chronic kidney disease : रवि नागर के बड़े भाई नीरज नागर, जिन की आयु अभी 55 वर्ष थी, की कलाइयों के ऊपरी हिस्से में कुछ दिनों से सूजन और दर्द था. उन्होंने नौकर से चारपांच दिन तेलमालिश करवाई. उन को लगा कि ठंड की वजह से सूजन आ गई है. मगर मालिश से कोई खास फर्क नहीं पड़ा. इधर कुछ दिनों से यूरिन करने में भी कुछ परेशानी हो रही थी. यूरिन महसूस तो होता था मगर खुल कर होता नहीं था.
दिसंबर का महीना था. ठंड अधिक थी. लिहाजा, उन्होंने इन लक्षणों को ठंड के कारण उत्पन्न लक्षण समझा और डाक्टर के पास नहीं गए. एक दिन जब अचानक चक्कर आया तो उन की पत्नी ने उन्हें डाक्टर के पास जाने की सलाह दी. शाम को पतिपत्नी अपने फैमिली डाक्टर के पास गए. डाक्टर ने थोड़ी देर एग्जामिन किया और कुछ टैस्ट लिखे. दूसरे दिन जब टैस्ट रिपोर्ट आईं तो डाक्टर ने तुरंत हौस्पिटल में एडमिट होने के लिए कहा.

नीरज नागर के रक्त में क्रिएटिनिन की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ी हुई थी. यूरिया और पोटैशियम भी खतरनाक स्तर पर थे. हौस्पिटल में एक हफ्ते के अंदर 3 बार उन का डायलिसिस हुआ. उन की किडनी की कार्यक्षमता बिलकुल खत्म हो चुकी थी. वे मात्र 10 फीसद ही काम कर रही थीं. डायलिसिस के बाद भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ा. दो हफ्ते हौस्पिटल के आईसीयू वार्ड में रहे और वहीं उन का निधन हो गया.
नीरज नागर शरीर से हष्टपुष्ट थे. रोज सुबह मौर्निंग वाक के लिए जाते थे. शाम को दोस्तों के साथ बैडमिंटन कोर्ट में देखे जाते थे. वर्किंग थे. सेल्स टैक्स डिपार्टमैंट में अधिकारी थे. किडनी की समस्या ने दबेपांव कब उन के शरीर में प्रवेश किया, पता ही नहीं चला. हाथों में सूजन के तौर पर हलकेफुलके लक्षण भी तब दिखे जब किडनी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी. डाक्टर ट्रांसप्लांट के बारे में अभी सोच ही रहे थे कि उन्होंने देह त्याग दी.

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