आज भी बिहार और झारखंड के कई इलाकों में आटो रिक्शा, बस और टैक्सी जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है. कहीं जाना है तो टमटम या बैलगाड़़ी की सवारी कीजिए या फिर पैदल ही चलिए. कहीं जल्दीबाजी में जाना हो तो कोई उपाय नहीं है. गांवों और कस्बों में टमटम और बैलगाड़ी से नजात दिला रही है एक गाड़ी. जिसे कहा जाता है जुगाड़ गाड़ी. जिसे प्यार से पटपटवा, छड़छड़वा, फटफटिवा, खरखरवा, ठेलवागाड़ी और न जाने क्या-क्या नाम से पुकारा जाता है, लेकिन वह जुगाड़ गाड़ी के नाम से ही फेमस है.

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