प्रदीप कुमार सैनी, पवन कुमार सैनी, डा. कुलदीप कुमार

यूरोपीय देशों की यह एक प्रमुख फसल है, लेकिन अब इसे भारत में गृहवाटिका, फार्महाउस और कुछ प्रगतिशील किसान अपने खेत में भी उगाने लगे हैं.

लीक प्याज समूह व प्रजाति की फसल में आती है जो शरदकालीन मौसम को ज्यादा पसंद करती है. इस की गांठें ज्यादा नहीं बनती हैं और पत्तियां लंबी लहसुन की तरह होती हैं. इस का तना सफेद व पत्ते चौडे़, सीधे व नुकीले होते हैं.

लीक का इस्तेमाल ज्यादातर बड़ेबडे़ होटलों, रैस्टोरैंट वगैरह में होता है. लेकिन आजकल विदेशों से भारत में घूमने आने वाले लोग भी इसे सूप, सलाद व सब्जी के रूप में इस्तेमाल करते हैं. इस में विटामिन, कैल्शियम, लोहा औैर खनिज व लवण प्रचुर मात्रा में मिलते हैं.

भूमि व जलवायु

लीक की फसल या खेती के लिए दोमट या हलकी बलुई दोमट जीवांश वाली जमीन सब से बढि़या रहती है. इस का पीएच मान 6.0-7.0 के बीच का उत्तम होता है.

यह फसल ठंडी जलवायु को ज्यादा पसंद करती है. ज्यादा ठंड जो लंबे समय तक रहे, तो अधिक बढ़वार होती है. 20 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान सब से अच्छा माना गया है, लेकिन अंकुरण के लिए 35 डिगरी सैंटीग्रेड तापमान उचित रहता है.

खेत की तैयारी

खेत की तैयारी के लिए मिट्टी पलटने वाले हल या ट्रैक्टर हैरो से 2-3 जुताई करें जिस से सभी तरह की घास सूख कर खत्म हो जाए और मिट्टी बारीक हो जाए. 1-2 जुताई और कर के खेत को अच्छी तरह भुरभुरा कर के तैयार कर लेना चाहिए. खेत में घास व ढेले नहीं रहने चाहिए.

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