Readers' Problems :

आमदनी सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं.

मैं 38 साल का हूं. बच्चों की पढ़ाई, घर, दवा सबकुछ संभालतेसंभालते मन में डर रहता है कि भविष्य कैसे चलेगा. रात को नींद भी ठीक से नहीं आती. समझ नहीं आ रहा क्या करूं?

मैं आप की चिंता को पूरी तरह समझ रही हूं. आर्थिक दबाव इंसान को अंदर से बहुत परेशान कर देता है. सब से पहले यह जान लें कि आप अकेले नहीं हैं, बहुत से लोग इस स्थिति से गुजरते हैं. आप खर्चों को प्राथमिकता के अनुसार बांटने की कोशिश करें और जहां संभव हो, बचत के छोटेछोटे तरीके अपनाएं. परिवार से खुल कर बात करना भी मन को हलका करता है. याद रखिए, चिंता से समाधान नहीं निकलता, लेकिन शांत हो कर सोचने से रास्ता जरूर मिलता है.

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छोटे भाई की तरक्की पर ईर्ष्या होती है. क्या मैं गलत हूं?

घर में भाई की तारीफ होती रहती है. मैं एक 29 साल की युवती हूं. मेरा छोटा भाई पढ़ाई और कैरियर में बहुत आगे निकल गया है. मैं उस से प्यार करती हूं लेकिन मन के किसी कोने में ईर्ष्या भी है, जिसे स्वीकार करने में शर्म आती है. इस वजह से मैं उस से दूरी बनाने लगी हूं. क्या मेरा व्यवहार सही है?

आप गलत नहीं हैं. आप, बस, इंसान हैं. जिस समाज में हम पलेबढ़े हैं, उस में तुलना चुपचाप रिश्तों के बीच बैठ जाती है और हमें पता भी नहीं चलता कि कब प्यार के साथ ईर्ष्या भी जन्म ले लेती है. अपने छोटे भाई से प्रेम करना और उस के आगे निकल जाने पर मन में कसक महसूस करना- ये दोनों भाव एकसाथ रह सकते हैं, इस में कोई नैतिक कमी नहीं है. शर्म तब नहीं होती जब भावना आती है, शर्म तब होती है जब हम उसे पहचानने से इनकार कर देते हैं.

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