Health Awareness: ब्लडप्रैशर को यों ही साइलैंट किलर नहीं कहा जाता. अगर यह इतनी ही तेजी से छूत के रोग की तरह फैलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब यही सोचसोच कर लोगों का ब्लडप्रैशर हाई होने लगेगा कि जब सब को है तो मु झे क्यों नहीं. वक्त रहते अगर इस का इलाज और नियंत्रण न किया जाए तो कई जानलेवा और लाइलाज बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, मसलन जिंदगीभर साथ रह कर रुलाती रहने वाली डायबिटीज, दिल से जुड़ी सब से खास बीमारी हार्टअटैक के अलावा जानलेवा हार्टफैलियर, ब्रेनस्ट्रौक, किडनी रोग, रेटिनोपैथी जैसी आंख की बीमारी, पैर की नसों की पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और खासतौर से पुरुषों में सैक्स कमजोरी.

सीधा सा मतलब यह कि एक अकेला ब्लडप्रैशर ढेर सारी बीमारियों का दरवाजा या जनक है, इसलिए सब से पहले इस से ही बच कर रहा जाए ताकि दूसरी बीमारियों के खतरे काफी कम हो जाएं. इस से बचा कैसे जाए, इस से पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह बीमारी है क्या और कैसे होती है. इस के नाम का संधिविच्छेद करें तो सीधा सा मतलब यह निकलता है कि हमारी रगों में दौड़ते खून का नसों की दीवारों में दबाव.

जब भी कोई इस की चपेट में आता है या जिस का इस से पहली बार वास्ता पड़ता है तो 2 नंबर सामने आते हैं 120/80 जो सामान्य स्वस्थ व्यक्ति का नौर्मल ब्लडप्रैशर होता है. मशीन से जांच करने पर यानी रीडिंग लेने पर ये नंबर कमज्यादा होते हैं तो वे ब्लडप्रैशर होने का इशारा होते हैं.

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