लाइफस्टाइल में बदलाव, पढ़ाई और करियर में लगने वाला लंबा समय, तीस-पैंतीस साल के बाद शादी और नौकरी की झंझटों के बीच कई औरतों का माँ बनने का सपना अधूरा रह जाता है. अधिक उम्र हो जाने पर जल्दी कंसीव भी नहीं कर पातीं और कंसीव हो जाए तो मिसकैरिज का ख़तरा बना रहता है. बहुतेरी महिलायें सही पार्टनर ना मिलने के कारण सिंगल ही रह जाती हैं लेकिन माँ बनने का सपना तो उनकी आँखों में भी तैरता है. आजकल बहुतेरी महिलायें सिंगल मदर बनने की चाह रखती हैं. ढलती उम्र के साथ ये सपना और जवान होने लगता है. दिल चाहता है कि कोई तो अपना हो जो बुढ़ापे में उंगली थामे, रोटी खिलाये और बीमार पड़ने पर डॉक्टर के पास ले जाए.

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