लेखक-अमिता सक्सेना 

आज बड़ी उम्र के लोग कहते हैं कि फादर डे और डौटर डे जैसे त्योहार चोंचले हैं, पैसे कमाने के तरीके हैं. पुराने जमाने में यह सब नहीं होता था. यह सही है कि व्यावसायिक रूप से तो यह वाकई नहीं होता था पर भावनात्मक दो सौ प्रतिशत होता था. बस, हम लोगों ने कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया. मैं एक छोटी सी घटना आप को कहानी के रूप में सुनाऊंगी, तब आप सम?ा पाएंगे. मधु ने परीक्षा का रिजल्ट देखा, तो खुशी से उछल पड़ी. पर वह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी. एक घबराहट उस के अंदर समा गई क्योंकि अब उसे ट्रेनिंग के वास्ते 7-8 महीने के लिए दिल्ली जाना था.

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