Reservation Controversy: जंतर मंतर पर आरक्षण हटाओ के नाम पर एक अलग ही ड्रामा चल रहा है. उंची जाति के वो नौजवान आंदोलन कर रहे हैं जिनके बाप दादाओ ने हजारों साल का आरक्षण हासिल किया, जाति, जमीन, मंदिर और पद पर जन्मजात आरक्षण लेने वाले लोग उस तबके के आरक्षण को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं जिन्हें सदियों तक शिक्षा और सम्मान से दूर रखा. सरकारी नौकरियां खत्म हो रही हैं, राजनीति का आरक्षण भी गुलामों को पैदा करने वाला जुगाड़ बन कर रह गया है इसके अलावा 2019 में 10 प्रतिशत उंची जाति को 10 प्रतिशत EWS आरक्षण मिल भी चुका है, फिर यह ड्रामा क्यों?

जंतर मंतर पर फिर वही नाटक शुरू हो गया है. कुछ ऊंची जाति के नौजवान हाथ में तिरंगा और आरक्षण हटाओ का बोर्ड ले कर बैठे हैं और आरक्षण हटाओ के नारे लगा रहे हैं. इनमें ज्यादातर 20 से 25 साल के हैं. कैमरे पर कह रहे हैं कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है. हम गरीब हैं और इसकी वजह आरक्षण है. आरक्षण के कारण हमें नौकरी नहीं मिल रही. आरक्षण हटाओ आंदोलन के नौजवान सवाल उठा रहे हैं कि आरक्षण जाति के आधार पर क्यों?

जिस देश में आज भी जाति देख कर दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने नहीं दिया जाता. मंदिर में घुसने पर पीटा जाता है और स्कूलों में दलित बच्चों के साथ भेदभाव होता है वहाँ जातिगत आरक्षण पर सवाल उठाना बेहद शर्मनाक है. इससे उंची जाति वाले लोगों की घटिया जातिवादी मानसिकता जाहिर हो जाती है. इस देश में तो हजारों वर्षो से जातिगत आरक्षण क़ायम है. अगर संवैधानिक आरक्षण पर सवाल उठेगा तो सदियों पुराने धार्मिक आरक्षण पर भी उंगली उठाई जाएगी. एक विशिष्ट वर्ग को कई तरह के आरक्षण हासिल थे जो आज तक बरकरार हैं. इन पर भी सवाल उठाये जायेंगे.

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