लेखक-डा. मधुकर एस. भट्ट

कैंसर का इलाज अब लाइलाज नहीं रहा. विशेषज्ञों के अनुसार, 60 प्रतिशत कैंसर रोगियों को बचाया जा सकता है.

जी हां, यह चिकित्सा बहुत ही महंगी है. वजह, इस चिकित्सा की सरकारी व्यवस्था अपर्याप्त तो है ही और प्राइवेट कैंसर अस्पतालों की संख्या भी बहुत कम है, और है भी तो बहुत महंगे हैं.

कैंसर का समुचित इलाज भारत की बहुसंख्य अभावग्रस्त आबादी की कल्पना के परे है. यदि कैंसर का इलाज कराना ही पड़े तो उन के जेवर, घर, बैल, खेत आदि तक बिक जाते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का आंकलन है कि भारत में तकरीबन 2 करोड़ से ज्यादा व्यक्ति हर साल चिकित्सा व्यय के कारण मध्यम श्रेणी से गरीबी रेखा के नीचे चले आते हैं. वहीं दूसरी ओर भारत सरकार को भी  दोहरी मार पड़ रही है. पहली, उन की चिकित्सा व्यवस्था पर व्यय. और दूसरी, उन की उत्पादन क्षमता से वंचित हो कर. रोग झेलने का कष्ट, परिवार पर विपत्ति और अनावश्यक व्यय आदि की मुसीबतों से बचने के लिए अच्छा होगा कि हम कैंसर रोग और उस के कारक तत्वों या कार्सिनोजन के प्रति अपनी जागरूकता बढ़ा कर बचाव के लिए सचेत हो जाएं.

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क्या कैंसर रोगियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है?: यह रोग नया नहीं है. आदि मानवों के कंकाल की हड्डियों में और इजिप्ट की ममियों में इस रोग के होने की पुष्टि हो चुकी है.

हमारे प्राचीन आयुर्विज्ञान के ग्रंथों में भी इस का वर्णन किया गया है. हां, यह सही है कि रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है. यह हाल केवल भारत का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का है.

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