यह होती है कि दूसरे लोग  जो इस तरह की बातें होते देखते हैं वह भी अक्सर सही व्यक्ति का साथ नहीं  देते. लोग उस व्यक्ति से कटने लगते हैं जिस के खिलाफ अफवाहें उड़ाई जाती  हैं. लोगों को डर होता है कि कहीं अगला शिकार वे ही न बन जाए.

अफवाहें  हमेशा शक के आधार पर फलतीफूलती हैं. ये ऐसी सूचनाओं के रूप में फैलती हैं  जो लोगों के लिए नई और रोचक हो. इन की सत्यता पर हमेशा शक होता है. ये  अनवेरीफाइड होती है. प्रत्यक्षअप्रत्यक्ष रूप से लोगों से जुड़ी होती है या किसी के व्यक्तिगत जीवन से वास्ता रखती है. मान लीजिए कोई लड़का कई दिनों  से औफिस या स्कूल नहीं आ रहा तो ऐसे में बड़ी तेजी से उस के बीमार होने या जीवन में कोई बड़ा हादसा हो जाने की अफवाह फैला दी जाती है.

देश में जनवरी 2017 से भीड़ एक बच्चे के अपहरण के आरोप में 33  लोगों की हत्या कर चुकी है. यह सब व्हाट्सएप पर एक फर्जी मैसेज की वजह से हुआ. इस मैसेज पर  यकीन कर केवल शक के आधार पर भीड़ बेगुनाहों को मौत के घाट उतार सकती है तो  आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अफवाहें और क्याक्या गुल खिला सकती है.

2006 में प्रकाशित प्रशांत बोडिया और राल्फ रोजनो के रिसर्च के मुताबिक के मुताबिक ज्यादा चिंताग्रस्त और उत्सुक लोग अफवाहें ज्यादा फैलाते हैं. किसी के स्टेटस और लोकप्रियता से चिढ़ने वाले शख्स अक्सर अफवाहों का सहारा लेते हैं. गलत तरीके से किसी का नाम खराब करना या उसे बदनाम करना उन का मकसद होता है.

यह संभव नहीं कि हम हर किसी के अच्छे दोस्त बन जाएं या  हमें हर कोई पसंद आए. मगर किसी को पसंद न करने का मतलब यह नहीं कि हमें उस   के खिलाफ अफवाहे फैलाने या भलाईबुराई करने का अधिकार मिल गया. अपना स्टेटस  बढ़ाने या ग्रुप में लोकप्रियता हासिल करने का यह गलत तरीका है. वास्तविक  लोकप्रियता इंसान के आचरण पर निर्भर करती है. किसी से इस तरह की  दुश्मनी  निकाल कर या दूसरों का अपमान कर व्यक्ति अपना सम्मान तो खोता ही है  दूसरे  लोगों का उस पर विश्वास भी ख़त्म हो जाता है.

यदि आप बन जाएं शिकार

यदि  कभी आप के साथ इस तरह की घटना हो जाए तो डिप्रेशन में आ कर कुछ गलत फैसला लेने से बेहतर है कि आप यह बात अपने पेरेंट्स ,टीचर, काउंसलर या  दोस्तों  से शेयर करें. अपनी बेगुनाही का सबूत तैयार करें और सर ऊंचा कर हर सवाल का  जवाब दें. अपनी जिंदगी के लिए कोई लक्ष्य तैयार करें और इन बातों से दिमाग  हटा कर पूरी एकाग्रता से अपने मकसद को पूरा करने में ध्यान दें. अपने  दोस्तों के साथ मिलनाजुलना, मस्ती करना न छोड़ें.

यही नहीं जो शख्स  आप के खिलाफ अफवाह उड़ा रहा है उस से जा कर मिले. शांति से उस से अपनी बात  कहें. आप के मन में जो भी सवाल उठ रहे हैं या आप उस से जो भी कहना चाहती हैं वह सब बोल कर अपनी भड़ास निकालें. उसे ताकीद करें कि आइंदा उल्टासीधा  बोलने का अंजाम बहुत बुरा होगा. अपनी बातें पूरे विश्वास, स्पष्टता और  मैच्योरिटी से करें. इस के बाद उस के जवाब का इंतजार किए बगैर वहां से निकल आएं ताकि वह शख्स आप की बातों पर गहराई से विचार करने को मजबूर हो जाए.

यदि औफिस/आसपड़ोस में आप के खिलाफ अफवाहें फैलने लगें या गौसिप होने लगे और यह काम वही करें. जिसे आप अपनी सहेली या करीबी समझती थी तो यह सब सहन करना कठिन हो जाता है. धीरे-धीरे आप को महसूस होने लगेगा कि दूसरे लोग भी आप से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में यदि बात छोटीमोटी हो तब तो आप इस परिस्थिति को  आसानी से हैंडल कर सकती हैं. पर यदि बात बड़ी हो और आप मानसिक रूप से परेशान  रहने लगी है तो वह जगह छोड़ देना बेहतर होगा. क्यों कि मानसिक शांति से  बढ़ कर कुछ भी नहीं होता.

कुछ लोग दूसरों की निजी बातें या गलत  भड़काऊ सूचनाएं फैलाने में मजे लेते हैं. भले ही वे सच हो या नहीं. इसे आप  गौसिप कह सकते हैं. ऐसा वे दूसरे को चोट पहुंचा कर अच्छा महसूस करने के लिए करते हैं. इस तरह के गौसिप दूसरे व्यक्ति के सम्मान को चोट पहुंचाते हैं. वे  जिसे पसंद नहीं करते उस के खिलाफ झूठी बातें बोल कर भले ही अपना  मकसद पूरा कर ले क्यों कि सच्चाई अक्सर सामने नहीं आ पाती. मगर  वे  खुद को  इस के लिए कभी माफ नहीं कर पाएंगे.

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गौसिप करने वालों से दूर रहे

ऐसे लोगों से हमेशा दूर रहे जिन्हें पीठ पीछे दूसरों की बुराई और अपमान करने  में आनंद आता है. क्यों कि जो आज आप से दूसरों की बुराई कर रहे हैं वे  आप की बुराई दूसरों से करने से भी बाज नहीं आएंगे.

बेहतर है कि आप न सिर्फ अफवाहें फैलाने या गौसिप करने से बचे बल्कि ऐसा कर रहे व्यक्ति से भी  दूरी बढ़ा ले. यदि कोई शख्स पीठ पीछे किसी की बुराई कर रहा है तो सॉरी कह कर उस ग्रुप से बाहर निकल आए. निकलने से पहले स्पष्ट रूप से कहें कि जिस के  बारे में यह बात कही जा रही है जब वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए   मौजूद नहीं तो फिर उस के बारे में बात करने में आप कंफर्टेबल नहीं. ऐसा कर  के आप न केवल उस गॉसिप चेन को तोड़ेंगे बल्कि दूसरे लोगों का विश्वास भी  जीत सकेंगे. दूसरे लोग यह महसूस करेंगे कि आप ऐसी फालतू बातों में रुचि  नहीं रखते. इस तरह आप दूसरों के आगे एक उदाहरण पेश करेंगे.

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