लोकतंत्र की हत्या करने के लिए सैनिक तानाशाही की जरूरत नहीं है, सिर्फ लोकतांत्रिक संस्थाओं को धीरेधीरे जहर दे कर मार दो, लोकतंत्र अपनेआप मर जाएगा. पौराणिक युग का राज स्थापित करने के चक्कर में देश में इस समय चारों तरफ से उन संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं जो लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए जरूरी हैं. संस्थाओं को मारने के लिए बाहरी हमले से ज्यादा अंदरूनी घुसपैठ काफी होती

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