डिप्रैशन बहुत आम बीमारी हो चली है लेकिन इस का बढ़ना कितना नुकसानदेह होता है, यह हर कोई नहीं समझ पाता. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत द्वारा की गई आत्महत्या जिस डिप्रैशन की देन बनी उस से निबटना कोई मुश्किल काम नहीं.

सीधेसीधे कहा जाए तो अवसाद यानी डिप्रैशन  नकारात्मक विचारों, हताशा और निराशा का एक ऐसा जाल है जिसे सभी, खासतौर से युवा, मकड़ी की तरह अपने इर्दगिर्द बुनते हैं और जब खुद के ही बुने जाल से बाहर निकलने में खुद को असमर्थ पाते हैं तो बिना कुछ सोचेसमझे आत्महत्या कर लेते हैं. पीछे रह जाते हैं रोतेबिलखते कुछ अपने, सगे वाले, दोस्त और रिश्तेदार जिन के मुंह से तो यह निकलता है कि अरे, यह तो ऐसा नहीं था. लेकिन लिहाज के चलते मन की बात मन ही में दब कर रह जाती है कि इस से ऐसी कायरता की उम्मीद नहीं थी.

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