हम अपनी भाभी के साथ उन की सहेली के घर गए थे. बड़ी आत्मीयता से मिलने के साथ उन्होंने हमें कुछ जलपान परोसा मगर हम ने यह कह कर कि मुंह में छाले हैं, कुछ भी खाने से इनकार कर दिया. वे बोलीं, ‘‘कब से हैं ये छाले? जरा रुकिए,’’ कह कर वे घर के पिछवाड़े चली गईं और कुछ ही पलों में कुछ पत्ते हाथ में लिए आईं. हम ने देखा पत्ते एकदम साफ और हरे थे.

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