Family Story in Hindi : विनायक से शादी कर के तृप्ति को अपनेआप पर गुमान हो रहा था लेकिन वह समझ नहीं पाई कि पीतल पर चढ़ा सोने का पानी ज्यादा चमकता है. विनायक का असली रूप तो कुछ और ही था.
तृप्ति चंडीगढ़ में किराए के मकान की बालकनी में खड़ी अपलक दृष्टि से सामने का दृश्य निहार रही थी. बालकनी के ठीक सामने एक झील दिखाई देती थी. झील के किनारे खड़े ताड़ के वृक्ष उस के सौंदर्य में चारचांद लगा रहे थे. झील के किनारे पक्षियों का आनाजाना लगा रहता था.
क्रौंच पक्षी का जोड़ा बड़े प्यार से इधरउधर विहार कर रहा था कि तभी एक चील आसमान से उड़ती हुई आई और एक क्रौंच पक्षी को अपनी चोंच में दबा कर उड़ गई. दूसरा पक्षी जोरजोर से शोर मचाने लगा. वह सिर पटकपटक कर झील के किनारे बेचैनी से इधरउधर घूमने लगा.
उस का रुदन तृप्ति को बेचैन कर रहा था. इतने शांत, सरस और सुंदर वातावरण में उस के अश्रुकोष से 2 गरमगरम मोती लुढ़क कर गालों पर आ गए. तभी उस की 7 वर्षीया बेटी ईषा ने उस का हाथ पकड़ कर पूछा, ‘‘मम्मी, आप क्यों रो रही हो?’’
‘‘बस, वैसे ही, बेटा’’ संक्षिप्त सा उत्तर दे कर तृप्ति ने उसे आलिंगनबद्ध कर लिया. रुलाई थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी. ‘‘मम्मी, आप अब बहुत रोने लगी हो और जब हम रोते हैं तो कहती हो अच्छे बच्चे रोते नहीं. गंदे बच्चे रोते हैं.’’
छोटी सी बच्ची के पास तृप्ति को चुप कराने के लिए शब्द नहीं थे. वह अभी इतनी छोटी थी कि तृप्ति उसे अपनी बात भी नहीं समझी सकती थी लेकिन उस के मन में न रुकने वाला तूफान उठ खड़ा हुआ था. उस चील में उसे राफिला खान नजर आ रही थी जो उस के जीवन में चील की भांति आई और उस से उस के पति को छीन कर ले गई. वह उस के जीवन में सुनामी की भांति आई और हंसतेखेलते परिवार को रौंद कर चली गई.
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