संपूर्णानंदजी बड़े उत्साह से विधायक दल की बैठक में पहुंचे थे. चुनाव में उन्होंने और उन के अनुयायियों ने जीतोड़ परिश्रम किया था फिर भी वह पूर्णतया आश्वस्त नहीं थे कि उन के जनतांत्रिक दल को बहुमत मिलेगा.

जैसे ही उन के राज्य के चुनाव परिणाम आने लगे, वह सुखद आश्चर्य से भरपूर अद्भुत अनुभूति के सागर में डूबनेउतराने लगे. मुख्यमंत्री की कुरसी उन के पूरे वजूद पर छा गई थी. आंखें मूंदते तो लगता हाथ बढ़ा कर उसे छू लेंगे. स्वप्न में स्वयं को उसी कुरसी पर बैठा पाते. दिन में दिवास्वप्न देखते और अपने घर वालों से भी मुख्यमंत्री की भांति ही व्यवहार करते.

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