Independence Day Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को मुगलों के बनाए लालकिले की प्राचीर पर चढ़ कर पूरे देश को जो बताया कि देश को अब दिमागी नक्सलियों से डर है, वह पौराणिक परंपरा के अनुसार बिलकुल सही है. इस देश के संस्कार ही यही हैं कि राजा तक में साधारण ज्ञान न हो और वह किसी और ज्ञानी के पास जाए जो केवल ब्राह्मणों से सुनसुन कर ज्ञानी हुआ है. आम आदमी ज्ञान प्राप्त कर के दिमागी नक्सल बनता है जैसा रामायण काल में शंबूक ने कोशिश की भी.

महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को ज्ञान देने का वर्णन है. युधिष्ठिर उस से पहले इंद्रप्रस्थ का राज चला चुके थे. बिना ज्ञान या दिमाग के वे कैसे राजा थे, यह भीष्म-युधिष्ठिर संवाद से साफ है. नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश का हर पढ़ालिखा अपने को युधिष्ठिर समझे और संघ के सरसंघसंचालक, प्रधानमंत्री को भीष्म माने तभी वह नक्सली आरोप से मुक्त होगा.

युधिष्ठिर का ज्ञान बरसों राज करने के बाद, युद्ध की तैयारी करने के बाद, युद्ध जैसेतैसे जीतने के बाद क्या था, यह कुछ सवालों से स्पष्ट है जो 39वें अध्याय में वे पूछते हैं. एक प्रश्न है कि ‘पुरुष यौवन से उन्मुक्त स्त्रियों की रक्षा कैसे कर सकता है जो पुरुषों को ठगती रहती हैं, जिन के हाथ में आया हुआ कोई भी पुरुष बच कर नहीं जा सकता? शुक्राचार्य और बृहस्पति से भी जिन स्त्रियों की बुद्धि बढ़ कर है, जिन का झूठ सच होता है और सच झूठ होता है, जो सदा ही पुरुषों के मन में विकार पैदा करती रहती हैं. (संदर्भ- श्लोक 1 से 13, अध्याय 39, अनुशासन पर्व) उन से कैसे रक्षा की जाए.

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