दोपहर की धूप ढलान पर थी, पर सुनीता की चिंता बढ़ती जा रही थी. पति दीपक घर से सुबह से ही निकले हुए थे. अब तक तो उन्हें वापस आ जाना चाहिए था. इसी उधेड़बुन और इंतजार में बेचैन सुनीता बालकनी में जा कर खड़ी हो गई. मन में विचारों की तरंगें हिलोरें लेने लगीं. ‘शायद रास्ते में ट्रैफिक जाम होगा, इसी वजह से लौटने में इतनी देर हो गई. दिल्ली में कभी भी किसी सड़क पर जाम लग सकता है. सिर्फ एक कप चाय पी हुई है दीपक ने सुबह से. न जाने बेटे के घर कुछ खाने को मिला होगा या नहीं.

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