बिचौलियों के खिलाफ लगभग हर देश में हमेशा एक संशय का भाव बना रहता है. चूंकि किराने की दुकान का मालिक ही अंतिम उपभोक्ता के नजदीक होता है और थोक में खरीदने वाला उत्पादक के करीब होता है, इसलिए उपभोक्ता और उत्पादक इन बिचैलियों को बड़ा मुनाफा हड़पने वाला सम झते हैं. यह वैसी ही भावना है जिस के आधार पर देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने नोटबंदी लागू की थी कि जनता का बड़ा पैसा कालेधन के रूप में अमीरों के लौकरों में बंद है.

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