सामान से लदीफंदी घर पहुंची, तो मैं ने बरामदे में मम्मी को इंतजार करते पाया.‘‘अरे मम्मी, आप कब आईं? न फोन, न कोई खबर,’’ मम्मी के पैर छूते हुए मैं ने उन से पूछा.

‘‘अचानक ही प्रोग्राम बन गया,’’ कहते हुए मम्मी ने मु झे गले लगा लिया. रामू, रामू, जरा चाय बनाना,’’ मैं ने नौकर को आवाज दे कर चाय बनाने को कहा.

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