भारत में ओलिंपिक अभी दूर

कयास यह लगाया जा रहा था कि वर्ष 2024 में ओलिंपिक खेलों के लिए भारत मेजबानी का दावा कर सकता है. लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है. क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष थौमस बाक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद साफ कर दिया कि भारत की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है. ऐसे में भारतीय खिलाडि़यों और खेलप्रेमियों के लिए यह अच्छी खबर तो नहीं कही जा सकती लेकिन कड़वी सचाई यह है कि भारत अभी ओलिंपिक के लिए तैयार नहीं है. जिस तरह भारतीय खेल संघों में राजनीति और भ्रष्टाचार का आलम है उस से उबर पाना अभी मुश्किल है. अकसर खेल संघों और खेल मंत्रालय के अधिकारियों के बीच खींचतान चलती रहती है. खिलाडि़यों को विश्वस्तरीय सुविधाओं की बात तो छोडि़ए उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पातीं. खेल पुरस्कारों को ले कर अकसर विवाद होते रहते हैं. और वैसे भी भारत में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए घोटाले जगजाहिर हैं. राजनेता, नौकरशाह और खेल पदाधिकारियों ने करोड़ोंअरबों कमा कर कैसे अपनी तिजोरियां भरीं, यह भी किसी से छिपा नहीं है. इस के लिए भारतीय ओलिंपिक संघ को भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित कर दिया गया था. यह अलग बात है कि अब यह निलंबन हट गया है. लेकिन राष्ट्रमंडल के दौरान जिन स्टेडियमों को बनाने में करोड़ों रुपए खर्च हुए वे स्टेडियम आज सफेद हाथी साबित हो रहे हैं. न तो उन का उचित रखरखाव हो पा रहा है और न ही उन का इस्तेमाल ही हो पा रहा है. पहले तो जो बदइंतजामी है, उसे ठीक करना होगा. खेल संघों को राजनीति और भ्रष्टाचार से मुक्त करना होगा, तभी खेल और खिलाडि़यों का भला होगा और हम ओलिंपिक जैसे बड़े आयोजनों के लिए तैयार हो पाएंगे.

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