Suspense Story Hindi: किरपाल की शादी की रात गांव की हवा मिश्री और उल्लास से भरी थी लेकिन नई दुलहन प्रीति के कमरे की हवा में एक अजीब सी गरमी थी. वह खिड़की से बाहर देख रही थी जहां अमन बरगद के पेड़ के नीचे अकेला खड़ा था. उस की निगाहें नीची थीं, मानो वह अपने ही भाई की शादी में शरीक होने का पाप कर रहा हो.

उस रात, जब किरपाल गहरी नींद में सो गया, प्रीति ने अपनी डायरी निकाली. पन्ने पलटे, एक तसवीर निकली अमन की. उस ने उसे चूमा और लिखा : ‘आज मैं ने इस घर में प्रवेश किया. दरवाजा किरपाल ने खोला, पर मंजलि तुम हो, अमन. यह शादी मेरी नहीं, हमारे मिलन की पहली सीढ़ी है. धैर्य रखो, हमारा समय आएगा.’

‘‘तुम यहां क्यों खड़े हो?’’ उधर किरपाल ने पीछे से आ कर अमन के कंधे पर हाथ रखा.

अमन चौंका, ‘‘कुछ नहीं, भैया. बस, तुम्हारी खुशी देख रहा था.’’

‘‘प्रीति को देखा?’’ किरपाल की आंखों में गर्व था, ‘‘सुंदर है न?’’

अमन ने सिर हिलाया, पर उस का गला सूख गया, बोला, ‘‘हां. बहुत.’’

शादी के 2 महीने बाद किरपाल चंडीगढ़ एयरपोर्ट जा रहा था. प्रीति ने उसे दरवाजे तक छोड़ा. ‘‘सावधानी से जाना,’’ उस ने कहा और हाथ उस के गाल पर रखा.

‘‘तुम चिंता मत करो,’’ किरपाल मुसकराया.

प्रीति की आंखों में एक चमक दौड़ गई. ‘‘जल्दी लौटना.’’

वह खिड़की से तब तक देखती रही जब तक कार आंखों से ओ?ाल नहीं हो गई. फिर वह अंदर गई, फोन उठाया और एक नंबर डायल किया.

‘‘हां, वह चला गया अब तुम्हारा काम है इसे पूरा करना.’’

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