कई तरह के कीड़ेमकोड़े इस धरती पर रेंगते, फुदकते व उड़ते हैं. उन में से ज्यादातर की नजर फल, सब्जी, अनाज व हरियाली पर लगी रहती है. इसलिए बहुत से कीड़े किसानों को नुकसान पहुंचाने में लगे रहते हैं. इन कीटपतंगों का कुनबा बहुत बड़ा है. खेत व खलिहानों से गोदामों तक इन की घुसपैठ बनी रहती है. इन के अलावा चूहे, फफूंद व खरपतवार भी किसानों की लागत व मेहनत को नुकसान पहुंचाते हैं. लिहाजा कीटों की रोकथाम बहुत जरूरी है, लेकिन फसलों को बचाना आसान नहीं है. पुराने जमाने में रासायनिक दवाएं नहीं थीं, लेकिन पैदावार कम थी. नीम व गौमूत्र जैसे देसी तरीकों से ही कीड़ों की रोकथाम की जाती थी. फिर भी काफी उपज खराब हो जाती थी. लेकिन अब बहुत बदलाव आया है. नए बीजों, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के  इस्तेमाल से पैदावार बढ़ी है. लेकिन कीड़े भी बढ़े हैं. इन की मार से कई बार तो फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है. रासायनिक कीटनाशकों ने कीटों के सफाए व फसलों की हिफाजत को आसान कर दिया है. फिलहाल देश में 272 किस्म के 16000 कीटनाशकों का 1 लाख, 70000 मीट्रिक टन से भी ज्यादा उत्पादन हो रहा है, क्योंकि ज्यादातर किसान रासायनिक कीटनाशक छिड़कने के आदी हैं. कीड़ों का सफाया करने के लिए उन्हें

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