मुंबई के एक नशा मुक्ति केंद्र को देख कर पता चलता है कि वहां समाज के किस वर्ग से लोग आते हैं. यहां ऐसे अमीर लोगों के किशोर बच्चों की संख्या ज्यादा है, जिन के पास पैसा तो बहुत है पर अपने बच्चों का ध्यान रखने के लिए समय बिलकुल नहीं. तय रूटीन के अनुसार ये बच्चे महीने में 2 बार विदेश घूमने जाते हैं, खातेपीते हैं, फिल्में इत्यादि देखते हैं.

Tags:
COMMENT