अर्थराइटिस यानी गठिया को पहले बुढ़ापे का रोग माना जाता था. घुटने, कोहनी, कमर के जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में परेशानी कभी बुढ़ापे की निशानी कहलाती थी. डौक्टरों के मुताबिक जोड़ों के बीच का लिक्विड उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे खत्म होने लगता है, जिसके कारण शरीर में जोड़ों का लचीलापन खत्म होने लगता है, जिसे अर्थराइटिस करते हैं. जोड़ों का मूवमेंट प्रभावित होने से बूढ़े लोगों को अकड़न और दर्द महसूस होता है. साठ साल की उम्र के बाद ज्यादातर बुजुर्गों में गठिया के लक्षण दिखने लगते थे. लेकिन जैसे-जैसे हमारे खानपान और रहनसहन में बदलाव आ रहे हैं, अर्थराइटिस की समस्या सिर्फ बूढ़ों तक सीमित नहीं रह गयी है. अब गठिया का रोग जवान लोगों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रहा है.

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