गृहिणी पूरे परिवार की धुरी होती है. खुद की परवाह किए बिना वह अपने पति, सासससुर और बच्चों की देखरेख में लीन रहती है. सुबह से शाम तक चकरघिन्नी की तरह सारे घर में घूमती और सब का ध्यान रखती गृहिणी के पास अपने लिए वक्त ही कहां होता है कि वह अपनी मनमरजी से थोड़ा वक्त निकाल कर अपना मनपसंद काम कर सके.

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