अब जबकि पूरी दुनिया कोरोना के करीब करीब पहले चक्र के कहर को झेल चुकी है और बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो गई है, तब यह सच्चाई सामने आ रही है कि कोरोना के शिकंजे से किशोर मुक्त नहीं हैं बल्कि बड़ी तादाद में किशोर इसके जानलेवा शिकंजे में फंस गये हैं. कम उम्र होने के नाते सीधे सीधे इनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण भले कम हों, वयस्कों और बूढ़ों के मुकाबले इनका डेथ रेट भले कम हो लेकिन इन्हें कई दूसरे तरह के संकटों से जूझना पड़ रहा है, जो समाज के दूसरे आयुवर्गों के मुकाबले ज्यादा कठिन है.

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