पहले हम ज्यादातर अपने परिवार में या फिर पड़ोस में बुजुर्गों को ही औस्टियोपोरोसिस की वजह से बांह, पैर या फिर कूल्हे के फ्रैक्चर आदि से पीडि़त देखते थे, लेकिन अब औस्टियोपोरोसिस के लक्षण अपनी उम्र के बमुश्किल तीसरे दशक में पहुंचे युवाओं में भी दिखने लगे हैं. डाक्टर इस की वजह जीवनशैली में शारीरिक श्रम की कमी बताते हैं, जिस में व्यक्ति ज्यादातर समय बिना कोई मेहनत का काम किए बैठा रहता है.

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