आज पूरा विश्व ही एक अवसादी दौर से गुजर रहा है. कहीं कारोबार के खत्म होने का अवसाद  है तो कहीं कैरियर के रुक जाने का अवसाद. रिपोर्ट्स की मानें तो अवसाद में 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. कई बार तो यह अवसाद इतना हावी हो जाता है कि एक इंसान को अपनी जिंदगी से इतर मौत को गले लगाना अच्छा विकल्प लगता है. जिसमें से एक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का चमकता हुआ सितारा सुशांत सिंह राजपूत भी अस्त हो गया.

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